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मेट्रिक प्रणाली लंबाई, आयतन, दूरी, तापमान और वज़न जैसे मापों के लिए उपयोग की जाने वाली एक मानकीकृत प्रणाली है। यह तीन बुनियादी इकाइयों पर आधारित होती है:
⦁ ➲ मीटर (m): लंबाई मापने के लिए।
⦁ ➲ किलोग्राम (kg): द्रव्यमान मापने के लिए।
⦁ ➲ सेकेंड (s): समय मापने के लिए।
इस लेख में हम मेट्रिक प्रणाली के विकास, सामान्य मेट्रिक रूपांतरण इकाइयों तथा मुग़ल काल में भारत में प्रचलित मापन पद्धतियों के बारे में विस्तार से जानेंगे।
मेट्रिक प्रणाली मापने का एक सुव्यवस्थित और विश्वसनीय तरीका है, जिसका उपयोग आज विश्वभर में वैज्ञानिक शोध, शिक्षा, व्यापार और दैनिक जीवन में किया जाता है। यह सरल मापों से लेकर जटिल गणनाओं तक के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
इसके कुछ प्रमुख उदाहरण इस प्रकार हैं:
⦁ ➲ मीटर (m): दूरी और लंबाई मापने की मानक इकाई। जैसे—घर से स्कूल की दूरी या किसी कपड़े की लंबाई।
⦁ ➲ ग्राम (g): वज़न की इकाई, जिसे हम खाद्य पदार्थों के पैकेट पर अक्सर देखते हैं, जैसे “250 ग्राम चिप्स।”
⦁ ➲ मिलीलीटर (ml): आयतन की इकाई, जिसका उपयोग पेय पदार्थों या तरल पदार्थों की मात्रा मापने में किया जाता है।
मेट्रिक प्रणाली में लंबाई, द्रव्यमान (वज़न) और क्षमता (आयतन) के लिए अलग-अलग इकाइयाँ निर्धारित की गई हैं। उदाहरण के लिए:
⦁ ➲ लंबाई: मिलीमीटर (mm), सेंटीमीटर (cm), डेसीमीटर (dm), मीटर (m) और किलोमीटर (km)। इनका उपयोग डेबिट कार्ड (Debit Card) की मोटाई से लेकर दो शहरों के बीच की दूरी तक मापने में होता है।
⦁ ➲ वज़न: ग्राम (g) और किलोग्राम (kg), जिनसे फलों या शरीर का वज़न मापा जाता है।
⦁ ➲ क्षमता: मिलीलीटर (ml) और लीटर (L), जिनका उपयोग जूस कैन या पानी की टंकी की मात्रा मापने में किया जाता है।
1789 की फ़्रांसीसी क्रांति के बाद नागरिकों ने पूरे देश में एक समान वज़न और माप प्रणाली की आवश्यकता महसूस की। इस उद्देश्य से नेशनल असेंबली (National Assembly) और बाद की सरकारों ने पेरिस एकेडमी ऑफ साइंसेज़ (Paris Academy of Sciences) तथा उसके उत्तराधिकारी इंस्टीट्यूट ऑफ फ़्रांस (Institute of France) को नई इकाइयाँ विकसित करने का कार्य सौंपा। इन इकाइयों को दूरी, आयतन, वज़न, कोण और समय मापने के लिए तैयार किया गया, और इन्हें इस तरह बनाया गया कि सभी एक-दूसरे से तार्किक रूप से जुड़े रहें।
उदाहरण के तौर पर, लंबाई की इकाइयाँ दस की घात के आधार पर बढ़ती हैं - मिलीमीटर से सेंटीमीटर, फिर मीटर तक। एक लीटर को ऐसे घन के आयतन के रूप में परिभाषित किया गया जिसकी प्रत्येक भुजा 10 सेंटीमीटर हो। मानक तापमान पर एक लीटर पानी का वज़न लगभग एक किलोग्राम होता है। इससे पहले इंच, फ़ीट, गज़ और मील जैसी इकाइयों के बीच कोई स्पष्ट संबंध नहीं था। फ़्रांसीसियों ने न केवल राष्ट्रीय मानकों की स्थापना की, बल्कि एक ऐसी प्रणाली विकसित की जो आज मेट्रिक प्रणाली के रूप में वैश्विक स्तर पर अपनाई जा चुकी है।
मेट्रिक प्रणाली के इतिहास की प्रमुख समयरेखा:
⦁ ➲ 1668: जॉन विल्किंस (John Wilkins) ने एक संशोधित मापन प्रणाली का प्रस्ताव रखा।
⦁ ➲ 1670: गेब्रियल मूटन (Gabriel Mouton) ने पृथ्वी की परिधि के अंश पर आधारित दशमलव प्रणाली सुझाई।
