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मेरठवासियों, हमारा शहर अपनी पुरानी गलियों, ऐतिहासिक इमारतों और जीवंत बाज़ारों के कारण हमेशा से ही तस्वीरों की एक चलती फिरती किताब रहा है। घंटाघर के आसपास की हलचल हो या ऐतिहासिक इमारतों के पास का सुकून, हर जगह आपको लोग किसी न किसी याद को कैमरे में कैद करते दिख जाते हैं। आज फ़ोटोग्राफ़ी बेहद आधुनिक हो चुकी है और हर तस्वीर को अपनी पसंद के अनुसार बदला जा सकता है, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब दुनिया सिर्फ़ ब्लैक एंड वाइट की सादगी में बसती थी। यह वही कला थी जिसमें गहरे भूरे, हल्के सफ़ेद और बीच के तमाम रंगों की मदद से सम्मोहक चित्र बनाए जाते थे। फ़ोटोग्राफ़ी का इतिहास बहुत पुराना है और इसी इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब दुनिया की पहली रंगीन तस्वीर 1861 में थॉमस सटन (Thomas Sutton) ने रंगीन धारियों वाले रिबन के धनुष की ली।
आज हम सबसे पहले यह समझेंगे कि ब्लैक एंड वाइट फ़ोटोग्राफ़ी क्यों शुरू से ही इतनी महत्वपूर्ण रही और कैसे यह कला फ़ोटोग्राफ़ी सीखने वालों के लिए एक मज़बूत आधार बनती है। इसके बाद हम ब्लैक एंड वाइट फ़ोटोग्राफ़ी के उन सात आवश्यक तत्वों को जानेंगे जो किसी भी तस्वीर की आत्मा होते हैं। फिर हम पहली रंगीन तस्वीर के इतिहास को समझेंगे, जिसमें यह जाना जाएगा कि यह प्रयोग कैसे हुआ और वैज्ञानिकों ने इसकी प्रकृति को कैसे समझा। अंत में, हम रंगीन फ़ोटोग्राफ़ी के विकास की उस लंबी यात्रा को जानेंगे जिसमें ऑटोक्रोम (autochrome) से लेकर आधुनिक फ़िल्मों तक कई महत्वपूर्ण चरण आए और जिसने आज की रंगीन दुनिया को जन्म दिया।

ब्लैक एंड वाइट फ़ोटोग्राफ़ी का महत्व
जब फ़ोटोग्राफ़ी का आविष्कार हुआ, उस समय तस्वीरें केवल उपलब्ध रासायनिक सामग्री की सीमाओं के कारण मोनोक्रोम रूप में बनती थीं, यानी काले और सफेद, भूरे और सफेद या नीले और सफेद रंगों के मेल से। आज भले ही कैमरा या फ़ोन में कई रंग विकल्प मौजूद हों, फिर भी ब्लैक एंड वाइट तस्वीरें लोगों को हमेशा आकर्षित करती हैं। इन तस्वीरों में रंगों का आकर्षण नहीं होता, बल्कि प्रकाश, रेखाओं और भावों का सौंदर्य होता है। यही कारण है कि ललित कलाओं, वैज्ञानिक चित्रों और गंभीर भावनाओं वाले रेखाचित्रों में इनका उपयोग अधिक होता है। शुरुआती सीखने वालों के लिए ब्लैक एंड वाइट फ़ोटोग्राफ़ी एक मजबूत आधार बनाती है क्योंकि यहाँ रंगों का व्यवधान नहीं होता, और फ़ोटोग्राफ़र स्पष्ट रूप से समझ पाता है कि प्रकाश, छिद्र का आकार, प्रकाश-संवेदनशीलता और दृश्य की गति जैसी बातें तस्वीर को कैसे बदलती हैं। इस प्रक्रिया में तस्वीर केवल दृश्य नहीं बनती, बल्कि एक अध्ययन बन जाती है जिसमें प्रकाश और संरचना अपनी सच्ची शक्ति दिखाते हैं।
ब्लैक एंड वाइट फ़ोटोग्राफ़ी में महत्वपूर्ण तत्व

पहली रंगीन तस्वीर कैसे बनी
दुनिया की पहली रंगीन तस्वीर उन्नीसवीं सदी में एक वैज्ञानिक प्रयोग के दौरान ली गई थी। इसमें रंगीन धारियों वाले रिबन का उपयोग किया गया था, और यह चित्र यह दिखाने के लिए बनाया गया था कि प्रकाश के विभिन्न रंग मिलकर कैसे दृश्य उत्पन्न करते हैं। बाद में अध्ययन से पता चला कि उस समय उपयोग की गई सामग्री लाल रंग के प्रति लगभग असंवेदनशील थी और हरे रंग को भी बहुत कम पहचान पा रही थी, इसके बावजूद यह प्रयोग एक ऐतिहासिक क्षण साबित हुआ क्योंकि इसी से भविष्य की रंगीन फ़ोटोग्राफ़ी का मार्ग खुला।

पिछले वर्षों में रंगीन फ़ोटोग्राफ़ी का विकास
रंगीन फ़ोटोग्राफ़ी का विकास एक लंबी और मेहनती यात्रा का परिणाम था। बीसवीं सदी की शुरुआत में दो फ़्रांसीसी भाइयों ने एक अनोखी प्रक्रिया विकसित की जिसमें सूक्ष्म आकार के रंगे हुए दानों को काँच की प्लेट पर फैलाकर रंगीन तस्वीरें बनाई जाती थीं। यह प्रक्रिया समय लेने वाली थी पर उस दौर में इसे सबसे सफल माना गया। इसी समय फ़ोटोग्राफ़रों के सामने यह समस्या थी कि तीन अलग अलग फ़िल्टरों के सहारे एक ही दृश्य की तीन तस्वीरें लेना बेहद कठिन होता था, क्योंकि थोड़ी सी भी हलचल तस्वीर को बिगाड़ देती थी। इसलिए ऐसे विशेष कैमरे बनाए गए जो एक ही समय में तीन तस्वीरें ले सकते थे। इसके बाद एक वैज्ञानिक ने इस प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए एक ही प्रणाली में तीन विभिन्न रंग-संवेदनशील परतों को शामिल किया जिससे तस्वीरें लेना आसान हुआ। फिर तीस के दशक में एक नई प्रकार की फ़िल्म सामने आई जो गैर पेशेवर लोगों के लिए उपयोगी थी, भले ही उसमें कुछ सीमाएँ थीं। अंततः रंगीन तस्वीरों की दुनिया में असली बदलाव तब आया जब एक प्रसिद्ध कंपनी ने अत्यंत विकसित रंगीन फ़िल्म पेश की जिसमें तीन अलग अलग परतें थीं और प्रत्येक परत प्रकाश के अलग अलग रंगों को पहचानती थी। धीरे धीरे इसकी प्रक्रिया सरल होती गई और आने वाले दशकों में रंगीन फ़ोटोग्राफ़ी आम जनता के लिए सुलभ हो गई। आज की रंगीन दुनिया उसी यात्रा का परिणाम है जो कई प्रयोगों और परिश्रम से होकर गुज़री है।
संदर्भ
https://tinyurl.com/4hmvh6wy
https://tinyurl.com/4h59ftf8
https://tinyurl.com/bdf8v3av
https://tinyurl.com/bddsuywn
https://tinyurl.com/3r6rms3v
https://tinyurl.com/ystfvfez
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