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शायद आपने कभी इस दिशा में गहराई से सोचा न हो कि हमारे घरों, स्कूलों और समाज की तरह ही प्रकृति में भी ऐसे परिवार बसते हैं जहाँ माता और पिता अपने बच्चों को जीवन जीने का हुनर सिखाते हैं। वैज्ञानिक इस क्षमता को माइंड थ्योरी (Mound Theory) कहते हैं, जिसका अर्थ है दूसरों की जरूरत और सोच को समझना। लंबे समय तक यही माना गया कि यह समझ केवल मनुष्यों में होती है, लेकिन 2006 में हुई एक छोटी-सी वैज्ञानिक खोज ने साबित कर दिया कि जंगल के जीव भी सिखाने और सीखने के संबंध को पहचानते हैं। एक छोटी-सी चींटी की दुनिया ने हमें यह एहसास दिलाया कि प्रकृति, शिक्षा का असली विद्यालय है।
आज हम यह जानेंगे कि वैज्ञानिकों ने चींटियों के प्रयोगों से यह निष्कर्ष कैसे निकाला कि वे अपने साथियों को प्रशिक्षित करती हैं। इसके बाद हम दक्षिण अफ्रीका के मीरकैट्स (Meerkats) अर्थात नेवला परिवार के जीवों की जीवनशैली को समझेंगे, जहाँ माता-पिता अपने छोटे पिल्लों को खतरनाक शिकार संभालना सिखाते हैं। फिर हम उन जंगली प्राणियों की ओर बढ़ेंगे जिनकी शिक्षण पद्धतियाँ आश्चर्यजनक रूप से मानवीय दिखाई देती हैं। अंत में हम कुछ ऐसे बुद्धिमान जीवों से मिलेंगे जिनकी सोच, विश्लेषण कौशल और स्मृति हमें चकित कर देती है।
चींटियों का संसार और वैज्ञानिकों की सीख
2006 में एक शोध ने वैज्ञानिकों को ऐसा परिणाम दिया जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। लंदन विश्वविद्यालय की विशेषज्ञ निकोला रैहानी बताती हैं कि वैज्ञानिक वर्षों तक चिम्पैंज़ियों जैसे प्राणियों में शिक्षा का व्यवहार ढूँढ़ रहे थे, लेकिन उत्तर एक चींटी में मिला। ये रॉक एंट्स (rock ants) कहलाती हैं और छोटी-सी कॉलोनियों में रहती हैं। इनका घर किसी दरार में या माइक्रोस्कोप स्लाइड्स (Microscope Slides) के बीच भी हो सकता है, जिससे इनके व्यवहार को देखना आसान हो जाता है। ब्रिस्टल विश्वविद्यालय (University of Bristol) की टीम यह अध्ययन कर रही थी कि ये चींटियाँ अपने साथियों को भोजन की जानकारी कैसे देती हैं। यहीं उन्हें टैंडम रनिंग (Tandem Running) नामक प्रक्रिया दिखाई दी। इस प्रक्रिया में एक अनुभवी चींटी, जैसे कोई शिक्षक, एक नई चींटी को भोजन तक का रास्ता दिखाती है। नई चींटी लगातार अपने एंटीना से शिक्षक को छूती है, रुकती है, और पहचान के संकेतों को याद करती है। यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है कि शिक्षक चींटी अपनी गति जानबूझकर धीमी कर देती है, ताकि छात्र सीख सके। अकेले चलने पर वह चार गुना तेज़ पहुँच सकती थी, लेकिन वह दूसरों के लिए रुकती है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे कोई माता अपने बच्चे को सड़क पार करना सिखाते समय स्वयं पीछे रुककर हाथ पकड़ती है। धीरे-धीरे अधिक नई चींटियाँ रास्ता सीखती हैं और आगे चलकर दूसरों को सिखाती हैं। यानी कॉलोनी का सम्पूर्ण हित इसी धीमी, दयालु और सहयोगात्मक प्रक्रिया पर निर्भर करता है। यह उदाहरण हमें बताता है कि शिक्षा का मूल्य केवल गति में नहीं बल्कि सहअस्तित्व में है।
मीरकैट्स, जंगल के धैर्यवान शिक्षक