⦁ ➲ 1671: जीन पिकार्ड (Jean Picard) ने झूलते पेंडुलम (Pendulum) को लंबाई मापने का आधार बनाने का विचार दिया।
⦁ ➲ 1790: फ़्रांस की नेशनल असेंबली ने फ़्रेंच एकेडमी ऑफ साइंसेज़ (French Academy of Sciences) से मानक प्रणाली विकसित करने का अनुरोध किया।
⦁ ➲ 1795: फ़्रांस ने आधिकारिक रूप से मेट्रिक प्रणाली अपनाई।
⦁ ➲ 1840: फ़्रांसीसी सरकार ने नागरिकों के लिए इसका उपयोग अनिवार्य किया।
⦁ ➲ 1866: संयुक्त राज्य अमेरिका (United States) में मेट्रिक प्रणाली का उपयोग वैध घोषित हुआ, हालांकि अनिवार्य नहीं था।
⦁ ➲ 1875: मीटर की संधि पर हस्ताक्षर किए गए और अंतर्राष्ट्रीय वज़न एवं माप ब्यूरो सम्मेलन (International Bureau of Weights and Measures Conference) आयोजित हुआ।
⦁ ➲ 1957: अमेरिकी सेना (United States Army) और मरीन कॉर्प्स (Marine Corps) ने इसे अपने उपकरणों के मानक के रूप में अपनाया।
⦁ ➲ 1965: ग्रेट ब्रिटेन (Great Britain) ने मेट्रिक प्रणाली अपनाने की प्रक्रिया शुरू की।
⦁ ➲ 1988: ओम्निबस ट्रेड एंड कॉम्पिटिटिवनेस एक्ट (Omnibus Trade and Competitiveness Act) के तहत संघीय एजेंसियों को व्यापार में मेट्रिक प्रणाली उपयोग करने का निर्देश दिया गया।
गणितीय रूप से, मेट्रिक रूपांतरण किलोग्राम, मीटर और सेकेंड पर आधारित होते हैं। क्षेत्रफल को वर्ग मीटर (m²) में और आयतन को घन मीटर (m³) में मापा जाता है। एक घन मीटर = 1,000 लीटर होता है, अर्थात 1 लीटर = 1/1,000 m³। समय की गणना में 1 घंटा = 60 मिनट, 1 मिनट = 60 सेकेंड और इस प्रकार 1 घंटा = 3,600 सेकेंड होता है। वहीं, 1 दिन = 24 घंटे = 86,400 सेकेंड के बराबर होता है।
लेकिन आधुनिक मापन प्रणालियों के विकसित होने से पहले माप कैसे किए जाते थे? इसे समझने के लिए मुग़ल काल की व्यवस्था पर नज़र डालना उपयोगी होगा।
मुग़ल काल में भारत में कई प्रकार की मापन इकाइयाँ प्रचलित थीं। कपड़ों को मापने के लिए अकबर का शाही गज़ (Akbar’s Royal Yard) उपयोग किया जाता था, जिसकी लंबाई लगभग 46 अंगुल होती थी। कृषि भूमि और इमारतों के लिए इस्कंधरी गज़ का प्रयोग होता था। विभिन्न गज़ों के कारण उत्पन्न समस्याओं को दूर करने के लिए इलाही गज़ (Ilahigaz) नामक एक मानक इकाई शुरू की गई, जिसकी लंबाई लगभग 33 से 34 इंच थी और जिसे आम जनता ने भी अपनाया।
भूमि मापने के लिए बीघा (Bigha) का उपयोग किया जाता था, जिसकी लंबाई और चौड़ाई सामान्यतः 60 गज़ मानी जाती थी। गज़ और बीघा मुग़ल मापन प्रणाली की प्रमुख इकाइयाँ थीं।
इन मापों के बीच संबंध इस प्रकार थे:
⦁ ➲ 1 हाथ = 8 गिरह
⦁ ➲ 1 गज़ = 2 हाथ
⦁ ➲ 1 काठी = 5 और 5/6 हाथ
⦁ ➲ 1 पंड = 20 काठी
⦁ ➲ 1 बीघा = 20 पंड
⦁ ➲ 1 बीघा = 20 विश्वा
⦁ ➲ 1 विश्वा = 20 विश्वांस
भारत में 1956 तक, जब मेट्रिक प्रणाली आधिकारिक रूप से लागू नहीं हुई थी, तब तक गज़ जैसी पारंपरिक इकाइयों का व्यापक उपयोग होता रहा।
स्पष्ट है कि मापन इकाइयों की यह यात्रा—शाही गज़ से लेकर आधुनिक मेट्रिक प्रणाली तक—मानव सभ्यता की वैज्ञानिक प्रगति और मानकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही है, जिसने आज हमारे जीवन को अधिक सटीक, सरल और व्यवस्थित बना दिया है।
संदर्भ
https://tinyurl.com/2ddozczz
https://tinyurl.com/2cwhuvag
https://tinyurl.com/22ez3rmu
https://tinyurl.com/y2dnkd9o
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