सूरज की रोशनी से हमारा सबसे बड़ा बिजली संकट कैसे खत्म होगा?

शहरीकरण - नगर/ऊर्जा
30-04-2026 09:35 AM
सूरज की रोशनी से हमारा सबसे बड़ा बिजली संकट कैसे खत्म होगा?

पृथ्वी से लगभग 14 करोड़ 96 लाख किलोमीटर की दूरी पर होकर भी सूरज एक प्राकृतिक परमाणु रिएक्टर (nuclear reactor) की तरह कार्य करता है जो फोटॉन (photon)  नामक ऊर्जा के छोटे पैकेट छोड़ता है। इन फोटॉन को सूर्य से पृथ्वी तक 149.6 मिलियन किलोमीटर की दूरी तय करने में लगभग 8.5 मिनट का समय लगता है। आपको जानकर शायद हैरानी हो कि हर एक घंटे में पृथ्वी पर इतने फोटॉन टकराते हैं, जिनसे सैद्धांतिक रूप से पूरे एक वर्ष के लिए वैश्विक ऊर्जा की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त सौर ऊर्जा उत्पन्न की जा सकती है। धरती पर सूर्य द्वारा प्राप्त होने वाली सौर ऊर्जा की कुल मात्रा दुनिया की वर्तमान और भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं से कहीं अधिक है। आज जब जलवायु संकट पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा ख़तरा बन चुका है, तो ऐसे में जीवाश्म ईंधन से दूरी बनाना बेहद अहम हो गया है। यह एक बड़ी राहत की बात है कि अब लखनऊ शहर भी तेज़ी से साफ़ और सस्ती ऊर्जा के इस विकल्प को अपनाते हुए भारत की सौर क्रांति का एक बड़ा हिस्सा बन रहा है।

File:The Sun by the Atmospheric Imaging Assembly of NASA's Solar Dynamics Observatory - 20100819.jpg

  
नवीकरणीय ऊर्जा क्या है और यह जीवाश्म ईंधन से बेहतर क्यों है? 
नवीकरणीय ऊर्जा वह ऊर्जा है जो प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त होती है और जितनी तेज़ी से हम इसका उपभोग करते हैं, उससे कहीं अधिक तेज़ी से यह प्राकृतिक रूप से वापस भर जाती है। धूप और हवा ऐसे स्रोत हैं जो लगातार प्रकृति द्वारा बनाए जाते रहते हैं और हमारे चारों ओर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। इसके विपरीत कोयला, तेल और गैस जैसे जीवाश्म ईंधन (fossil fuels) गैर-नवीकरणीय संसाधन हैं जिन्हें बनने में करोड़ों साल लगते हैं। जब ऊर्जा उत्पादन के लिए जीवाश्म ईंधन को जलाया जाता है, तो कार्बन डाइऑक्साइड (carbon dioxide) जैसी हानिकारक ग्रीनहाउस गैसों (greenhouse gases) का भारी उत्सर्जन होता है। वर्तमान में उत्सर्जन का सबसे बड़ा हिस्सा जीवाश्म ईंधन का ही है, इसलिए जलवायु संकट को दूर करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा की ओर रुख करना सबसे ज़रूरी है। ज़्यादातर देशों में अब नवीकरणीय ऊर्जा सस्ती हो गई है और यह जीवाश्म ईंधन की तुलना में तीन गुना अधिक रोज़गार भी पैदा करती है। नवीकरणीय ऊर्जा में सौर ऊर्जा के अलावा जलविद्युत सबसे बड़ा स्रोत है, जो उच्च से निम्न स्थानों पर बहते पानी की ऊर्जा का दोहन करता है। इसके साथ ही पवन ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा, महासागर ऊर्जा और बायोएनर्जी भी इसके प्रमुख स्रोत माने जाते हैं।  

