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वॉयजर -1 प्रोब (Probe) मानव निर्मित वस्तु है, जो वर्तमान समय में पृथ्वी से बहुत दूर स्थित होगा। वॉयजर -1 और वॉयजर-2 दोनों, सितारों के बीच उस क्षेत्र में पहुंच गये हैं, जहां गैलेक्टिक प्लाज्मा (Galactic plasma) मौजूद है। इस क्षेत्र को अंतर-तारकीय अंतरिक्ष भी कहा जाता है। वॉयजर-1 और वॉयजर-2 को एक तरह के टाइम कैप्सूल (Time capsule) के साथ नासा (National Aeronautics and Space Administration - NASA) द्वारा लॉन्च किया गया था। ऐसा करने का मुख्य उद्देश्य पृथ्वी या उसके वायुमंडल से बाहर रहने वाले जीवों से संचार स्थापित करना था, ताकि उन्हें पृथ्वी पर मनुष्यों के जीवन के बारे में बताया जा सके। ऐसा माना गया है कि, यदि दूसरी दुनिया में जीवन है, तो वहां रहने वाले लोग इसे अवश्य सुनेंगे तथा धरती से सम्बंधित विशेषताओं को जान पाएंगे। 1977 में लॉन्च किया गया, वॉयजर-1, 1990 में यम ग्रह (Pluto) से होकर गुजरा तथा नवंबर 2004 में इसने सौर मंडल को छोड़ दिया। यह अब कुइपर बेल्ट (Kuiper belt) में है। मार्च 2012 में, वॉयजर-1 सूर्य से 1790 करोड़ किलोमीटर से भी अधिक दूरी पर था और लगभग 61,000 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से यात्रा कर रहा था, जबकि वॉयजर-2 सूर्य से 1470 करोड़ किलोमीटर की दूरी पर था, तथा लगभग 56,000 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से आगे बढ़ रहा था। मई 2005 में, यह बताया गया था कि, वॉयजर–1, हेलियोशीथ (Heliosheath – यह अंतरिक्ष का विशाल, बुलबुले जैसा क्षेत्र है, जिसे सूर्य द्वारा घेरा और निर्मित किया गया है) क्षेत्र में प्रवेश कर चुका था। यह क्षेत्र टर्मिनेशन शॉक (Termination shock) के दूसरी ओर स्थित है। टर्मिनेशन शॉक वह क्षेत्र है, जहां सूर्य से लगातार बाहर की ओर बहने वाली विद्युत आवेशित गैस की एक पतली धारा का प्रवाह तारों के बीच मौजूद गैस के दबाव से धीमा हो जाता है। वॉयजर-1 पर ग्यारह उपकरण रखे गए थे, जिनमें से पांच अभी भी चालू हैं, और आज भी सूचनाओं का प्रेषण कर रहे हैं। 12 सितंबर 2013 को, नासा द्वारा घोषणा की गयी, कि वॉयजर-1 ने हेलियोशीथ क्षेत्र को छोड़ दिया है और उसने अंतर-तारकीय अंतरिक्ष में प्रवेश किया है। वॉयजर अंतरिक्ष यानों में रखे गये गोल्डन रिकॉर्ड में 116 चित्रों और विभिन्न प्रकार की ध्वनियों को शामिल किया गया है। इन दोनों अंतरिक्ष यानों में रखे गये रिकॉर्ड की सामग्रियों को कॉर्नेल (Cornell) विश्वविद्यालय के कार्ल सागन (Carl Sagan) की अध्यक्षता में एक समिति द्वारा नासा के लिए चुना गया था। पहले ऑडियो (Audio) अनुभाग में संयुक्त राष्ट्र के तत्कालीन महासचिव कर्ट वाल्डहाइम (Kurt Waldheim) द्वारा अंग्रेजी में बोला गया एक अभिवादन शामिल है, जबकि दूसरे ऑडियो अनुभाग में 55 भाषाओं में बोले गए अभिवादनों को शामिल किया गया है। इन भाषाओं में पंजाबी, बंगाली, उर्दू, हिंदी, गुजराती, मराठी, तेलुगु आदि भाषाएं शामिल हैं। हिंदी में किया गया अभिवादन “धरती के वासियों की ओर से नमस्कार” है, जो ओमर अलजल की आवाज में है। पंजाबी में किये गये अभिवादन (आओ जी, जी आया नु) को जतीन्द्र एन पॉल ने आवाज दी है। इसी प्रकार से उर्दू में किये गये अभिवादन (“अस्सलामु अलैकुम (Assalamu alaikum), हम ज़मीन के रहने वालों की तरफ से आप को खुश आमदीद कहते हैं) को सलमा अलज़ल ने आवाज दी है। अगले ऑडियो भाग में पृथ्वी की विभिन्न आवाजों को शामिल किया गया है, जिनमें समुद्र की उछाल की आवाज, हवा चलने, बादलों के गरजने, ज्वालामुखी के फटने, बारिश के आने, आग की लपटों आदि की आवाज शामिल है।
इसके अलावा इनमें विभिन्न जीवों जैसे, पक्षियों, व्हेल (Whales), डॉल्फ़िन (Dolphins) आदि की आवाजों को भी शामिल किया गया है, जो रिकॉर्ड का सबसे खूबसूरत हिस्सा है। इसमें कई संस्कृतियों के संगीत को भी शामिल किया गया है, जिनमें भारत का प्रसिद्ध संगीत राग भैरवी (जात कहां हो) भी शामिल है। ऑडियो के साथ, रिकॉर्ड में 116 चित्रों का संग्रह भी है, जिनमें ताज महल का चित्र भी शामिल है। इसी प्रकार से अनेकों चीजें रिकॉर्ड में शामिल की गयी है। यह दूसरे ग्रह के प्राणियों को पृथ्वी के जीवन और संस्कृति के बारे में बताने का एक अनोखा प्रयास है, जो दोनों ग्रहों के प्राणियों के बीच शांति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है। इसलिए इसमें विनाशकारी पहलुओं जैसे युद्ध, बम, नरसंहार आदि को शामिल नहीं किया गया है। इस प्रकार यह रिकॉर्ड विशाल और विस्मयकारी ब्रह्मांड को लेकर मानव की आशा और उसके संकल्प के साथ-साथ शांति और सद्भावना का प्रतिनिधित्व करता है।
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