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रामपुरवासियो, हमारे शहर की हरियाली, खेत-खलिहान और शांत परिवेश कई बार ऐसे जीवों का घर भी बन जाता है जिनसे हम अनजाने में सामना कर बैठते हैं। बरसात के बाद का मौसम विशेष रूप से ऐसा समय होता है जब सांपों की गतिविधियाँ बढ़ जाती हैं। हालाँकि रामपुर में यह आम दृश्य नहीं है, लेकिन भारत के कई हिस्सों में पाए जाने वाला कॉमन क्रेट (Common Krait) नामक साँप अपनी घातक विषाक्तता के लिए काफ़ी प्रसिद्ध है। यह दिखने में आकर्षक, लेकिन अत्यंत ख़तरनाक प्राणी है। इसकी पहचान, जीवन-शैली और इससे बचाव के उपायों को जानना हमारे जैसे कृषि प्रधान क्षेत्रों के लोगों के लिए बेहद आवश्यक है।
आज के इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि कॉमन क्रेट को कैसे पहचाना जा सकता है, यह किन जगहों पर रहता है और इसका स्वभाव कैसा होता है। फिर, हम इसके भोजन और शिकारी व्यवहार पर चर्चा करेंगे। इसके बाद, हम इसके प्रजनन चक्र और जीवन के विभिन्न चरणों को समझेंगे। साथ ही, हम इसके ज़हर की प्रकृति और मानव शरीर पर इसके असर की वैज्ञानिक जानकारी भी साझा करेंगे। अंत में, हम जानेंगे कि यदि किसी को कॉमन क्रेट ने काट लिया हो तो प्राथमिक उपचार और चिकित्सीय देखभाल के कौन से कदम तुरंत उठाने चाहिए।
कॉमन क्रेट को कैसे पहचानें
कॉमन क्रेट भारत के सबसे पहचानने योग्य और साथ ही सबसे भ्रामक साँपों में से एक है। इसकी सबसे प्रमुख पहचान इसका चमकदार नीला-काला या गहरा ग्रे रंग है, जिस पर दूधिया सफ़ेद या हल्की राखी धारियाँ शरीर के पूरे हिस्से पर समान रूप से बनी होती हैं। जब यह साँप टॉर्च या चाँदनी में नज़र आता है, तो इसका शरीर हल्की नीली चमक लिए झिलमिलाता प्रतीत होता है। इसका शरीर पतला, बेलनाकार और अत्यंत चिकना होता है, जो स्पर्श में रेशम जैसा महसूस होता है। एक पूर्ण विकसित क्रेट की लंबाई सामान्यतः 4 से 5 फीट तक होती है, लेकिन कुछ मामलों में यह 6 फीट तक भी बढ़ सकता है। इसका सिर छोटा और गर्दन से स्पष्ट रूप से अलग नहीं होता, जिससे इसे पहचानना थोड़ा कठिन हो जाता है। आँखें छोटी और गोल होती हैं, जिनकी पुतलियाँ चमकदार काली होती हैं। इसकी रीढ़ पर बड़े षट्कोणीय स्केल्स (Hexagonal Scales) पाए जाते हैं, जो इसे अन्य सांपों से विशिष्ट बनाते हैं। अक्सर लोग इसे वुल्फ़ स्नेक (Wolf Snake) समझने की भूल कर बैठते हैं, क्योंकि दोनों के शरीर पर सफ़ेद धारियाँ होती हैं। किंतु, वुल्फ़ स्नेक की पट्टियाँ चौड़ी होती हैं और उसकी गर्दन के पास एक स्पष्ट कॉलर जैसा निशान दिखता है - जबकि कॉमन क्रेट की धारियाँ पतली और समान अंतराल पर होती हैं। यह अंतर पहचानने वालों के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकता है।

आवास और स्वभाव
कॉमन क्रेट अत्यंत अनुकूलनीय (Adaptable) प्रजाति है, जो भारत के लगभग हर भूभाग में जीवित रह सकती है। यह मैदानी क्षेत्रों, खेतों, बगीचों, चट्टानी इलाक़ों, और घास के मैदानों में पनपता है। इसके अलावा, यह मानव बस्तियों के आसपास भी बड़ी संख्या में पाया जाता है - विशेष रूप से वहाँ, जहाँ चूहे और मेंढक प्रचुर मात्रा में मिलते हैं। यह साँप प्रायः रात में सक्रिय (Nocturnal) रहता है और दिनभर किसी अँधेरे, ठंडे स्थान जैसे ईंटों के ढेर, लकड़ी के तख़्तों, पत्तों के नीचे या चूहे के बिलों में छिपा रहता है। अपने स्वभाव में यह सामान्यतः शांत और भयभीत करने वाला नहीं होता, लेकिन जब इसे छेड़ा जाए या गलती से उस पर पैर पड़ जाए, तो यह घातक रूप से काट सकता है। एक रोचक तथ्य यह है कि कॉमन क्रेट का शरीर इतना लचीला होता है कि यह बहुत छोटे-से छेद से भी निकल सकता है। यही कारण है कि यह अक्सर घरों में अनजाने में प्रवेश कर जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह रात के समय चारपाइयों या फर्श पर सो रहे लोगों के पास पहुँच जाता है, जिससे दुर्घटनाएँ होती हैं। इसलिए ग्रामीण इलाक़ों में लोगों को इसे पहचानने और बचाव करने की जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है।
आहार और शिकारी व्यवहार
कॉमन क्रेट का आहार इसकी रहस्यमय और भयावह प्रकृति को दर्शाता है। यह साँप मुख्य रूप से दूसरे साँपों का शिकारी (Ophiophagous) है - यानी यह साँप खाकर ही जीवित रहता है। यह कई बार अपने ही परिवार या प्रजाति के साँपों को भी खा जाता है, जो इसकी क्रूर शिकारी प्रवृत्ति का प्रमाण है। इसके अलावा, यह मेंढक, छिपकलियाँ, छोटे कृन्तक (जैसे चूहे), और कभी-कभी छोटे पक्षी के बच्चे भी खाता है। शिकार करने का इसका तरीका बहुत ही चतुर और घातक होता है। यह पूरी तरह चुपचाप और बिना कंपन पैदा किए रेंगता है, और जैसे ही शिकार पास आता है, यह तेज़ी से वार कर ज़हर इंजेक्ट (inject) कर देता है। कुछ ही मिनटों में शिकार लकवाग्रस्त होकर निष्क्रिय हो जाता है। यह एक निशाचर शिकारी है, जो रात के समय तापमान कम होने पर सबसे अधिक सक्रिय होता है। कई बार यह घास के बीच या पत्थरों के नीचे छिपकर घात लगाता है, जिससे इसे देख पाना लगभग असंभव होता है।

