सेहत के साथ-साथ पहाड़ों की अर्थव्यवस्था को भी निखार रहा है, ट्रैकिंग उद्योग!

गतिशीलता और व्यायाम/जिम
24-10-2025 09:10 AM
सेहत के साथ-साथ पहाड़ों की अर्थव्यवस्था को भी निखार रहा है, ट्रैकिंग उद्योग!

जब हम व्यायाम या 'एक्सरसाइज' (exercise) की बात करते हैं, तो अक्सर हमारे दिमाग में जिम (gym), ट्रेडमिल (tredmill) या शहर के पार्कों में दौड़ते लोगों की तस्वीरें उभरती हैं। लेकिन हम, जो पहाड़ों के बीच रहते हैं, उनके लिए सेहत और कसरत का मतलब कुछ और भी हो सकता है। हमारे लिए चलना, चढ़ना और प्रकृति के बीच रहना जीवन का एक हिस्सा है। पर क्या हो अगर इसी रोजमर्रा की गतिविधि को एक व्यवस्थित और साहसिक रूप दे दिया जाए? यहीं से ट्रैकिंग (trekking) की अवधारणा शुरू होती है, जो व्यायाम, प्रकृति से जुड़ाव और रोमांच का एक अद्भुत मिश्रण है। यह लेख पिथौरागढ़ के निवासियों के लिए ट्रैकिंग के इसी महत्व और इससे जुड़ी नई संभावनाओं को समझने का एक प्रयास है।

सबसे पहले बात करते हैं एक ऐसी खबर की जो सीधे तौर पर हमारे शहर पिथौरागढ़ से जुड़ी है। पर्यटन विभाग ने स्थानीय पर्यटन और साहसिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए एक नई और शानदार पहल की है। शहर के पास स्थित सातशिलिंग (Satshiling) से प्रसिद्ध असुरचूला (Asurchula) मंदिर तक एक नया ट्रैकिंग रूट बनाने की योजना पर काम शुरू हो गया है।

इस योजना का उद्देश्य पर्यटकों और स्थानीय लोगों को प्रकृति के बीच समय बिताने और पैदल चलने के लिए एक सुरक्षित और सुंदर रास्ता उपलब्ध कराना है। इस रूट (route) को विकसित करने के लिए रास्ते को सुधारा जाएगा, जगह-जगह पर व्यू-पॉइंट्स (view point) बनाए जाएँगे जहाँ से हिमालय के खूबसूरत नज़ारे देखे जा सकेंगे, और यात्रियों के लिए बैठने और आराम करने जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी दी जाएँगी। असुरचूला मंदिर पहले से ही स्थानीय लोगों के लिए आस्था का एक बड़ा केंद्र है, और इस नए ट्रैकिंग रूट (trekking route) के बन जाने से यह स्थान पर्यटन के नक्शे पर भी उभर कर सामने आएगा। यह पिथौरागढ़ के लोगों के लिए न केवल सेहतमंद रहने का एक नया जरिया बनेगा, बल्कि शहर में पर्यटन की संभावनाओं को भी एक नई उड़ान देगा। यह कदम दिखाता है कि हमारी सरकार भी ट्रैकिंग के महत्व को समझ रही है।

अक्सर लोग 'ट्रैकिंग' (Trekking) और 'हाइकिंग' (Hiking) शब्दों का इस्तेमाल एक दूसरे की जगह कर लेते हैं, लेकिन इन दोनों में एक बुनियादी अंतर है। इसे समझना जरूरी है ताकि हम ट्रैकिंग के वास्तविक अर्थ को जान सकें।

हाइकिंग (Hiking) आमतौर पर एक दिन की गतिविधि होती है। इसमें आप किसी बने-बनाए रास्ते या पगडंडी पर कुछ घंटों के लिए पैदल चलते हैं और शाम तक वापस आ जाते हैं। यह प्रकृति में घूमने और हल्का व्यायाम करने का एक अच्छा तरीका है।

ट्रैकिंग (Trekking) इससे कहीं ज़्यादा बड़ी और चुनौतीपूर्ण गतिविधि है। ट्रैकिंग का मतलब है कई दिनों तक पैदल यात्रा करना, अक्सर ऐसे इलाकों में जहाँ सड़कें या परिवहन के अन्य साधन उपलब्ध नहीं होते। यह यात्रा मुश्किल इलाकों, जैसे कि पहाड़ों, जंगलों या घाटियों से होकर गुजरती है। ट्रैकिंग में आपको रातें टेंट में या दूर-दराज के गाँवों में गुजारनी पड़ती हैं। यह सिर्फ एक शारीरिक गतिविधि नहीं है, बल्कि यह एक मानसिक और आध्यात्मिक अनुभव भी है। यह आपको प्रकृति के साथ गहरा जुड़ाव बनाने का मौका देती है, आपको अपनी शारीरिक और मानसिक सीमाओं को परखने के लिए चुनौती देती है, और आपको दुनिया को एक अलग, धीमी गति से देखने का अवसर प्रदान करती है। ट्रैकिंग का असली आनंद मंजिल पर पहुँचने में नहीं, बल्कि उस पूरे सफर में है।
 