मीरकैट्स नेवला परिवार के आकर्षक जीव हैं और दक्षिण अफ्रीका के खुले इलाकों में पाए जाते हैं। इनका भोजन अक्सर बिच्छुओं जैसा खतरनाक शिकार होता है। छोटे पिल्लों के लिए यह सीखना बड़ी चुनौती है कि वे खुद को नुकसान पहुँचाए बिना भोजन संभालें। इसलिए बड़े मीरकैट्स पहले शिकार को मारते या घायल कर देते हैं और फिर उसे पिल्लों के सामने रखते हैं। यदि शिकार में डंक हो तो उसे हटाकर देते हैं, बिल्कुल वैसे जैसे कोई माँ गरम रोटी को फूँक मारकर बच्चे के हाथ में देती है।जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, माताएँ अपनी सहायता कम कर देती हैं। वे पिल्लों को ज़िंदा और अधिक कठिन शिकार के साथ अभ्यास कराती हैं। यहाँ सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि माता दूर से देखती रहती है। यदि पिल्ला हिचकिचाए तो वह शिकार को उसकी ओर बढ़ाती है। यदि शिकार भाग जाए, तो माता उसे फिर पकड़कर लाती है। यह वही प्रक्रिया है जो हम मनुष्य के जीवन में देखते हैं। हम अपने बच्चों को अनुभव देते हैं, कभी पीछे हटते हैं, और उन्हें गिरकर उठना सीखने देते हैं।
प्रकृति के शिक्षक, जिनकी पद्धति मनुष्यों जैसी ही है
किलर वेल भारतीय महासागर के क्रोज़ेट द्वीपों में अपने बच्चों को समुद्र तट पर सील पकड़ना सिखाती हैं। यह काम बेहद जोखिमभरा होता है, इसलिए वयस्क पहले उन किनारों पर अभ्यास करवाते हैं जहाँ कोई सील नहीं होती। यह शिक्षा बच्चों को वास्तविक परिस्थिति में उतरने से पहले सुरक्षा और आत्मविश्वास देती है। यह बिल्कुल वैसे है जैसे कोई माता और पिता बच्चों को व्यस्त सड़क पर उतारने से पहले खाली मैदान में साइकिल चलाना सिखाते हैं। अटलांटिक स्पॉटेड डॉल्फ़िन (Atlantic Spotted Dolphin) की माताएँ अपने बच्चे के सामने शिकार छोड़ती हैं। यदि बच्चा असफल हो जाए तो माँ उसे पकड़कर वापस लाती है और फिर से अवसर प्रदान करती है। बच्चे, अपनी माँ की सोनार तकनीक सुनते हैं और समय के साथ उसे अपनाते हैं। पाइड बैबलर (Pied Babbler) कालाहारी (Kalahari) रेगिस्तान में पाया जाने वाला एक पक्षी है। यह पक्षी भोजन देने से पहले अपने बच्चों को एक विशेष पर कॉल सुनाता है। बच्चे उस आवाज़ को पहचानना सीखते हैं। आगे चलकर यही कॉल उन्हें भोजन पाने और शिकारी से बचने में मदद करती है। चीता भी अपने शावकों को शिकार की कला सिखाते समय अविश्वसनीय धैर्य दिखाती है। वह शिकार पकड़कर लाती है, लेकिन अगर बच्चे उसे संभाल न पाएँ, तब भी वह उन्हें बार-बार अवसर देती है। यही वह क्षण है जहाँ हम जंगल में भी शिक्षण की सच्चाई देख पाते हैं।
जंगल के सबसे बुद्धिमान जीव, जिनकी सोच हमें चकित करती है
भौंरा आकार में छोटा है, लेकिन तीन तक की संख्या का अंतर पहचान सकता है। माना जाता है कि यह कौशल उसे उड़ान के दौरान रास्ते याद रखने में सहायता देता है। न्यू कैलेडोनियन (New Caledonian) कौवा अपनी बुद्धिमत्ता के लिए प्रसिद्ध है। यह जंगल में हुक वाले उपकरण बनाता है और उनका उपयोग भोजन निकालने के लिए करता है। यह कौशल मनुष्य भी बचपन में सीखते हैं और यह कौवा इसे बिना किसी मार्गदर्शन के विकसित कर लेता है। चिंपैंज़ी की स्मृति वैज्ञानिकों को लगातार चकित करती है। टचस्क्रीन (touchscreen) पर अंक कुछ पल के लिए झलकते हैं और बंद हो जाते हैं। चिंपैंज़ी सही स्थानों को याद रखकर क्रम में चुन सकता है, जो मनुष्यों के लिए बेहद कठिन कार्य है।किया, न्यूज़ीलैंड का तोता, भोजन खोजने में सामाजिक संकेतों और भौतिक जानकारी दोनों का उपयोग कर सकता है। यह गुण मनुष्य की तरह है जो किसी खेल में तर्क, भाव, व्यवहार और अवसर को मिलाकर निर्णय लेता है।
संदर्भ
https://tinyurl.com/yvc7radp
https://tinyurl.com/4m56j9zv
https://tinyurl.com/3wsva42s
https://tinyurl.com/4bszv5x5
https://tinyurl.com/y9dfk4rk
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