जरूर पढ़ें, वैश्विक व्यापारिक पवन व वायुदाब बेल्ट उत्तरी भारत में मौसम कैसे बदलते हैं?

जलवायु और मौसम
21-09-2026 09:27 AM
जरूर पढ़ें, वैश्विक व्यापारिक पवन व वायुदाब बेल्ट उत्तरी भारत में मौसम कैसे बदलते हैं?

उष्णकटिबंधीय मौसम प्रणालियाँ (Tropical weather systems), वैश्विक कम दबाव की बेल्ट से जुड़ी होती हैं, जिसे अंतःउष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र या आईटीसीजेड (Intertropical Convergence Zone - ITCZ) कहा जाता है। यहाँ उत्तरी और दक्षिणी गोलार्द्धों की व्यापारिक हवाएँ (ट्रेड विंड्स – Trade winds) आपस में मिलती हैं। भूमध्य रेखा के पास तीव्र सौर तापन से प्रेरित होकर, यह गर्म हवा ऊपर उठती है, जिससे संवहन गतिविधि का एक निरंतर बेल्ट बनता है। जैसे-जैसे पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है, अंतःउष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र साल भर उत्तर और दक्षिण की ओर अपनी स्थिति बदलता रहता है। इससे नमी से भरी महासागरीय हवाएँ, विशाल महाद्वीपीय भूभागों के ऊपर बहती हैं और उष्णकटिबंधीय हवा की दिशा में बदलाव को संचालित करती हैं।

सरल अर्थ में, अंतःउष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र, आपस में मिलने वाली व्यापारिक हवाओं और ऊपर उठती हवा का वह क्षेत्र/बेल्ट है, जो भूमध्य रेखा के पास पृथ्वी के निचले वायुमंडल को घेरता है। ऊपर उठती हवा से बने घने बादल, लगातार गरज के साथ तूफान और भारी वर्षा को अंजाम देते है। शांत सतही हवा वाले महासागरीय क्षेत्र या 'डोलड्रम्स (Doldrums)' भी इसी क्षेत्र के भीतर आते हैं।

https://sceh.net/

हिंद महासागर के ऊपर, इसमें 40° से 45° अक्षांश के क्षेत्र में विशेष रूप से बड़े मौसमी बदलाव देखने को मिलते हैं। अभिसरण क्षेत्र की स्थिति में, अन्य बड़े मौसमी बदलाव पूर्वी प्रशांत महासागर, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के ऊपर होते हैं। पृथ्वी के उत्तरी और दक्षिणी गोलार्द्धों के बीच हवा के मिश्रण को धीमा करने में इस बेल्ट की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

ऊपरी वायुमंडल में, अंतःउष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र से दूर जाने वाली हवा वायुमंडलीय परिसंचरण का एक महत्वपूर्ण कारक है। अक्षांश 30° उत्तर और 30° दक्षिण (जिन्हें हॉर्स लैटीट्यूड (Horse latitudes) या अश्व अक्षांश कहा जाता है) के पास उपोष्णकटिबंधीय उच्च-दाब बेल्ट में जैसे-जैसे हवा नीचे आती है, वैसे ही व्यापारिक हवाएँ पृथ्वी की सतह पर पश्चिम और भूमध्य रेखा की ओर बहती हैं। ये भूमध्य रेखा के पास अभिसरण क्षेत्र में मिलती हैं, ऊपर उठती हैं तथा 2 से 17 किलोमीटर (1 से 11 मील) की ऊँचाई पर पूर्व और ध्रुव की ओर बहती हैं। इस प्रवाह का एक हिस्सा उपोष्णकटिबंधीय उच्च-दाब बेल्ट में नीचे आता है, और बाकी हिस्सा अधिक ध्रुवीय अक्षांशों पर, मध्यम अक्षांश की पश्चिमी हवाओं (वेस्टरलीज़ – Westerly winds) के साथ उच्च ऊँचाई पर मिल जाता है। अभिसरण क्षेत्र के भीतर उत्पन्न होने वाली वर्षा, पृथ्वी के कई उष्णकटिबंधीय जलवायु क्षेत्रों में एक महत्वपूर्ण जलवायु नियंत्रण है। इसमें विशेष रूप से आर्द्र भूमध्यरेखीय जलवायु, उष्णकटिबंधीय आर्द्र-शुष्क जलवायु, उष्णकटिबंधीय मानसून और व्यापारिक हवा तटीय जलवायु, तथा उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय स्टेपी जलवायु क्षेत्र शामिल हैं।

