
समयसीमा 253
मानव व उनकी इन्द्रियाँ 989
मानव व उसके आविष्कार 764
भूगोल 244
जीव - जन्तु 283
क्रिकेट में सट्टेबाज़ी की बढ़ती प्रवृत्ति, आज की युवा पीढ़ी को कई हानिकारक तरीकों से प्रभावित कर रही है। ऑनलाइन सट्टेबाज़ी प्लेटफ़ॉर्मों तक आसान पहुंच के कारण, कई युवा इसके आदी हो रहे हैं, एवं त्वरित पैसे जीतने की उम्मीद में इसमें लिप्त हो रहे हैं। हालांकि, सट्टेबाज़ी में अक्सर वित्तीय नुकसान, तनाव और ऋण का जोखिम जुड़ा होता है। यह छात्रों को उनकी पढ़ाई से भी विचलित कर सकती है। इन खतरों के बारे में जागरूकता फ़ैलाना और युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए, ज़िम्मेदार व्यवहार को प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है। आज, हम भारत में कॉलेज छात्रों के बीच बढ़ती जुए की लत के खतरों का पता लगाएंगे। फिर हम, जुए की लत पर अंकुश लगाने के लिए, प्रभावी रोकथाम रणनीतियों पर चर्चा करेंगे। अंत में, हम भारत में क्रिकेट सट्टेबाज़ी के बाज़ार का विश्लेषण करेंगे, एवं इसके रुझानों और समाज पर प्रभाव को समझेंगे।
भारत में कॉलेज छात्रों के बीच जुए की लत का खतरा-
जुए की लत से संबंधित कुछ आवश्यक पहलु, निम्नलिखित हैं –
•जुए के अवसरों तक आसान पहुंच:
आजकल, ऑनलाइन जुआ प्लेटफ़ॉर्मों की बढ़ती संख्या और इनकी आसान उपलब्धता के कारण, जुआ गतिविधियों में तेज़ी से वृद्धि हो रही है। कॉलेज के छात्र, जिनके पास स्वयं के स्मार्टफ़ोन और इंटरनेट की सुविधा होती है, आसानी से विभिन्न प्रकार के जुए में शामिल हो सकते हैं। इसमें ऑनलाइन कसीनो(Casino), पोकर(Poker), और खेल सट्टेबाज़ी जैसे कई रूप शामिल हैं।
•तनाव और सहकर्मी दबाव:
कॉलेज के छात्रों के शैक्षणिक और व्यक्तिगत तनाव, उन्हें जुए के माध्यम से इससे राहत पाने के लिए, अधिक अतिसंवेदनशील बना सकते हैं। इसके अतिरिक्त, सहकर्मी दबाव और उन दोस्तों के साथ बराबरी करने की इच्छा, जो जुआ खेलते हैं, इसकी लत को और बढ़ावा दे सकती है।
•वित्तीय निहितार्थ:
कॉलेज के छात्रों के पास आमतौर पर सीमित वित्तीय संसाधन होते हैं। इसी के चलते, जुआ महत्वपूर्ण वित्तीय नुकसान का कारण बन सकता है, जो उनके शैक्षिक गतिविधियों, व्यक्तिगत कल्याण और भविष्य की वित्तीय स्थिरता पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है।
•शैक्षणिक प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव:
जुए की लत छात्रों के समय और ध्यान को अत्यधिक प्रभावित कर सकती है, जिससे शैक्षणिक ज़िम्मेदारियों की उपेक्षा और पढ़ाई में गिरावट हो सकती है।
•मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य मुद्दे:
जुए की लत विभिन्न मनोवैज्ञानिक मुद्दों से जुड़ी है, जिसमें चिंता, अवसाद और तनाव के स्तर में वृद्धि शामिल है। जुए में हुए नुकसान के बारे में सोचने एवं परिणामों में उतार एवं चढ़ाव का अनुभव करने का चक्र, बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।
जुए की लत की रोकथाम:
जुए की लत की रोकथाम का एक तरीका, ऑनलाइन सट्टेबाज़ी के जोखिमों के बारे में, जनता को जागरूक करना है। जुआ खेलने की लत के परिणामों और ज़िम्मेदार सट्टेबाज़ी के महत्व के बारे में लोगों को शिक्षित करने का कदम, उन्हें इस जाल में गिरने से रोक सकता है।
