मेरठ के बच्चे और टीकाकरण: कैसे समय पर टीके उन्हें गंभीर बीमारियों से बचाते हैं?

विचार II - दर्शन/गणित/चिकित्सा
29-10-2025 09:20 AM
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मेरठ के बच्चे और टीकाकरण: कैसे समय पर टीके उन्हें गंभीर बीमारियों से बचाते हैं?

मेरठवासियों, क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे छोटे-छोटे बच्चे, जिनके चेहरों पर मासूमियत और जीवन की पहली चमक दिखाई देती है, उन्हें गंभीर और जानलेवा बीमारियों से बचाने का सबसे आसान और प्रभावी तरीका क्या हो सकता है? इसका जवाब है - टीकाकरण। यह केवल बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा नहीं करता, बल्कि पूरे समाज में झुंड प्रतिरक्षा (Herd Immunity) बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब अधिकतम बच्चे समय पर टीका लगवाते हैं, तो न केवल वे स्वयं सुरक्षित रहते हैं, बल्कि उन बच्चों और बुजुर्गों की भी सुरक्षा होती है, जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है या जिन्हें किसी कारणवश टीका नहीं लग पाया। मेरठ जैसे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण की जागरूकता बढ़ाने से पोलियो, खसरा, डिप्थीरिया (Diphtheria), काली खांसी, टेटनस और हेपेटाइटिस (Hepatitis) जैसी गंभीर बीमारियों से न केवल बचाव होता है, बल्कि यह बच्चों के जीवन की शुरुआती सालों के लिए एक मजबूत और स्वस्थ नींव तैयार करता है। सही समय पर और पूरी खुराक के साथ टीकाकरण कराना बच्चों को सिर्फ शारीरिक रूप से ही सुरक्षित नहीं बनाता, बल्कि मानसिक रूप से भी उन्हें मजबूत बनाता है। बच्चे खेलकूद, पढ़ाई और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहते हैं, और जीवन की शुरुआती चुनौतियों का सामना आसानी से कर पाते हैं।
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि टीकाकरण क्यों बेहद जरूरी है, यह बचपन की गंभीर बीमारियों को कैसे रोकता है, भारत में पोलियो उन्मूलन की सफलता और मिशन इंद्रधनुष जैसी पहलें बच्चों के स्वास्थ्य को कैसे मजबूत बनाती हैं। इसके साथ ही हम सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) और समाज में टीकाकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों पर भी गौर करेंगे, ताकि यह समझा जा सके कि टीकाकरण न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा, बल्कि पूरे समुदाय की सुरक्षा और बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए कितना महत्वपूर्ण है।

टीकाकरण का महत्व और बचपन की बीमारियों से सुरक्षा
टीकाकरण बच्चों को गंभीर और जानलेवा बीमारियों से बचाने का सबसे प्रभावी और सुरक्षित तरीका है। बचपन में लगाए जाने वाले टीके जैसे पोलियो, खसरा, डिप्थीरिया, टेटनस, काली खांसी और हेपेटाइटिस बच्चों के जीवन को गंभीर बीमारियों से बचाते हैं और उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं। हर टीका बच्चों के शरीर को रोगजनकों से लड़ने का प्रशिक्षण देता है, ताकि भविष्य में जब वे इन रोगों के संपर्क में आएं, तो उनका शरीर तुरंत प्रतिक्रिया कर सके। जब समुदाय के अधिकतर बच्चे समय पर टीकाकरण करवा लेते हैं, तो इससे झुंड प्रतिरक्षा (Herd Immunity) विकसित होती है। इसका मतलब है कि केवल टीका लगाए गए बच्चे ही सुरक्षित नहीं रहते, बल्कि वे उन बच्चों और लोगों की भी सुरक्षा करते हैं, जिन्हें किसी कारणवश टीका नहीं लगाया गया। इस तरह, नवजात शिशु, बुजुर्ग और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग भी सुरक्षित रह पाते हैं। यही कारण है कि टीकाकरण केवल व्यक्तिगत सुरक्षा नहीं बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है।

