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मुंगेरवासियों, क्या आप हमारे जिले में उगने वाले विशिष्ट पौधों के बारे में जानते हैं? अपनी अनूठी भौगोलिक स्थिति के कारण, हमारे जिले में विविध पौधें पाए जाते हैं। मुंगेर में, लेमनग्रास की मीठी सुगंध हवा में रची-बसी रहती है, क्योंकि यहां इस बहुमुखी जड़ी-बूटी की बहुतायत में खेती की जाती है। स्थानीय किसान इस पौधे को उगाने में अत्यधिक सावधानी बरतते हैं, ताकि यह पौधा हमारे क्षेत्र की अनूठी जलवायु और मिट्टी की स्थितियों में अच्छी तरह पनपे। इसके बाद, लेमनग्रास की कटाई की जाती है और इसका सावधानीपूर्वक प्रसंस्करण किया जाता है। दरअसल, लेमनग्रास से एक मूल्यवान तत्व तेल (एसेंशियल ऑयल) प्राप्त होता है, जिसे अपने औषधीय गुणों के लिए सराहा जाता है।
लेमनग्रास का वैज्ञानिक नाम सिम्बोपोगोन (Cymbopogon) है, जिसे विभिन्न जगहों पर विशिष्ट स्थानीय नामों से जाना जाता है। लेमनग्रास की नींबू के समान सुगंध के कारण, इसकी कुछ प्रजातियों (विशेष रूप से सिम्बोपोगोन सिट्रेटस) की आमतौर पर पाक और औषधीय जड़ी-बूटियों के रूप में खेती की जाती है। लेमनग्रास का उपयोग पाचन तंत्र की ऐंठन, पेट दर्द, उच्च रक्तचाप, ऐंठन, दर्द, उल्टी, खांसी, जोड़ों में दर्द (गठिया), बुखार, सामान्य सर्दी और थकावट के इलाज के लिए भी किया जाता है। इसका उपयोग कीटाणुओं को मारने और कसैले के रूप में भी किया जाता है। दूसरी ओर, लेमनग्रास तत्व तेल, ताजा या आंशिक रूप से सूखे लेमनग्रास पत्तों के भाप आसवन से प्राप्त होता है। आसवन के बाद तेल का रंग पीला होता है और इससे नींबू जैसी सुगंध निकलती है।

इन्हीं लाभों की वजह से, लेमनग्रास को हमारे जिले के ‘एक जिला एक उत्पाद’ के रूप में चुना गया है। एक जिला एक उत्पाद, सरकार की पहल है, जिसमें हमारे देश के प्रत्येक जिले के एक विशिष्ट उत्पाद को विशिष्ट पहचान दी जाती हैं। लेमनग्रास को ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना में शामिल करने के कारण, किसानों को सशक्त बनाना, फसल में सुधार करना और इसकी आपूर्ति में वृद्धि करना है।
जैसा कि हमने ऊपर पढ़ा है, हमारे जिले में इस फसल के लिए अनुकूल जलवायु, मिट्टी और उत्पादन क्षमता हैं। यह मुंगेर जैसे उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में 100-150 सेंटीमीटर की वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में पनपता है। साथ ही, इसे अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी, जिसका पीएच 6.5 से 7.0 हो, आवश्यक है। इसके अलावा, मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा अधिक होनी चाहिए।
आज, लेमनग्रास तेल का निर्यात 76 से अधिक देशों में किया जाता है। वर्ष 2020-2021 (अप्रैल-नवंबर) के दौरान, भारत ने 7.22 मिलियन अमरीकी डॉलर मूल्य के लेमनग्रास तेल का निर्यात किया है। इसकी खेती से किसानों को तिहरा लाभ हो रहा है। पहला, एक पौधे से 40 से 50 पौधों का निर्माण किया जाता है; दूसरा, इसके पत्तों से बनने वाला तेल 1500 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक रहा है; और तीसरा की इसका उत्पादन कम पानी में भी हो जाता है। अतः लेमनग्रास खेती करने वाले किसानों को जागरूक करना जरूरी है, ताकि भारत सरकार द्वारा दिए जा रहे प्रोत्साहन एवं सुविधाओं का वे लाभ उठा सकें।

लेमनग्रास का पौधा, लगभग 2 मीटर (6.5 फीट) तक बढ़ता है और इसके निचले तने बैंगनी-गुलाबी रंग के होते हैं। इस तेल का उपयोग साबुन में, कीट स्प्रे और मोमबत्तियों में कीट भगाने वाले तत्व (विशेष रूप से मच्छरों और मक्खियों) के रूप में, और एरोमाथेरेपी (सुगंध चिकित्सा) में किया जाता है। लेमनग्रास के मुख्य रासायनिक घटक - गेरानियोल (Geraniol) और सिट्रोनेलोल (Citronellol), एंटीसेप्टिक अर्थात रोगाणुरोधक हैं। इसीलिए, इनका उपयोग घरेलू कीटाणुनाशकों और साबुनों में किया जाता है। तेल उत्पादन के अलावा, लेमनग्रास का उपयोग स्वाद बढ़ाने वाले घटक (फ्लेवरिंग) के रूप में, विभिन्न व्यंजनों में किया जाता है।
हमारे देश भारत एवं मुंगेर शहर के अलावा, लेमनग्रास कंबोडिया, वियतनाम, लाओस, श्रीलंका, म्यांमार और थाईलैंड देशों में भी पाया जाता है। इसी घास की एक अन्य प्रजाति समुद्री दक्षिण पूर्व एशिया का मूल है।
भारतीय पारंपरिक चिकित्सा में, लेमनग्रास का उपयोग एक औषधीय जड़ी-बूटी के रूप में और इत्र/सुगंध में किया जाता है। परंतु, ब्राजील (Brazil) में पारंपरिक चिकित्सा में चिंता की स्थिति में लेमनग्रास चाय का उपयोग किया जाता है। हालांकि, मनुष्यों पर किए गए एक अध्ययन में इसका कोई प्रभाव नहीं पाया गया। दूसरी ओर, समोआ (Samoa) और टोंगा (Tonga) के लोग, मौखिक संक्रमणों के लिए पारंपरिक उपचार के रूप में लेमनग्रास की कुचली हुई पत्तियों का उपयोग करते हैं। इसके अतिरिक्त, हुडू (Hoodoo) में, लेमनग्रास वैन वैन ऑयल (Van Van Oil) का प्राथमिक घटक है, जिसका उपयोग बुराई से बचने, घर की आध्यात्मिक सफाई करने और अच्छे प्रेम संबंधों के लिए किया जाता है।
संदर्भ
1. https://tinyurl.com/4x85vsfa
2. https://tinyurl.com/mr23absk
3. https://tinyurl.com/53z59wyx