मेरठ, आइए आज हम पंचतंत्र के कहानी संकलन को राजकुमारों को ज्ञान और रणनीतिक सोच सिखाने के उद्देश्य से लिखी गई कहानियों के रूप में पढ़ें। लेख में हम पंचतंत्र के पांच अध्यायों को देखेंगे और इनके प्रमुख उपदेशों को समझेंगे। हमें ये उपदेश प्रत्येक अध्याय की सरल एवं सार्थक कहानियों के माध्यम से मिलते हैं। आगे हम जांच करेंगे कि, इन कहानियों को हमारे निर्णय लेने और व्यवहार करने में मार्गदर्शन हेतु कैसे लिखा गया था। अंततः हम वैश्विक साहित्य पर पंचतंत्र के प्रभाव को समझेंगे, और जानेंगे कि इसकी शिक्षाएं विभिन्न संस्कृतियों और पीढ़ियों में कैसे फैली हैं।
'पंचतंत्र' शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है। 'पंच' का अर्थ पांच, और 'तंत्र' का अर्थ सिद्धांत है; तथा इस प्रकार, 'पंचतंत्र' का अर्थ 'पांच सिद्धांत' है। ये पांच सिद्धांत एक राजा या राजकुमार के साथ-साथ, एक आम आदमी को भी उसके दैनिक जीवन में मार्गदर्शन कर सकते हैं। एक राजा को अपने राज्य पर कैसे शासन करना चाहिए; कैसे और किससे मित्रता करनी चाहिए; एक सच्चे मित्र का चयन कैसे करना चाहिए; और दैनिक जीवन में कैसे व्यवहार करना चाहिए; यह सब मार्गदर्शन पंचतंत्र की कहानियों में दिया गया है। प्राचीन काल में 'अमरशक्ति' नामक एक राजा था, जो दक्षिण भारत में 'महिलारोप्य' नामक स्थान पर शासन करता था। वह एक न्यायप्रिय एवं कर्तव्यपरायण शासक था। इस राजा के बहुशक्ति, उग्रशक्ति और अनंतशक्ति नाम के तीन पुत्र थे, जो बहुत आलसी और मूर्ख थे। इस कारण, राजा उनके भविष्य को लेकर चिंतित थे। जब राजा बूढ़े हो गए, तब वे हमेशा यह सोचकर चिंतित रहते थे कि, उनकी मृत्यु के बाद उनका उत्तराधिकारी कौन होगा। अपने बेटों के बारे में सोचते समय, उन्हें एक कहावत याद आती थी। वह कहावत इस प्रकार थी -
अजातमृतमूर्खेभ्यो मृतजातौ सुतौ वरम्।
यतस्तौ स्वल्पदुःखाय यावज्जीवं जदो दहेत् ॥
इसका अर्थ था - अजन्मे, मृत और मूर्ख पुत्रों में मृत और अजन्मे पुत्र ही श्रेष्ठ होते हैं, क्योंकि इनसे होने वाला दुःख अपेक्षाकृत कम होता है। मूर्ख पुत्र सदैव मन को सताता रहता है। ![]()
अमरशक्ति राजा की सेवा में 500 विद्वान थे। एक दिन राजा ने उन विद्वानों को बुलाया और उनसे कहा कि, वे कुछ ऐसा करें जिससे उनके बच्चे बुद्धिमान और चतुर बनें। विद्वानों ने राजा को अपने पुत्रों को विष्णु शर्मा नामक विद्वान ब्राह्मण के पास ले जाने की सलाह दी। इस पर राजा ने विष्णु शर्मा को बुलाया और उन्हें अपनी इच्छा बताई। तब विष्णु शर्मा ने राजा से वादा किया कि, छह महीनों में वह उनके बेटों को बुद्धिमान और ज्ञानी बना देंगे। अत: राजा ने अपने पुत्रों को विद्वान विष्णु शर्मा के पास भेज दिया। तब, विष्णु शर्मा ने विभिन्न कहानियों के माध्यम से उन्हें सांसारिक ज्ञान सिखाया।
छह महीनों बाद जब तीनों पुत्र राज्य में वापस आए, तो वे पहले से बुद्धिमान और ज्ञानी बन गए थे। विष्णु शर्मा ने राजकुमारों को दिए गए ज्ञान का उपयोग कैसे और कब करना है, यह भी सिखाया था। उन्होंने ये बातें राजकुमारों को जानवरों और पक्षियों के बारे में विभिन्न कहानियां सुनाकर बताई। विद्वान विष्णु शर्मा द्वारा राजकुमारों को सुनाई गई ये कहानियां पांच भागों में विभाजित हैं, और इन्हीं कहानियों को 'पंचतंत्र' कहा जाता है।