इसके अलावा, सरकार को जुआ व सट्टेबाज़ी वाले ऐप्स को विनियमित करने में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की आवश्यकता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि, ये ऐप्स कानूनी और निष्पक्ष रूप से संचालित हों, सख्त कानूनों और विनियमों को लागू किया जाना चाहिए। इसके अलावा, उन लोगों के लिए दंड होना चाहिए, जो धोखाधड़ी प्रथाओं में संलग्न हैं।
दूसरी ओर, कॉलेज के छात्रों के बीच लचीले स्वभाव को बढ़ावा देना, जुए की लत के खिलाफ़ एक मज़बूत कदम हो सकता है। जीवन कौशल कार्यशालाएं, बच्चों को तनाव प्रबंधन, निर्णयक्षमता और भावनात्मक कल्याण के बारे में सिखाते हुए, उन्हें विनाशकारी व्यवहारों का सहारा लिए बिना चुनौतियों का सामना करने के लिए, सशक्त बना सकती हैं। सहायता समूहों की स्थापना करना, जहां छात्र अपने अनुभव साझा कर सकते हैं, और साथियों से सलाह ले सकते हैं, भी प्रभावी हो उपाय हो सकता हैं।
भारत का ऑनलाइन जुआ बाज़ार:
लगभग 340 मिलियन भारतीय लोग, क्रिकेट सट्टेबाज़ी में भाग लेते हैं। प्रत्येक एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट पर, 200 मिलियन डॉलर का कारोबार होता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि, भारत के ऑनलाइन जुआ बाज़ार का मूल्य, 2023 से 2027 तक 8.59% की वार्षिक दर से बढ़ने का अनुमान है। 2027 तक, भारत के ऑनलाइन जुआ बाज़ार में लगभग 12.17 मिलियन उपयोगकर्ता होंगे। इसका मतलब यह है कि, भारत के ऑनलाइन जुआ बाज़ार में प्रति उपयोगकर्ता, औसत राजस्व 291.83 डॉलर तक पहुंच सकता है। इंडिया चेंज फ़ोरम(India Change Forum) की एक रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन प्रीमियर लीग जैसी प्रमुख क्रिकेट मैचों के दौरान, 340 मिलियन से अधिक भारतीय लोग सट्टेबाज़ी में भाग लेते हैं। हाल ही में इस उद्योग पर 28% कर लगाए जाने के बाद, भारत में अवैध सट्टेबाजी में वृद्धि का मुद्दा भी, इस रिपोर्ट में उठाया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, नियामक प्रतिबंधों के बावजूद, भारत के सट्टेबाज़ी और जुआ बाज़ार ने उल्लेखनीय वृद्धि दिखाई है। एक अनुमान है कि, भारतीय सट्टेबाज़ी बाज़ार (ऑनलाइन और ऑफ़लाइन संयुक्त) 2018 में 130 बिलियन अमरीकी डॉलर पर था। जाहिर है कि, क्रिकेट सट्टेबाज़ी इस क्षेत्र पर हावी है। विश्व स्तर पर, खेल सट्टेबाज़ी बाज़ार संपन्न हो रहा है, जिसका 2021 में कुल मूल्य 70.23 बिलियन डॉलर था।
संदर्भ
मुख्य चित्र स्रोत : Pexels
A. City Subscribers (FB + App) - This is the Total city-based unique subscribers from the Prarang Hindi FB page and the Prarang App who reached this specific post.
B. Website (Google + Direct) - This is the Total viewership of readers who reached this post directly through their browsers and via Google search.
C. Total Viewership — This is the Sum of all Subscribers (FB+App), Website (Google+Direct), Email, and Instagram who reached this Prarang post/page.
D. The Reach (Viewership) - The reach on the post is updated either on the 6th day from the day of posting or on the completion (Day 31 or 32) of one month from the day of posting.