औपनिवेशिक काल में वाणिज्यिक, सैन्य व् प्रशासनिक गतिविधि हेतु करवाए गए भौगोलिक सर्वेक्षण व् मानचित्रण

औपनिवेशिक काल और विश्व युद्ध : 1780 ई. से 1947 ई.
21-03-2022 10:02 AM
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औपनिवेशिक काल में वाणिज्यिक, सैन्य व् प्रशासनिक गतिविधि हेतु करवाए गए भौगोलिक सर्वेक्षण व् मानचित्रण

वर्तमान समय में ऐसी कई सुविधाएं या तकनीकें विकसित हो चुकी हैं, जिसकी सहायता से किसी देश या क्षेत्र के मानचित्र को बहुत सटीक तरीके से बनाया जा सकता है। किंतु पहले ये सभी सुविधाएं मौजूद नहीं थी, लेकिन फिर भी ऐसे मानचित्र बनाए गए, जो किसी विशेष क्षेत्र या देश का काफी हद तक सही मानचित्रण करते थे।ऐसे कई यूरोपीय (European) मानचित्रकार हैं, जिन्होंने भारत के ऐतिहासिक मानचित्रों को आकार देने में मदद की। इन्हीं मानचित्रकारों में से एक जेम्स रेनेल (James Rennell) भी हैं।
रेनेल, एक अंग्रेजी भूगोलवेत्ता, इतिहासकार और समुद्र विज्ञानी थे। रेनेल ने एक इंच से पांच मील की दूरी पर बंगाल के कुछ पहले सटीक मानचित्रों के साथ-साथ भारत की सटीक रूपरेखा तैयार की और बंगाल के सर्वेयर जनरल (Surveyor General) के रूप में कार्य किया।रेनेल को समुद्र विज्ञान का जनक कहा जाता है। 1830 में वह लंदन (London) में रॉयल ज्योग्राफिकल सोसाइटी (Royal Geographical Society) के संस्थापकों में से एक थे।जेम्स रेनेल को व्यापक रूप से भारतीय सर्वेक्षण का जनक माना जाता है। मेजर जेम्स रेनेल (1742-1830), 14 साल की उम्र में मिडशिपमैन (midshipman) बने, और रॉयल नेवी (Royal Navy) में सर्वेक्षण का प्रशिक्षण प्राप्त किया। वे 1763 में ईस्ट इंडिया कंपनी में शामिल हुए, तथा बंगाल के पहले सर्वेयर जनरल (1767-1777) बने। उन्होंने भारत के अधिकांश हिस्सों का पहला व्यापक भौगोलिक सर्वेक्षण किया। यह सर्वेक्षण एक बहुत बड़ा उपक्रम था,जिसने कई यूरोपीय देशों की तुलना में भारत के कुछ हिस्सों का अधिक विस्तार से मानचित्रण किया था।उनके सर्वेक्षण ने द ग्रेट ट्रिगोनोमेट्रिकल सर्वे ऑफ इंडिया (The Great Trigonometrical Survey of India) का नेतृत्व किया जो 1802 में शुरू हुआ।रेनेल ने पंजाब क्षेत्र के अपने नक्शों के स्रोत के रूप में स्वदेशी मानचित्रों और रेखाचित्रों का उपयोग करके सटीकता के लिए अपने नक्शों को लगातार अपडेट किया और नई भौगोलिक जानकारी जोड़ी। अपनी कार्टोग्राफी (Cartography) के लिए वे पहले के नक्शों से जानकारी इकट्ठा करते थे,सड़कों के साथ दूरियों को मापते थे,नियंत्रण बिंदुओं के निर्देशांक स्थापित करते थे,और उसके बाद अपने नक्शे बनाने के लिए एक “ग्रेटिक्यूल”(Graticule)या ग्रिड का उपयोग करते थे।रेनेल के नक्शे इतनी सटीकता और गुणवत्ता के थे कि 19 वीं शताब्दी में उनका अच्छी तरह से उपयोग किया गया था।रेनेल 1782 में इंग्लैंड (England) लौट आए जहां उन्होंने भूगोल और इतिहास पर कार्य करना और उन्हें प्रकाशित करना जारी रखा, इस प्रकार वे महासागर धाराओं के मानचित्रण और अध्ययन में विशेषज्ञ बन गए।