1. ‘मित्र-भेद’ पंचतंत्र की प्रारंभिक पुस्तक है। यह सबसे लंबी और सबसे जटिल पुस्तकों में से भी एक है। इसमें संजीवक बैल और पिंगलक (पीला-भूरा) शेर की कहानी है। ये दो असामान्य मित्र थे, जिनके बंधन को षडयंत्रकारी सियार - दमनक ने नष्ट कर दिया था। इस कहानी के माध्यम से, हम चापलूसी, गपशप और चालाकी के खतरों को पहचानना सीखते हैं। ‘मित्र-भेद’ की कहानियां बताती हैं कि, कैसे विश्वास को हथियार बनाया जा सकता है; और जब संदेह पैदा किया जाता है, तो सबसे मजबूत दोस्ती भी कैसे टूट सकती है। इस प्रकार दोस्ती का टूटना समझकर, हम अपने रिश्तों में ईमानदारी, वफादारी और विवेक को महत्व देना सीखते हैं।
2. ‘मित्र-लाभ’ पंचतंत्र की दूसरी पुस्तक है, और यह पहली पुस्तक के प्रतिरूप के रूप में कार्य करती है। यह पुस्तक बताती है कि, सच्ची मित्रता कैसे बनती और कायम रहती हैं। इस पुस्तक में चार दोस्तों: एक कौवा, एक चूहा, एक कछुआ और एक हिरण, की सुंदर कहानी है। आकार, गति और प्रजातियों में अंतर के बावजूद, ये चार जानवर एक अटूट बंधन साझा करते हैं। जब उनमें से किसी एक पर ख़तरा मंडराता है, तो बाकी लोग साहस और चतुराई के साथ अपने दोस्त को बचाने के लिए एकजुट हो जाते हैं। इससे हमें पता चलता है कि, सच्ची दोस्ती मतभेदों से परे होती है। इस कहानी से हम सीखते हैं कि, वफादारी, विश्वास और एक साथ काम करने से किसी भी बाधा को दूर किया जा सकता है।
3. ‘काकोलुकीय’ पंचतंत्र की तीसरी और शायद इसकी सबसे रणनीतिक पुस्तक है। यह पुस्तक कौवों और उल्लुओं के बीच एक प्राचीन युद्ध की कहानी बताती है। इस मनोरंजक कथा के माध्यम से, हम रणनीति की कला, घमंड के खतरों और अंतहीन संघर्ष की कीमत को देखते हैं। इसमें कौवा और उल्लू चतुर सलाहकारों, बहादुर योद्धाओं और चालाक जासूसों से मिलते हैं। वे देखते हैं कि, कैसे कोई बुद्धिमान निर्णय इतिहास की दिशा बदल सकता है। लेकिन इन रोमांचक लड़ाइयों और चतुर युक्तियों के पीछे एक गहरा सबक छिपा है। वे यह है कि, शांति अक्सर युद्ध से अधिक अच्छी होती है, और यदि पुराने दुश्मन भी घमंड के बजाय ज्ञान को चुनते हैं, तो सुलह पा सकते हैं।
4. ‘लब्धप्रणाश’ पंचतंत्र की चौथी पुस्तक है। इसके जीवन सबक यह हैं कि, हमने जो जीवन में कमाया है, उसे कैसे सुरक्षित और संरक्षित किया जाए, तथा कैसे लापरवाही या गलत विश्वास, नुकसान का कारण बन सकता है। इस पुस्तक का केंद्रबिंदु बंदर और मगरमच्छ की प्रिय कहानी है। उनकी दोस्ती, विश्वासघात और त्वरित सोच की कहानी ने सदियों से सब को प्रसन्न किया है। इस पुस्तक की कहानियों के माध्यम से, हम सीखते हैं कि सफलता केवल आधी यात्रा है, और बाकी आधी सफलता हमने जो हासिल किया है, उसकी रक्षा करना है। यह पुस्तक हमें निम्नलिखित बातें सिखाती हैं - यह जानना कि किस पर भरोसा करना है; खतरे को आने से पहले पहचानना; और कठिन परिस्थितियों से बचने के लिए बल के बजाय बुद्धि का उपयोग करना।
5. ‘अपरीक्षितकारक’ पंचतंत्र की पांचवीं और अंतिम पुस्तक है। यह सबक प्रदान करती है कि, कोई भी कार्य करने से पहले सोचें। इस पुस्तक की कहानियां अक्सर भावनात्मक हैं। वे जल्दबाजी, क्रोध, भय या अधीरता में किए गए कार्यों के दुखद परिणाम दिखाती हैं। इसमें एक वफादार नेवले की कहानी है, जिसे उसके मालिक ने घबराहट में गलत तरीके से मार डाला था। ये कहानी हमें सिखाती है कि, कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले धैर्य, चिंतन और सभी तथ्यों को इकट्ठा करना चाहिए।