अभिसरण क्षेत्र की स्थिति मौसमी रूप से बदलती रहती है, क्योंकि यह सौर ऊर्जा का अनुसरण करती है। यह उत्तरी गोलार्द्ध की गर्मियों में, उत्तर की ओर और सर्दियों में दक्षिण की ओर बढ़ती है। परिणामस्वरूप, अभिसरण क्षेत्र उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में आर्द्र और शुष्क मौसम (ऋतुओं) के लिए जिम्मेदार है। परंतु, सूर्य साल में दो बार - मार्च और सितंबर में, भूमध्य रेखा को पार करता है, और परिणामस्वरूप हर साल दो आर्द्र ऋतुएँ (वर्षा ऋतु) होती हैं। दिसंबर और जुलाई में, जब सूर्य भूमध्य रेखा के उत्तर या दक्षिण में सबसे अधिक दूर होता है, तब इसके परिणामस्वरूप दो शुष्क ऋतुएँ होती हैं।

अंतःउष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र की स्थिति, अक्सर ऊष्मीय भूमध्य रेखा (थर्मल इक्वेटर) के साथ संरेखित होता है, जहाँ पृथ्वी की सतह का तापमान सबसे अधिक होता है। लेकिन, वे हमेशा ही एक समान नहीं होते हैं। ऊष्मीय भूमध्य रेखा, तापमान पर आधारित एक अवधारणा है, जबकि अभिसरण क्षेत्र का निर्माण वायुमंडलीय दबाव के पैटर्न और हवा के अभिसरण द्वारा होता है। स्थानीय भूगोल, समुद्र की सतह का तापमान और वहां बहने वाली हवाएँ इन दोनों के बीच विचलन पैदा कर सकती हैं।

अभिसरण क्षेत्र में जीवन, अक्सर ही उच्च आर्द्रता, तीव्र गर्मी और लगभग दैनिक वर्षा से परिभाषित होता है। नम हवा का लगातार अभिसरण, ऊँचे बादलों और गरज के साथ तूफानों का कारण बनता है। यहां वर्षा अक्सर अल्पकालिक लेकिन भारी होती है, और मौसम तथा क्षेत्र के आधार पर, बादलों का आवरण कई घंटों या दिनों तक बना रह सकता है। हालांकि, सतह पर हवाएँ हल्की और परिवर्तनशील होती हैं। नाविकों ने इस क्षेत्र को इसी कारण 'डोलड्रम्स' (शांत सतही हवा वाले महासागरीय क्षेत्र) कहा था। अभिसरण क्षेत्र के भीतर, सतह की शांति के बावजूद, वायुमंडल में ऊर्ध्वाधर गति मजबूत और लगातार बनी रहती है।

अभिसरण क्षेत्र सिर्फ बारिश के एक साधारण क्षेत्र से कहीं अधिक है। यह एक गतिशील व स्थानांतरित होने वाली प्रणाली है, जो उष्णकटिबंधीय वर्षा, महासागर के तापमान, व्यापारिक हवाओं और ग्रहीय पैमाने के परिसंचरण पैटर्न को आपस में जोड़ती है। इसकी मौसमी गति उष्णकटिबंधीय जलवायु को दर्शाती है, और इसका व्यवहार फसल चक्र से लेकर चक्रवात के प्रवाह तक हर चीज़ को प्रभावित करता है। अतः इसे समझना न केवल मौसम विज्ञानियों के लिए, बल्कि भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में रहने वाले योजनाकारों, किसानों और समुदायों के लिए भी आवश्यक है। चूंकि जलवायु परिवर्तन वायुमंडलीय और महासागरीय पैटर्न को बदलना जारी रखता है, इसलिए अभिसरण क्षेत्र की बारीकी से निगरानी करना, इस बात के महत्वपूर्ण सुराग प्रदान कर सकता है कि हमारा मौसम और हमारी दुनिया कैसे बदल रही है।

 

संदर्भ

1. https://tinyurl.com/4z6xvv2j

2. https://tinyurl.com/4drmxvpm

3. https://tinyurl.com/4su8w35s

 

Definitions of the Post Viewership Metrics

A. City Readerships (FB + App) - This is the total number of city-based unique readers who reached this specific post from the Prarang Hindi FB page and the Prarang App.

B. Website (Google + Direct) - This is the Total viewership of readers who reached this post directly through their browsers and via Google search.

C. Messaging Subscribers - This is the total viewership from City Portal subscribers who opted for hyperlocal daily messaging and received this post.

D. Total Viewership - This is the Sum of all our readers through FB+App, Website (Google+Direct), Email, WhatsApp, and Instagram who reached this Prarang post/page.

E. The Reach (Viewership) - The reach on the post is updated either on the 6th day from the day of posting or on the completion (Day 31 or 32) of one month from the day of posting.