धरती की रक्षा बिना हथियार: जौनपुर के खेतों में जीव-जगत का गुप्त योगदान

सरीसृप
25-02-2026 09:25 AM
धरती की रक्षा बिना हथियार: जौनपुर के खेतों में जीव-जगत का गुप्त योगदान

जौनपुरवासियों, हमारे चारों ओर फैले खेत, बाग़-बग़ीचे, नहरें और गाँव केवल मानव जीवन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह एक ऐसा संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्र है, जिसे हम अनेक अन्य जीवों के साथ साझा करते हैं। इन्हीं जीवों में सांप भी शामिल हैं, जिन्हें अक्सर डर, अज्ञान और भ्रांतियों की नज़र से देखा जाता है। जबकि सच्चाई यह है कि जौनपुर जैसे कृषि प्रधान क्षेत्र में सांप भारतीय कृषि व्यवस्था, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में एक मौन लेकिन बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आज के दौर में, जब खेती, सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण एक साथ कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, तब सांपों के वास्तविक महत्व को समझना और उन्हें प्रकृति के सहयोगी के रूप में देखना पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है।

आइए समझते हैं कि, सांप कृषि के लिए कैसे फायदेमंद होते हैं। हमारे शहर में, रैट स्नेक, अजगर, कोबरा, स्पेक्टाकल्ड कोबरा और कॉमन क्रेट, जैसे विभिन्न प्रकार के सांप पाए जाते हैं। ये सांप कृषि के लिए उपयोगी हैं, क्योंकि, ये फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले चूहों की आबादी को नियंत्रित करते हैं। सांप कीटों को भी खाते हैं, जिससे, फसलों की रक्षा होती है। हालांकि, कई क्षेत्रों में सांपों को मार दिया जाता है, क्योंकि, लोग सोचते हैं कि वे मनुष्यों के लिए हानिकारक हैं। परंतु, केवल 25% सांप ही जहरीले होते हैं, और मनुष्यों के लिए ख़तरा पैदा कर सकते हैं। सांप हमारे पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, और आर्थिक और चिकित्सीय लाभ प्रदान करते हैं। स्वस्थ समाज बनाने के लिए, जैव विविधता में सांपों के महत्व को जानना अतः आवश्यक है।

भारत के अधिकांश क्षेत्रों में, रैट स्नेक (Rat snakes) सबसे आम सांप हैं। एक वयस्क रैट सांप की लंबाई, लगभग तीन मीटर से अधिक होती है। आपको, यह देखकर अक्सर ही आश्चर्य होता होगा कि, किसी सांप ने रेंगते हुए पूरी सड़क की चौड़ाई को नाप लिया हैं। इस सांप की अन्य अनूठी विशेषता, इसकी बड़ी आंखें हैं, जो इसके सिर की चौड़ाई तक फैली हुई होती हैं। उनके भीतर एक अद्भुत चमक के साथ, गोल व काली पुतलियां होती हैं। इसके होठों पर चित्रित ऊबड़-खाबड़ काली रेखाओं पर भी हमारा ध्यान जाता हैं। दरअसल, सांपों को मोटे तौर पर, ‘जहरीले’ और ‘गैर-जहरीले’ श्रेणी में वर्गीकृत किया जा सकता है। हालांकि, कहा जाता है कि, दुनिया भर में सांपों की लगभग 3,500 प्रजातियां पाई जाती हैं। लेकिन, उनमें से बमुश्किल लगभग 25% प्रजातियां ही जहरीली होती हैं।

विषैले सांपों में किंग कोबरा (ओफियोफैगस हन्ना – Ophiophagus Hannah) सबसे घातक है। यह अधिकतर पहाड़ी इलाकों तक ही सीमित है। यह एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर छलांग लगा सकता है, और अपना जहर हवा में छोड़ सकता है। अगर किसी व्यक्ति की आंखों में, किंग कोबरा का जहर चला जाए, तो वह अंधा भी हो सकता है। वे आम तौर पर मानव निवास से बचते हैं। परंतु, यह केवल मनुष्य ही हैं, जो शहरों और कस्बों के विस्तार के साथ-साथ सांपों के आवासों पर आक्रमण करते हैं, और सरीसृपों को दोष देते हैं।

जबकि, कोबरा (नाजा नाजा – Naja Naja) मानव बस्तियों के पास रहता है। वे धान के खेतों में मौजूद चूहों को खाते हैं, और उनकी फसल बचाते हैं। अन्य जहरीले सांपों में, वाइपर (Viper) शामिल है, जिसके, शरीर पर अंडाकार या हीरे के आकार के धब्बे होते हैं। इसका जहर रक्त के थक्के और मांसपेशियों के क्षय का कारण बन सकता है। एक तरफ़, क्रेट (Krait), क्षैतिज सफेद या पीली धारी वाला एक अन्य जहरीला सांप है। क्रेट कीड़ों को खाते हैं, और कीटों को नियंत्रित करते हैं।