पंचतंत्र की वैश्विक यात्रा फारस (Persia) के राजा खुसरो के शासनकाल (531-579 ईस्वी) में शुरू हुई। उन्होंने ईरान (Iran) में एक बड़ा अस्पताल स्थापित किया था और वहां दुर्लभ औषधीय पौधों को लाने हेतु, अपने दरबारी चिकित्सक - बोरज़ुया को भारत भेजा था। भारत से लौटने पर, बोरज़ुया पंचतंत्र की प्रतियां फारस ले आए। लगभग 570 ईसा पूर्व में, बोरज़ुया ने पंचतंत्र का पुरानी फ़ारसी भाषा - पहलवी (Pahlavi) में अनुवाद किया था। लगभग उसी समय, वर्तमान इराक (Iraq) में पुरानी सिरिएक भाषा (Syriac) में भी पंचतंत्र का अनुवाद किया गया था, जहां से यह बीजान्टिन साम्राज्य (Byzantine Empire) में फैल गई। सातवीं सदी के मध्य में फारस अरब साम्राज्य का हिस्सा बन गया। तब अब्दुल्ला इब्न अल-मुक़फ़ा (Abdullah ibn al-Muqaffa) ने बोरज़ुया (Borzuya) के पहली अनुवाद का अरबी में ‘कलीला वा-दिमना (Kalila wa Dimna)' के रूप में अनुवाद किया था। नैतिक शिक्षा वाली इन कहानियों को अरब समाज में बहुत लोकप्रियता मिली। यह अनुवाद अरब साम्राज्य में, स्पेन (Spain) और मोरक्को (Morocco) से लेकर मध्य एशिया तक फैला हुआ था। समय के साथ, यह इस्लामी दुनिया में हर राजा के लिए जरूरी हो गया।
कॉन्स्टेंटिनोपल (Constantinople) के एक यूनानी चिकित्सक - सिमोन सेठ (Syemon Seth) ने 1080 ईस्वी में इस पाठ का ग्रीक (Greek) में अनुवाद किया। यहां से, वह पाठ बुल्गारिया (Bulgaria), यूगोस्लाविया (Yugoslavia), और रोमानिया (Romania) जैसे देशों में प्रसिद्ध हुआ, जिसकी सबसे पुरानी ज्ञात प्रति यूक्रेन (Ukraine) के एक गिरजाघर में रखी गई थी।
हिंदू, इस्लामी और पूर्वी रूढ़िवादी ईसाई लोककथाओं में शामिल होने के बाद, पंचतंत्र ने यहूदी लोककथाओं में जगह पाई। फिर, पश्चिमी यूरोप में भी 'फेबल्स ऑफ़ बिदपाई (Fables of Bidpai)’ के रूप में ये कहानियां लोकप्रिय हो गईं। भारत से पंचतंत्र न केवल पश्चिम विश्व, बल्कि पूर्व तक भी फैला। वहां मलय (Malay) भाषा में इसका संस्करण मिलता है। इसके अलावा, लाओस (Laos), कंबोडिया (Cambodia) और थाईलैंड (Thailand) में बौद्ध भिक्षुओं द्वारा पंचतंत्र की शुरुआत और इसकी कहानियों का अनुवाद किया गया था। ये संस्करण बौद्ध जातक कथाओं के साथ गहरी समानता दिखाते हैं।

क्या आप जानते हैं कि, अरब जगत में अब तक लिखी गई सबसे लोकप्रिय किताबों में से एक, कलीला वा-दिमना ही है। हमने ऊपर पढ़ा ही हैं कि, यह मूल रूप से संस्कृत में पंचतंत्र के रूप में, संभवतः कश्मीर में चौथी शताब्दी ईस्वी में लिखी गई थी। यह पुस्तक मुख्य रूप से कलीला और दिमना नामक दो गीदड़ों की कहानी पर आधारित है। दूसरी ओर, अनवर-ए सोहायली (Anvar-e-Sohayli) फ़ारसी भाषा में पंचतंत्र से संबंधित एक अन्य पुस्तक है। यह तिमुरिड (Timurid) गद्य-शैलीकार ओसायन वासे कासेफी (Ḥosayn Wāʿeẓ Kāšefī) द्वारा रचित दंतकथाओं का एक संग्रह है।पंचतंत्र ने निस्संदेह ही वैश्विक साहित्य पर अपनी छाप छोड़ी है। सदियों से ही, पंचतंत्र की दंतकथाएँ विभिन्न संस्कृतियों में फैली हुई हैं। ईसप की दंतकथाएँ (Aesop's Fables), द अरेबियन नाइट्स (The Arabian Nights) और विभिन्न यूरोपीय लोककथाओं जैसी दुनिया की कुछ सबसे प्रसिद्ध कहानियों के केंद्र में भी पंचतंत्र है। आज भी पंचतंत्र विकसित हो रहा है। इसकी दंतकथाओं को समकालीन बच्चों के साहित्य, डिजिटल प्लेटफॉर्म (Digital Platform), एनिमेटेड फिल्मों (Animated films), और इंटरैक्टिव डिजिटल अनुभवों (Interactive Digital experiences) में रूपांतरित किया जा रहा है।
संदर्भ
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