टीकाकरण के वैज्ञानिक और स्वास्थ्य लाभ
टीके सिर्फ बीमारियों से बचाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रत्येक टीका कमजोर या मृत रोगजनकों के माध्यम से बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रशिक्षित करता है। इससे शरीर सीखता है कि इन रोगों से कैसे लड़ना है। वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि समय पर टीकाकरण से बच्चों में रक्त संचार बेहतर होता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System) मजबूत होती है और संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। इसके अलावा, नियमित टीकाकरण बच्चों को मानसिक रूप से भी मजबूत बनाता है। जब उनका शरीर और दिमाग स्वस्थ रहता है, तो वे शारीरिक गतिविधियों में सक्रिय रहते हैं, खेलकूद और पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करते हैं और जीवन की प्रारंभिक चुनौतियों का सामना आसानी से कर पाते हैं। टीकाकरण न केवल वर्तमान में सुरक्षा देता है, बल्कि बच्चों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को भी सुनिश्चित करता है।

भारत में पोलियो उन्मूलन और राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान
भारत ने पोलियो उन्मूलन के क्षेत्र में ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की है। 13 जनवरी 2011 के बाद देश में पोलियो का कोई नया मामला दर्ज नहीं हुआ। इसके पीछे राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर चलाए गए पोलियो टीकाकरण अभियान, पल्स पोलियो कार्यक्रम और रैपिड रिस्पांस टीम (Rapid Response Team) जैसे उपाय हैं, जो किसी भी प्रकोप का तुरंत पता लगाकर रोकने में सक्षम हैं। सीमावर्ती और दूरदराज के क्षेत्रों में विशेष टीकाकरण बूथ लगाए गए हैं ताकि किसी भी तरह के वायरस का प्रवेश रोका जा सके। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं, जिससे पोलियो प्रभावित देशों से वायरस का संक्रमण न फैले। इन प्रयासों के कारण भारत ने वैश्विक स्तर पर पोलियो उन्मूलन में मिसाल कायम की है।

मिशन इंद्रधनुष: बच्चों के लिए पूर्ण टीकाकरण कवरेज
मिशन इंद्रधनुष दिसंबर 2014 में शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य बच्चों को पूर्ण टीकाकरण कवरेज प्रदान करना और इसे 90% तक बढ़ाना है। इस मिशन के माध्यम से उन क्षेत्रों और बच्चों तक भी टीका पहुँचाया जाता है, जिन्हें किसी कारणवश टीकाकरण का लाभ नहीं मिल पाया था। मिशन के छह चरण पूरे हो चुके हैं और इसने टीकाकरण दर को पर्याप्त रूप से बढ़ाया है। बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है, गंभीर बीमारियों से बचाव हुआ है और समुदाय में जागरूकता भी बढ़ी है। मिशन इंद्रधनुष ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सही रणनीति और नियमित प्रयास से टीकाकरण कवरेज में सुधार संभव है।

सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) और सरकारी पहलें
सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) भारत का सबसे बड़ा और प्रभावशाली सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियान है। इस कार्यक्रम के तहत हर साल लाखों नवजात शिशुओं और गर्भवती महिलाओं को मुफ्त में टीके प्रदान किए जाते हैं। यूआईपी (UIP) 12 बीमारियों के लिए मुफ्त टीके उपलब्ध कराता है, जिनमें पोलियो, खसरा, डिप्थीरिया, टेटनस, काली खांसी और हेपेटाइटिस बी शामिल हैं। कुछ अतिरिक्त टीके जैसे रोटावायरस (Rotavirus) और न्यूमोकोकल (pneumococcal) वैक्सीन भी बच्चों के लिए उपलब्ध हैं। सरकारी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र इस कार्यक्रम को नियमित और कुशलतापूर्वक लागू कर रहे हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि सभी बच्चे, चाहे वे किसी भी सामाजिक या आर्थिक पृष्ठभूमि से हों, गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रहें।

टीकाकरण से जुड़े सुरक्षा उपाय और सामाजिक जागरूकता
टीकाकरण सिर्फ बच्चों का व्यक्तिगत स्वास्थ्य सुरक्षा उपाय नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज को बीमारियों से बचाने का एक मजबूत माध्यम है। माता-पिता को यह ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे को सही समय पर सही खुराक मिले। इसके अलावा, समुदाय में स्वास्थ्य शिविर, जागरूकता अभियान और घर-घर टीकाकरण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इससे न केवल बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है, बल्कि समाज में बीमारियों के फैलाव को भी रोका जा सकता है। जागरूकता के साथ टीकाकरण कराने से हर परिवार, मोहल्ला और समुदाय सुरक्षित बनता है। यह सभी के लिए स्वस्थ, सुरक्षित और रोग-मुक्त जीवन की नींव रखता है।

संदर्भ- 
https://tinyurl.com/2d6clbjq 
https://tinyurl.com/2763lspz 
https://tinyurl.com/4dz4746m 

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