कैसे प्रकृति के पालन पोषण के तरीक़े, लखनऊ के लोगों को सीख का नया नज़रिया देते हैं?

व्यवहार के अनुसार वर्गीकरण
07-01-2026 09:16 AM
कैसे प्रकृति के पालन पोषण के तरीक़े, लखनऊ के लोगों को सीख का नया नज़रिया देते हैं?

हमारे शहर में परिवार, रिश्ते और बच्चों की परवरिश की बात आते ही भावनाएँ तुरंत जुड़ जाती हैं। यहाँ के लोग जब किसी नवजात को देखते हैं तो सहज ही मन में दुलार उमड़ आना स्वाभाविक है। यह भावना केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति की दुनिया में भी जीवों के भीतर इसी तरह के लगाव और ज़िम्मेदारी के रूप दिखाई देते हैं। कुछ जंगली जीव ऐसे होते हैं जो अपने बच्चों को जन्म देने के बाद उनसे दूरी बना लेते हैं, मानो उन्हें अपने आप आगे बढ़ने देना ही सबसे सुरक्षित रास्ता हो। वहीं कुछ प्रजातियाँ ऐसी भी हैं जिनमें माता पिता अपने बच्चों को हर पल सहारा देते हैं, उन्हें सिखाते हैं और उनका संरक्षण करते हैं, बिल्कुल हमारे शहर के संयुक्त परिवारों जैसी भावना के साथ।
आज हम जानेंगे कि प्रकृति में जंगली जानवर अपने बच्चों का पालन पोषण किन अलग अलग तरीकों से करते हैं, एलोपेरेंटिंग (alloparenting) क्या होती है और किन जीवों में यह दिखाई देती है। हम यह भी समझेंगे कि कुछ प्रजातियाँ स्नेह से परवरिश करती हैं, कुछ स्वतंत्रता देकर सिखाती हैं और कुछ में समुदाय मिलकर बच्चों को संभालता है। अंत में हम उन जीवों से परिचित होंगे जिन्हें जंगल में सबसे समर्पित माता पिता माना जाता है और महसूस करेंगे कि प्रकृति में प्रेम और ज़िम्मेदारी कितने अनोखे रूपों में मौजूद हैं।

जानवरों के बीच पाए जाने वाले पालन पोषण के अलग अलग रूप

  1. स्नेह और धैर्य से पालने वाले माता पिता
    कुछ जीवों में पालन पोषण का आधार शुद्ध सहिष्णुता और कोमलता होता है। मादा गिलहरी इसका सुंदर उदाहरण है। वह अपने बच्चों को अकेले पालती है। चाहे दिन कितना भी थकाने वाला क्यों न हो, शाम लौटते ही वह बच्चों की सफ़ाई करती है, उनके साथ खेलती है और उन्हें पास रखकर सुरक्षा देती है। यह दृश्य प्रकृति का ऐसा रूप है जहाँ थकावट भी मातृत्व की नर्मी के आगे छोटी पड़ जाती है।
  2. स्वतंत्रता देने वाले माता पिता
    खरगोश इस रूप को सबसे अच्छी तरह समझाते हैं। उनकी रणनीति यह मानकर चलती है कि बच्चे जन्म से ही चलने फिरने में सक्षम होते हैं, इसलिए उनके लिए अकेले रहना ही सुरक्षा का तरीका है। माँ दिन में केवल थोड़े समय के लिए लौटती है और केवल दूध पिलाकर आगे बढ़ जाती है। यह पालन पोषण का वह मॉडल है जिसमें भरोसा और आज़ादी सबसे बड़ा उपहार होते हैं।
  3. जीवन कौशल सिखाने वाले माता पिता
    रासू (Weasel) जैसी प्रजातियाँ अपने बच्चों को सिखाती हैं कि जंगल में जीवित कैसे रहना है। उनका पालन पोषण सीधा सहलाना नहीं बल्कि अनुभवों के बीच बच्चे को मजबूती देना है। यह एक ऐसा तरीका है जहाँ मातृत्व कड़ा दिखता है, पर उसके पीछे बच्चे को सक्षम बनाने का प्रेम छिपा होता है।
  4. साथ मिलकर पालन पोषण करने वाले माता पिता
    प्रकृति में ऐसा भी देखा जाता है कि नर और मादा दोनों मिलकर पालन पोषण की जिम्मेदारी उठाते हैं। किंगफिशर (Kingfisher) इसका संतुलित रूप प्रस्तुत करते हैं। भोजन जुटाने से लेकर अंडों की निगरानी तक दोनों पक्ष बराबर भूमिका निभाते हैं। यह साझेदारी परिवार में संतुलन की इच्छा जैसी प्रतीत होती है।
  5. दूसरों के लिए भी माता पिता बन जाने वाले जीव
    रीड वार्बलर (Reed Warbler) इस बात का प्रमाण हैं कि कभी कभी पालन पोषण अपने ही बच्चों तक सीमित नहीं रहता। वे इतनी लगन से अपने बच्चों को खिलाते हैं कि कोयल अपने अंडे इन्हीं के घोंसले में रख देती है, और यह छोटा पक्षी उस अंडे को भी उसी सच्चाई से पालता है जैसे अपना बच्चा। यह प्रकृति का वह क्षण है जहाँ भरोसा और अपनापन रिश्तों से ऊपर उठ जाते हैं।
  6. संयुक्त परिवार की तरह पालन पोषण करने वाले जीव
    बिज्जू प्रकृति में संयुक्त परिवार का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे बड़े समूहों में रहते हैं जहाँ जिम्मेदारियां साझा होती हैं और युवा सदस्य भी बच्चों को संभालना सीखते हैं। यह रूप हमें अपने शहर की उस संस्कृति की याद दिलाता है जहाँ बड़े और छोटे सभी मिलकर किसी बच्चे की परवरिश में शामिल हो जाते हैं।