वास्तव में, सांप देवता के रूप में भी, विभिन्न संस्कृतियों में पूजनीय हैं। उन्हें प्रजनन क्षमता, पुनर्जन्म, चिकित्सा, उपचार और समृद्धि के प्रतीक के रूप में जाना जाता हैं। विरोधाभासी रूप से, ओफिडियोफोबिया (Ophidiophobia) अर्थात, सांपों का डर, जानवरों के सबसे आम भय में से एक है। यह 2-3% मानव आबादी को प्रभावित करता है। इसलिए, सर्पदंश के डर से अक्सर सांपों को देखते ही मार दिया जाता है।

हालांकि, दुनिया भर में सांपों की लगभग 85-90% प्रजातियां गैर-जहरीली हैं। अधिकांश सांप स्वभाव से आक्रामक नहीं होते हैं, और अक्सर खुद के बचाव में या धमकी दिए जाने या उकसाए जाने पर काटते हैं। सांपों को मारना समस्याग्रस्त है। क्योंकि, उनकी घटती आबादी न केवल पर्यावरण के लिए, बल्कि मनुष्यों के लिए भी हानिकारक है।

शिकारी के रूप में सांप, मेंढकों, कीड़ों, चूहों और अन्य कृंतकों को खाते हैं, जिससे उनकी आबादी को नियंत्रण में रखने में मदद मिलती है। सांपों को अन्य प्रजातियां भी खाती हैं, इस प्रकार वे शिकार के रूप में खाद्य-श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

‘पारिस्थितिकी तंत्र-अभियंता’ के रूप में, सांप ‘द्वितीयक बीज फैलाव’ की सुविधा प्रदान करते हुए, पौधों के प्रजनन में योगदान देते हैं। जब सांप कृंतकों (जो बीज खाते हैं) को निगलते हैं, तो उनके मल के माध्यम से बीज उत्सर्जन होता हैं। इस प्रकार, बीज पर्यावरण में अक्षुण्ण तरीके से निष्कासित हो जाते हैं।

सांप बीमारियों की रोकथाम में भी भूमिका निभाते हैं, और कृषि समुदायों को लाभ पहुंचाते हैं। कृंतक कई पशुजन्य रोगों के वाहक होते हैं, जो मनुष्यों, कुत्तों, मवेशियों, भेड़ और अन्य घरेलू जानवरों को प्रभावित करते हैं। कृंतकों की आबादी में अचानक वृद्धि से, पशुजन्य रोगों का प्रकोप हो सकता है। उनकी अधिक आबादी फसलों को भी प्रभावित कर सकती है। अतः कृंतकों को खाकर, सांप कृंतकों की आबादी को नियंत्रण में रखते हैं, इस प्रकार पशुजन्य रोग के संचरण को रोकते हैं, और खाद्य सुरक्षा में योगदान करते हैं।

सांप कई औषधियों का भी स्रोत होते हैं। सर्पदंश के लिए एकमात्र सिद्ध और प्रभावी उपचार - सांप-विरोधी जहर या एंटी वेनम (Anti venom) भी सांपों के जहर से प्राप्त होता है। सांप के जहर का, विरोधी - जहर उत्पादन से परे चिकित्सीय महत्व है। उनसे प्राप्त कई दवाओं का उपयोग नैदानिक अभ्यास में किया जाता है।

एक तरफ, हमारे गंगा नदी के क्षेत्र में, निम्नलिखित मुख्य सांप पाए जाते हैं।

1.एनहाइड्रिस सीबोल्डी (Enhydris sieboldii)

2.ज़ेनोक्रोफ़िस पिस्केटर (Xenochrophis piscator)

3.एक्स. पिस्केटर (X. piscator)

4.डेंड्रेलाफिस ट्रिस्टिस (Dendrelaphis tristis)

5.ओलिगोडोन अर्नेंसिस (Oligodon arnensis)

6.सैम्मोफिस कोंडानारस (Psammophis condanarus)

7.एम्फिस्मा स्टोलैटम (Amphiesma stolatum)

8.लाइकोडोन ऑलिकस (Lycodon aulicus)

9.बंगारस कैर्यूलस (Bungarus caeruleus)

10.नाजा कौठिया (Naja kaouthia)

11.नाजा नाजा (Naja Naja)

12.एरिक्स जॉनी (Eryx johnii)

13.पायथन मोलुरस (Python molurus)
 

संदर्भ-
https://tinyurl.com/47tsjc5b
https://tinyurl.com/22ykxp4e
https://tinyurl.com/mvft5fj3
https://tinyurl.com/3w6ndu9x

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