प्रजनन और जीवन चक्र
कॉमन क्रेट का जीवन चक्र इसकी जैविक जटिलता को दर्शाता है। इसका प्रजनन काल सामान्यतः मार्च से जुलाई के बीच होता है, जब तापमान और आर्द्रता अनुकूल होते हैं। यह साँप अंडे देने वाला (Oviparous) है। मादा क्रेट एक बार में 5 से 12 अंडे देती है, जिन्हें वह किसी सुरक्षित, नम स्थान - जैसे सूखी घास, मिट्टी या लकड़ी के तख़्तों के नीचे रखती है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ मादाएँ अपने अंडों के चारों ओर कुंडली मारकर उनकी रक्षा करती हैं। अंडों का ऊष्मायन काल लगभग 55-60 दिन होता है, जिसके बाद छोटे, लेकिन पूरी तरह सक्षम साँप बाहर आते हैं। नवजात क्रेट 25-30 सेंटीमीटर लंबे होते हैं और अपने वयस्क रूप की तरह ही ज़हरीले होते हैं। कॉमन क्रेट का जीवनकाल सामान्यतः 8 से 10 वर्ष तक होता है, लेकिन कैद में यह इससे भी अधिक समय तक जीवित रह सकता है।
ज़हर और उसके प्रभाव
कॉमन क्रेट का ज़हर जैविक रूप से सबसे खतरनाक विषों में से एक माना जाता है। यह न्यूरोटॉक्सिक (Neurotoxic) होता है, यानी यह सीधे तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क के नियंत्रण तंत्र पर असर डालता है। इसके काटने के बाद अक्सर कोई दर्द नहीं होता, जिससे पीड़ित को तुरंत खतरे का अहसास नहीं होता। यही कारण है कि ग्रामीण इलाक़ों में लोग इसे मामूली समझ लेते हैं। धीरे-धीरे इसके प्रभाव से शरीर सुन्न पड़ने लगता है, आँखों की पलकें झुकने लगती हैं, बोलने और निगलने में कठिनाई होती है, और अंततः श्वसन मांसपेशियाँ लकवाग्रस्त हो जाती हैं। यदि समय पर इलाज न मिले, तो यह साँस रुकने से मृत्यु का कारण बन सकता है। इसका ज़हर कोबरा से भी अधिक शक्तिशाली होता है - केवल 0.9 मिलीग्राम विष ही एक वयस्क मनुष्य को मारने के लिए पर्याप्त है।

कॉमन क्रेट के काटने की पहचान और प्राथमिक उपचार
कॉमन क्रेट के काटने की पहचान करना कठिन होता है क्योंकि इसके दाँत छोटे होते हैं और काटने के बाद घाव पर सूजन या दर्द नहीं दिखता। फिर भी, शुरुआती लक्षणों में झुनझुनी, सिरदर्द, चक्कर, धुंधली दृष्टि, और निगलने में कठिनाई शामिल हैं। यदि किसी को क्रेट ने काटा हो, तो सबसे पहले उसे शांत रखें और शरीर को हिलाने से बचाएँ, ताकि ज़हर का प्रसार धीमा हो। इसके बाद, प्रभावित अंग पर प्रेशर बैंडेज और इम्मोबिलाइज़ेशन (Pressure Bandage with Immobilization) लगाना चाहिए। पीड़ित को तुरंत नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाना आवश्यक है, जहाँ एंटीवेनम (Antivenom) और आवश्यकतानुसार इंट्यूबेशन (intubation) या वेंटिलेशन (ventilation) दिया जा सके। घरेलू उपाय जैसे चाकू से घाव काटना या ज़हर चूसना न केवल बेअसर हैं बल्कि और नुकसान पहुँचा सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण है समय - अगर 1 घंटे के भीतर मेडिकल सहायता मिल जाए, तो जान बचने की संभावना 90% से अधिक होती है।
संदर्भ-
https://tinyurl.com/24pqremu
https://tinyurl.com/2ykvnrvf
https://tinyurl.com/yapkwjch
https://tinyurl.com/27j2w2d9
https://tinyurl.com/259gmeoq
https://tinyurl.com/23j28ush
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