सौर ऊर्जा से बिजली बनाने का विज्ञान कब और कैसे खोजा गया? 
सौर ऊर्जा का पूरा विज्ञान फोटोवोल्टिक प्रभाव (photovoltaic effect) पर निर्भर करता है, जिसे पहली बार साल 1839 में फ्रांसीसी भौतिक विज्ञानी एडमंड बेकरेल (Edmond Becquerel) द्वारा प्रदर्शित किया गया था। उन्होंने एक इलेक्ट्रोकेमिकल सेल (electrochemical cell) का उपयोग किया था और यह पाया था कि जब एसिड, तटस्थ या क्षारीय घोल में डूबी प्लैटिनम (platinum) या सोने की दो प्लेटों को असमान रूप से सौर विकिरण के संपर्क में लाया जाता है, तो वहां विद्युत प्रवाह उत्पन्न होता है। बाद में साल 1884 में चार्ल्स फ्रिट्स (Charles Fritts) द्वारा पहले सौर सेल का प्रयोग किया गया था, जिसमें सोने की एक पतली फिल्म से ढकी सेलेनियम (Selenium) की एक परत थी, हालांकि इसकी कार्यक्षमता बहुत ख़राब थी। असल में फोटोवोल्टिक प्रभाव एक भौतिक घटना है जिसमें एक अर्धचालक पदार्थ प्रकाश के संपर्क में आने पर विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करता है। जब सूर्य की रोशनी फोटोडायोड (photodiode) पर पड़ती है, तो वैलेंस बैंड (valence band) में मौजूद इलेक्ट्रॉन ऊर्जा को अवशोषित करते हैं और उत्तेजित होकर चालन बैंड (conduction band) में कूद जाते हैं और मुक्त हो जाते हैं। इस तरह आवेशों के अलग होने से एक विद्युत विभव या वोल्टेज उत्पन्न होता है और प्रकाश ऊर्जा आसानी से विद्युत ऊर्जा में बदल जाती है। 

File:Edmond Becquerel, by Nadar, 2.jpg
एडमंड बेकरेल

छत पर लगे सोलर पैनल असल में बिजली का उत्पादन कैसे करते हैं? 
फोटोवोल्टिक सोलर पैनल विभिन्न प्रकार की कांच की पैकेजिंग में कई सौर कोशिकाओं से बने होते हैं। ये सौर कोशिकाएं अर्धचालक की तरह सिलिकॉन (silicon) से बनी होती हैं और एक सकारात्मक परत और एक नकारात्मक परत के साथ निर्मित होती हैं, जो बैटरी की तरह ही एक विद्युत क्षेत्र बनाती हैं। जब फोटॉन एक सौर सेल से टकराते हैं, तो वे इलेक्ट्रॉनों को उनके परमाणुओं से मुक्त कर देते हैं। यदि सेल के सकारात्मक और नकारात्मक किनारों से कंडक्टर (conductor) जुड़े होते हैं, तो यह एक विद्युत सर्किट बनाता है और जब इलेक्ट्रॉन ऐसे सर्किट से प्रवाहित होते हैं, तो बिजली उत्पन्न होने लगती है। ये फोटोवोल्टिक पैनल डायरेक्ट करंट बिजली उत्पन्न करते हैं, जिसमें इलेक्ट्रॉन सर्किट के चारों ओर एक ही दिशा में बहते हैं। लेकिन हमारे घरों और पावर ग्रिड में अल्टरनेटिंग करंट बिजली का इस्तेमाल होता है, जिसमें इलेक्ट्रॉन आगे और पीछे धकेले जाते हैं। डायरेक्ट करंट (direct current) को अल्टरनेटिंग करंट (Alternating Current) ग्रिड में ले जाने के लिए इनवर्टर (inverter) का उपयोग किया जाता है। इनवर्टर इस पूरे सिस्टम के दिमाग़ की तरह होते हैं, जो न केवल करंट बदलते हैं बल्कि ग्राउंड फॉल्ट सुरक्षा (ground fault protection) और सिस्टम के आंकड़े भी प्रदान करते हैं। आज की तकनीक में माइक्रो-इनवर्टर का इस्तेमाल भी काफ़ी बढ़ गया है, जो एक पूरे सिस्टम के बजाय प्रत्येक व्यक्तिगत सौर पैनल के लिए अनुकूलित होते हैं, जिससे हर पैनल अपनी अधिकतम क्षमता पर प्रदर्शन कर पाता है। जब एक सामान्य ग्रिड-बंधा सिस्टम दिन के उजाले के दौरान ज़रूरत से ज़्यादा ऊर्जा का उत्पादन करता है, तो वह अतिरिक्त ऊर्जा ग्रिड में वापस भेज दी जाती है जिसके लिए ग्राहक को क्रेडिट मिलता है। इस क्रेडिट का उपयोग रात में या बादल वाले दिनों में पारंपरिक ग्रिड से बिजली लेने के लिए किया जा सकता है, जिसे फ़ीड इन टैरिफ (feed in tariff) कहा जाता है।  