भारत में उनके सर्वेक्षण की बात करें तो रेनेल ने शुरू में 1764 की शरद ऋतु में शुरू होने वाली गंगा नदी का सर्वेक्षण किया था,1766 में उन्होंने उन पहाड़ों का सर्वेक्षण किया जिन्हें उन्होंने टार्टेरियन (Tartarian) पर्वत (हिमालय) कहा।सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य कलकत्ता से उत्तरी क्षेत्रों के लिए एक नौगम्य जलमार्ग खोजना था।उसी वर्ष कैप्टन रेनेल पर उस समय हमला किया गया,जब सर्वेक्षणकर्ताओं की एक पार्टी भूटान सीमा पर थी।यहां कुछ संन्यासियों ने उन्हें घेर लिया। हालांकि रेनेल जीवित थे, लेकिन इस हमले से वे बहुत बुरी तरह से घायल हुए।उनका इलाज डॉ फ्रांसिस रसेल (Francis Russell) द्वारा किया गया था। ठीक होने के बाद रेनेल के काम की बहुत सराहना की गई और उन्हें प्रति वर्ष 1000 पाउंड का एक सुंदर वेतन प्रदान करने की सिफारिश भी की गई। 1777 में भारत छोड़ने से पहले वे कई स्थानीय और प्रांतीय मानचित्र तैयार कर चुके थे। भारत के लिए रेनेल के प्रसिद्ध कार्यों की बात करें तो 1779 में प्रकाशित बंगाल एटलस उनके कार्य का एक बेहद अच्छा उदाहरण है, जिसका उपयोग वाणिज्यिक, सैन्य और प्रशासनिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण था।अगले साठ वर्षों के लिए रेनेल के नक्शे क्षेत्र के सबसे सटीक नक्शे थे।रेनेल के मेमोयर ऑफ ए मैप ऑफ हिंदुस्तान या मुगल साम्राज्य में देश के भूगोल और वर्तमान विभाजन का चित्रण मौजूद है।देशों का नक्शा भारतीय नदियों के ऊपरी सिरे और कैस्पियन (Caspian) सागर के बीच स्थित है।
रेनेल ने भारत के इस नए मानचित्र के लिए कई महत्वपूर्ण संपादन और सुधारों को दिखाया है।पंजाब क्षेत्र को सामयिक बनाने के लिए उन्होंने भौगोलिक जानकारी के मूल स्रोतों पर भरोसा किया है।रेनेल के मेमोयर ऑफ ए मैप ऑफ हिंदुस्तान के तीन संस्करण 1783 और 1793 के बीच के हैं। उनके अन्य मानचित्रों में बंगाल और बिहार का मानचित्र, उत्तरी-मध्य भारत का मानचित्र (1777), भारतीय प्रायद्वीप और सीलोन (Ceylon) का मानचित्र (1793) आदि शामिल हैं।

संदर्भ:
https://bit.ly/3JdBiGW
https://bit.ly/3tVM1PJ
https://bit.ly/3w9XzSa

चित्र सन्दर्भ

1. हिंदुस्तान का नक्शा, 1782 को दर्शाता एक चित्रण (LOC's Public Domain Archive)
2. जेम्स रेनेल (James Rennell) को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
3. हिंदुस्तान का नक्शा, रेनेल जेम्स, दिनांक: 1782, को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
4. कार्ट वैन हेट स्ट्रोमगेबीड वैन डे गंगा बंगाल, बहार, औडे और इलाहाबाद का एक नक्शा जिसमें आगरा और दिल्ली का हिस्सा हुरद्वार से समुद्र तक गंगा के प्रवाह को प्रदर्शित करता है को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)



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