ट्रैकिंग सिर्फ एक साहसिक गतिविधि नहीं है; यह हमारे राज्य उत्तराखंड की स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण इंजन भी है। जब पर्यटक देश-विदेश से यहाँ ट्रैकिंग करने आते हैं, तो इसका सीधा फायदा हमारे दूर-दराज के गाँवों में रहने वाले लोगों को मिलता है, और यह पलायन जैसी गंभीर समस्या को रोकने में भी मदद करता है।

  • स्थानीय रोजगार का सृजन: ट्रैकिंग से जुड़े कई तरह के रोजगार पैदा होते हैं। स्थानीय युवा गाइड, पोर्टर (सामान उठाने वाले), कुक और कैंप स्टाफ के रूप में काम करते हैं। इससे उन्हें अपने ही गाँव में रहकर एक अच्छी आय का स्रोत मिल जाता है और उन्हें काम की तलाश में बड़े शहरों की ओर नहीं जाना पड़ता।
  • छोटे व्यवसायों को समर्थन: जब ट्रैकर किसी यात्रा पर निकलते हैं, तो वे स्थानीय होमस्टे (home stay) या लॉज (lounge) में रुकते हैं, स्थानीय दुकानों से सामान खरीदते हैं, और स्थानीय जीप या टैक्सी सेवाओं का उपयोग करते हैं। इससे पैसा सीधे स्थानीय समुदाय के हाथों में जाता है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
  • पलायन पर रोक: यह उत्तराखंड के लिए सबसे बड़ा लाभ है। जब गाँवों में ही रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे, तो युवा पीढ़ी अपने घर, अपनी संस्कृति और अपनी जमीन से जुड़ी रहेगी। ट्रैकिंग पर्यटन इस दिशा में एक बहुत ही सकारात्मक भूमिका निभा रहा है।
  • पर्यावरण संरक्षण: ट्रैकिंग एक प्रकार का सस्टेनेबल (sustainable) या टिकाऊ पर्यटन है। स्थानीय समुदाय यह समझता है कि उनकी आजीविका इन पहाड़ों, जंगलों और नदियों की सुंदरता पर ही निर्भर है। इसलिए, वे खुद इन प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए प्रेरित होते हैं।

हमारा कुमाऊँ क्षेत्र ट्रैकर्स (trekkers) के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। यहाँ हर तरह के ट्रैकर्स के लिए, चाहे वे शुरुआती हों या अनुभवी, अनगिनत अवसर मौजूद हैं। इनमें से कई विश्व प्रसिद्ध ट्रैकिंग रूट हमारे पिथौरागढ़ जिले में ही स्थित हैं, जो इसे इस साहसिक खेल का एक प्रमुख केंद्र बनाते हैं।

  • पिथौरागढ़ के प्रमुख ट्रैक: हमारे जिले में मिलम ग्लेशियर ट्रैक है, जो न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए बल्कि अपने ऐतिहासिक महत्व (पुराना तिब्बत व्यापार मार्ग) के लिए भी जाना जाता है। पंचाचूली बेस कैंप ट्रैक आपको पाँच चोटियों के राजसी दृश्यों के बेहद करीब ले जाता है। वहीं, आदि कैलाश ट्रैक का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है, जो तीर्थयात्रियों और ट्रैकर्स दोनों को आकर्षित करता है।
  • कुमाऊँ के अन्य प्रसिद्ध ट्रैक: पिथौरागढ़ के अलावा, कुमाऊँ में पिंडारी ग्लेशियर ट्रैक है, जिसे सबसे आसानी से पहुँचा जा सकने वाला ग्लेशियर ट्रैक माना जाता है। इसके अलावा कफनी ग्लेशियर और सुंदरढूंगा घाटी ट्रैक भी अपनी मनमोहक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध हैं।

यह विविधता दिखाती है कि हमारे पास प्राकृतिक सुंदरता का कितना बड़ा खजाना है। जरूरत है तो बस इसे सही तरीके से दुनिया के सामने रखने की।

कुल मिलाकर ट्रैकिंग सिर्फ चलना या घूमना नहीं है। यह खुद को जानने, प्रकृति को महसूस करने, और स्थानीय समुदाय को सशक्त बनाने का एक माध्यम है। पिथौरागढ़ के निवासी होने के नाते, हमें इन पहाड़ों को केवल एक खूबसूरत पृष्ठभूमि के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि इन्हें स्वास्थ्य, रोमांच और आर्थिक समृद्धि के एक अवसर के रूप में अपनाना चाहिए। असुरचूला जैसे नए मार्गों के विकास के साथ, हमारा भविष्य उज्ज्वल है। तो चलिए, अपने बैकपैक तैयार करें और अपने ही घर के पास मौजूद इस अद्भुत दुनिया को नापने के लिए निकल पड़ें।

 

संदर्भ 

https://tinyurl.com/29e4jbmo 
https://tinyurl.com/2czm2qsr 
https://tinyurl.com/22n7onvp 
https://tinyurl.com/28jov8kp 



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