File:Solar energy.svg

सौर ऊर्जा के उपयोग के अन्य बड़े तरीक़े क्या हैं? 
सौर विकिरण को न केवल बिजली में बल्कि तापीय ऊर्जा या गर्मी में भी बदला जा सकता है। सौर ऊर्जा को पकड़ने और उसे तापीय ऊर्जा में बदलने के लिए सबसे आम उपकरणों में फ्लैट-प्लेट कलेक्टर (flat-plate collector) शामिल हैं। क्योंकि पृथ्वी की सतह पर सौर विकिरण की तीव्रता कम होती है, इसलिए इन कलेक्टरों का क्षेत्रफल काफ़ी बड़ा होना चाहिए। इनका उपयोग आमतौर पर सौर वॉटर हीटर और घरों को गर्म करने के लिए किया जाता है, जो वाहक तरल पदार्थों को 66 से 93 डिग्री सेल्सियस के तापमान तक गर्म करते हैं। तापीय ऊर्जा रूपांतरण का एक अन्य बेहतरीन तरीक़ा सौर तालाबों में देखने को मिलता है। ये विशेष रूप से खारे पानी के निकाय होते हैं जिन्हें सौर ऊर्जा को इकट्ठा करने और संग्रहीत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इनसे निकलने वाली गर्मी रसायनों, भोजन और कपड़ा उत्पादन को संभव बनाती है और ग्रीनहाउस व स्विमिंग पूल को गर्म करने के लिए भी इस्तेमाल की जाती है। इसके अलावा संकेंद्रित सौर ऊर्जा संयंत्रों में दर्पणों या लेंसों की कतारों का उपयोग किया जाता है जो सूर्य के प्रकाश को एक छोटे बिंदु पर केंद्रित करते हैं। इससे तापमान 2000 डिग्री सेल्सियस या उससे भी अधिक तक पहुंच सकता है, जिसका उपयोग स्टीम टरबाइन (steam turbine) चलाने के लिए किया जाता है। अब सौर तकनीक कृत्रिम पत्तियों के रूप में भी सामने आ रही है, जो प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया की नक़ल करते हुए सौर ऊर्जा का उपयोग करके पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित करती है और बिना किसी प्रदूषण के साफ़ ईंधन देती है।  

उत्तर प्रदेश और विशेषकर लखनऊ में सौर ऊर्जा का भविष्य कैसा है? 
सरकारी नीतियों के मज़बूत समर्थन और बढ़ती पर्यावरणीय जागरूकता ने उद्योगों और आम उपभोक्ताओं दोनों को अपने परिसरों के लिए सौर प्रणाली अपनाने के लिए पूरी तरह आश्वस्त कर दिया है। पिछले कुछ सालों में उत्तर प्रदेश की सौर ऊर्जा क्षमता में दस गुना से अधिक की भारी वृद्धि हुई है, जो साल 2017 में लगभग 288 मेगावाट से बढ़कर 2025 में 2653 मेगावाट तक पहुंच गई है। राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत मार्च 2027 तक 8 लाख रूफटॉप सोलर प्लांट (Rooftop Solar Plant) स्थापित करने का एक बेहद महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके तहत अब तक 1 लाख से अधिक सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं, जिनकी रफ़्तार लगभग 11,000 स्थापना प्रति माह है। लखनऊ शहर भी अब भारत की इस सौर क्रांति को अपनाते हुए ऊर्जा के साफ़ और सस्ते विकल्पों की ओर बढ़ रहा है। लखनऊ को एक टिकाऊ शहर में बदलने और स्वच्छ ऊर्जा के इस विकास को गति देने में यहाँ के शीर्ष सौर वितरकों का बहुत बड़ा योगदान है। इनमें अरसिगा सोलर शामिल है, जिसकी स्थापना 2019 में हुई थी और जो व्यवसायों को सस्ते सौर उपकरण दे रहा है। इसके अलावा लूम सोलर भी अपनी उन्नत तकनीक के साथ लखनऊ में ऊर्जा की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए विश्वसनीय सौर ऊर्जा प्रदान कर रहा है। मार्स सोलर सॉल्यूशन, ओम सोलर सॉल्यूशंस और एमज़ो पॉवरटेक जैसी कंपनियां भी आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए बेहतरीन गुणवत्ता वाले सोलर पैनल, इनवर्टर और कस्टम बैटरी की सुविधा देकर लखनऊ को ऊर्जा कुशल और एक हरित भविष्य की ओर ले जाने का काम कर रही हैं।  

संदर्भ 
https://tinyurl.com/2axfehed
https://tinyurl.com/23mtukqh
https://tinyurl.com/27qqham7
https://tinyurl.com/yay93m2h
https://tinyurl.com/28bd6o9n 

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