एलोपेरेंटिंग प्रेम की वह भावना जो रिश्तों की सीमाओं से परे होती है
एलोपेरेंटिंग वह स्थिति है जिसमें किसी बच्चे की देखभाल उसके जैविक माता पिता के अलावा कोई और करता है। इसे प्रकृति का संयुक्त परिवार मॉडल भी कहा जा सकता है। कुछ प्राइमेट्स (primates) जैसे रीसस मैकाक (Rhesus Macaque) एलोपेरेंटिंग को अपनाते हैं। वहीं फ़्लेमिंगो (flamingo) अपने बच्चों की देखभाल के लिए समलैंगिक जोड़े भी बना लेते हैं। सबसे प्रभावशाली उदाहरण हाथियों में मिलता है। उनके समूह मातृप्रधान होते हैं जहाँ कई पीढ़ियाँ मिलकर बच्चों की रक्षा करती हैं। यदि किसी छोटे हाथी को उसके झुंड से अलग कर दिया जाए तो यह बिछड़ना उसके लिए बहुत गहरा भावनात्मक घाव बन जाता है। इससे पता चलता है कि सामाजिक बंधन जानवरों की दुनिया में कितने सशक्त और संवेदनशील होते हैं।

जंगली दुनिया के सबसे समर्पित माता पिता

  1. ओरंगुटान जिनके लिए मातृत्व एक लंबी यात्रा है
    नर ओरंगुटान अपने बच्चों की देखभाल में हिस्सा नहीं लेते। इसलिए माँ ही पूरे समय बच्चे के साथ रहती है। बच्चा उसकी छाती से चिपका रहता है भोजन सीखता है पेड़ों पर घूमना सीखता है और यह रिश्ता कई वर्षों में परिपक्व होता है। यह प्रकृति में धैर्य और समर्पण का सबसे सुंदर रूप है।
  2. मगरमच्छ जिनके भीतर कठोरता और संवेदनशीलता दोनों रहते हैं
    अंडों की सुरक्षा करने से लेकर उनके तापमान को नियंत्रित करने तक मगरमच्छ माँ हमेशा सतर्क रहती है। अंडे टूटते ही वह अपने बच्चों को अपने मुँह में लेकर पानी तक ले जाती है और लगभग दो वर्षों तक उनकी रक्षा करती है। यह दृश्य कठोर दिखने वाले जीव के भीतर छिपे मातृत्व के कोमल पक्ष को दिखाता है।
  3. चीता जिसके पालन पोषण में साहस और चिंता साथ चलते हैं
    जन्म से कमज़ोर शावकों को बचाने के लिए माँ चीता उन्हें लगातार नई जगह पर ले जाती है ताकि शिकारी उन्हें न ढूंढ पाएं। वह उन्हें घास में छिपाती है और जब खतरा नहीं होता तो उन्हें सटकर सांत्वना देती है। यह मातृत्व का वह रूप है जिसमें लगातार निगरानी भी है और गहरी भावनात्मक गर्माहट भी।
  4. कंगारू जो एक साथ कई जीवन संभालती हैं
    कंगारू माँ गर्भ में एक भ्रूण थैली में दूसरा शिशु और अपने पास चल रहे तीसरे बच्चे तीनों की देखभाल करती है। इसे प्रकृति की बहु कार्यण क्षमता कहें तो भी कम होगा। यह मातृत्व का एक ऐसा रूप है जिसमें धैर्य समर्पण और निरंतरता साथ साथ चलते हैं।

प्रकृति का पालन पोषण हमें क्या सिखाता है
इस पूरी यात्रा में हमने देखा कि जंगल में भी परिवार और रिश्ते जीवित हैं। कहीं माँ अकेली संघर्ष करती है कहीं पूरा समूह कंधे से कंधा मिलाकर साथ देता है। कहीं सुरक्षा लोरी के रूप में मिलती है कहीं प्रशिक्षण के रूप में। एलोपेरेंटिंग यह दिखाती है कि प्रेम संबंधों से बड़ा होता है और अपनापन जीवन की मूल भाषा है। ओरंगुटान (Orangutan), मगरमच्छ, चीता और कंगारू ने हमें यह एहसास कराया कि मातृत्व अनेक रूपों में सांस लेता है और उसका मूल भाव स्नेह, संरक्षण और समर्पण है। यह किसी को सीखने का अवसर देने सुरक्षा प्रदान करने और महसूस होने की दुनिया तक पहुँचाने का भाव है।

संदर्भ
https://tinyurl.com/3uc2zzhn
https://tinyurl.com/2hatnjpe
https://tinyurl.com/3su4mx5z

Definitions of the Post Viewership Metrics

A. City Readerships (FB + App) - This is the total number of city-based unique readers who reached this specific post from the Prarang Hindi FB page and the Prarang App.

B. Website (Google + Direct) - This is the Total viewership of readers who reached this post directly through their browsers and via Google search.

C. Messaging Subscribers - This is the total viewership from City Portal subscribers who opted for hyperlocal daily messaging and received this post.

D. Total Viewership - This is the Sum of all our readers through FB+App, Website (Google+Direct), Email, WhatsApp, and Instagram who reached this Prarang post/page.

E. The Reach (Viewership) - The reach on the post is updated either on the 6th day from the day of posting or on the completion (Day 31 or 32) of one month from the day of posting.