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जौनपुरवासियों, भारत की प्राचीन और विविध चित्रकला परंपराएँ हमेशा से आपकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से गहराई से जुड़ी रही हैं। शर्की सल्तनत के समय जौनपुर जिस तरह इस्लामी और स्थानीय कला का संगम बना, वह आज भी भारतीय कला इतिहास में एक अनूठी पहचान रखता है। इसी कारण, जब भारतीय चित्रकला की बात होती है, तो जौनपुर की भूमिका केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत के कलात्मक विकास को दिशा देने वाली मानी जाती है। आज के इस लेख में हम उसी विरासत और भारत की बाकी प्रमुख चित्रकला शैलियों को एक साथ समझेंगे।
आज हम सबसे पहले जानेंगे कि जौनपुर की चित्रकला विरासत और शर्की सल्तनत ने इस क्षेत्र की कला को किस तरह विशिष्ट पहचान दी। इसके बाद, हम भारतीय चित्रकला के 7,000 साल पुराने इतिहास और उसकी सांस्कृतिक गहराई को विस्तार से समझेंगे। फिर, हम भारत की प्रमुख पारंपरिक चित्रकला शैलियों - जैसे मधुबनी, वारली, कालीघाट, गोंड और लघुचित्र - के बारे में सरल भाषा में जानेंगे। अंत में, हम सल्तनत काल की मिश्रित चित्रशैली, जौनपुर स्कूल का विकास और भारतीय चित्रकला में उपयोग होने वाले विविध कलात्मक माध्यमों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।

जौनपुर की चित्रकला विरासत और शर्की सल्तनत का कलात्मक प्रभाव
शर्की सल्तनत (14वीं-15वीं शताब्दी) के समय जौनपुर एक प्रमुख कलाकेंद्र के रूप में उभरा। यहाँ इस्लामी कला और स्थानीय भारतीय कलात्मक परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। जौनपुर की चित्रकला को उसके नाज़ुक विवरण, जटिल पैटर्न, चमकीले रंगों, और सांस्कृतिक प्रतीकों के लिए पहचाना जाता है। इस काल में दरबार के संरक्षण से चित्रण कला को नई दिशा मिली, जिससे जौनपुर की कलाकृतियाँ एक विशिष्ट शैली के रूप में स्थापित हुईं। यहाँ निर्मित कलाचित्र न केवल स्थानीय संस्कृति को दर्शाते हैं, बल्कि उत्तर भारत के कला-इतिहास में भी महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

भारतीय चित्रकला का प्राचीन इतिहास और इसकी सांस्कृतिक गहराई
भारतीय चित्रकला का इतिहास लगभग 7,000 वर्ष पुराना माना जाता है - मेघालय की गुफ़ाओं, मध्य प्रदेश के भीमबेटका और देशभर की प्राचीन गुफ़ा भित्तियों में इसका प्रारंभिक रूप मिलता है। समय के साथ यह परंपरा वैदिक ग्रंथों, बौद्ध-अजंता चित्रों, जैन पांडुलिपियों और महाकाव्यों से विकसित होती गई। रामायण, महाभारत, पुराणों और धार्मिक कथाओं पर आधारित अनेक चित्र शैली भारत के आध्यात्मिक एवं सामाजिक जीवन को अभिव्यक्त करती हैं। इन चित्रों में धर्म, कर्म, राजनीति, लोकरीति और आध्यात्मिक मूल्य सहज रूप से समाहित होते हैं। भारतीय चित्रकला केवल कला नहीं, बल्कि समाज के चिंतन और आस्थाओं का प्रतीक है।
भारत की प्रमुख पारंपरिक चित्रकला शैलियाँ
भारत के प्रत्येक राज्य में अपनी विशिष्ट चित्रकला शैली विकसित हुई है। कुछ प्रमुख शैलियाँ:
ये सभी शैलियाँ भारतीय संस्कृति, लोकविश्वास और क्षेत्रीय जीवनशैली का जीवंत प्रमाण हैं।

सल्तनत काल की चित्रकला—भारतीय और फ़ारसी शैलियों का संगम
12वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में सल्तनत काल के साथ चित्रकला में नया परिवर्तन आया। इस समय भारतीय कला में फ़ारसी प्रभाव, तुर्की शैली, अफ़गानी रंग, और मध्य एशियाई रूपांकन का समावेश हुआ।
विशेषताएँ:

जौनपुर चित्रकला स्कूल और लोदी-खुलदार शैली का विकास
सल्तनत काल में जौनपुर क्षेत्र में एक विशेष चित्रकला शैली विकसित हुई, जिसे बाद में जौनपुर स्कूल कहा गया। इस शैली का एक प्रसिद्ध उदाहरण निमतनामा पांडुलिपि (1500-1510) है, जो स्थानीय भारतीय और फ़ारसी शैलियों के मिश्रण का सुंदर नमूना है। जौनपुर क्षेत्र के कलाकार सजावट, वस्त्र-डिज़ाइन, रंगों और प्रतीकों के प्रयोग में माहिर थे। इसी काल में उत्तर भारत में लोदी-खुलदार शैली भी विकसित हुई - यह दिल्ली और जौनपुर के सल्तनत क्षेत्र की कला थी, जिसमें खुले रंग, सरल रेखाएँ, और फ़ारसी रूपांकन प्रमुख थे। जौनपुर का महत्व इसलिए भी बढ़ा क्योंकि यह सल्तनत कला के बड़े केंद्रों में से एक था, जिसने क्षेत्रीय शैली को विशिष्ट रूप प्रदान किया।
भारतीय चित्रकला में प्रयोग होने वाले विविध माध्यम और आधुनिक विस्तार
भारतीय कलाकारों ने सदियों तक प्राकृतिक सतहों और रंगों का उपयोग किया - गुफ़ाओं की दीवारें, मिट्टी, कपड़ा, लकड़ी, ताड़पत्र और मंदिर-दीवारें। भित्ति चित्र (Fresco), पांडुलिपियाँ, तैल-चित्र, और कपड़े पर स्क्रॉल चित्रकला भारतीय कला का आधार रहे।
समय के साथ तकनीकें विकसित हुईं:
प्रत्येक क्षेत्र में अपनी विशिष्टता - जैसे राजस्थान के लघुचित्र, तमिलनाडु की तंजौर पेंटिंग, उड़ीसा की पट्टचित्र - भारतीय चित्रकला की विविधता को दर्शाते हैं। आज भी भारतीय चित्रकला वैश्विक कला बाज़ार में अपनी जगह बनाए हुए है, और पारंपरिक एवं आधुनिक दोनों रूपों में लगातार विकसित हो रही है।
संदर्भ
https://tinyurl.com/2246bkyw
https://tinyurl.com/26alrdcj
https://tinyurl.com/2b4g9k97
https://tinyurl.com/256fj3bh
https://tinyurl.com/ypr3j3t7
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