क्या आप पक्षियों के बिना दुनिया की कल्पना कर सकते हैं? पक्षी दुनिया के पारिस्थितिकी तंत्र के संचालन में एक आवश्यक भूमिका निभाते हैं, जो सीधे तौर पर मानव स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और भोजन उत्पादन के साथ-साथ, लाखों अन्य प्रजातियों को प्रभावित करती है। अतः पक्षियों द्वारा हमें मिलने वाले लाभ, केवल सांस्कृतिक नहीं हैं।
एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि पक्षी प्रति वर्ष 400-500 मिलियन (40 से 50 करोड़) टन कीड़े खाते हैं। इससे पर्यावरण में जैविक नियंत्रण प्राप्त होता है, क्योंकि कीड़ों की अधिक आबादी घातक हो सकती है।
जब परागणकों (Pollinators) की बात आती है, तो मधुमक्खियों और तितलियों के बारे में ही सोचते हैं। लेकिन, कुछ विशेष पक्षी भी परागणक होते हैं। हमने फूलों के आसपास कुछ पक्षियों को अवश्य देखा होगा! परागणकों के रूप में उनकी भूमिका हमें सीधे लाभ पहुंचाती है, क्योंकि भोजन या दवा के लिए मनुष्यों द्वारा उपयोग किए जाने वाले लगभग 5% पौधों का परागण पक्षियों द्वारा किया जाता है।
आकाश में मंडराते गिद्धों का दृश्य डरावना लग सकता है, लेकिन किसी जानवर की मृत्यु पर उनका आगमन अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे मृत जानवर पर भक्षण कर बीमारियों एवं जीवाणुओं के पनपने और फैलने से रोकते हैं। अपने जीवनकाल में, एक अकेला गिद्ध लगभग 11,600 अमेरिकी डॉलर मूल्य की अपशिष्ट निपटान सेवाएं प्रदान करता है।

जब पक्षी यात्रा करते हैं, तो वे उनके द्वारा खाए गए बीजों को अपनी बीट के माध्यम से अन्य जगहों पर फैलाते हैं। इससे पेड़ बढ़ते हैं। पक्षियों ने हमारे आसपास और पूरी दुनिया में दिखने वाले वनस्पति जीवन को आकार देने में मदद की है। पक्षी, पौधे और शाकाहारी जीव एवं शिकारी और शिकार के बीच नाजुक संतुलन बनाए रखते हैं।
कुछ समुद्री पक्षी, पोषक तत्वों के चक्रण और प्रवाल भित्तियों जैसे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को पनपने में मदद करते हैं। समुद्री पक्षी खुले समुद्र में भोजन की तलाश में सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा करते हैं। जब वे वापस लौटते हैं, तब अपने आवासों में बीट की परतें जमा करते हैं। यह बीट, समुद्र में रिसता है और प्रवाल भित्तियों जैसे आसपास के पारिस्थितिक तंत्र को उपजाऊ बनाता है।
भारत में पक्षियों की हजारों प्रजातियां हैं, जो हमारे पारिस्थितिक तंत्र को बनाए रखती हैं। हमारे मुंगेर जिले में भी ऐसे कई उपयुक्त एवं सुंदर पक्षी देखे जा सकते हैं। मुंगेर जिले में पाए जाने वाले प्रमुख पक्षी निम्नलिखित हैं -
1. मानव बस्तियों एवं आसपास पाए जाने वाले पक्षी

2. पेड़ों, बगीचों एवं खुले क्षेत्रों में पाए जाने वाले पक्षी
3. खेतों, घास के मैदानों एवं कृषि क्षेत्रों के पक्षी

4. तालाबों, झीलों एवं जल क्षेत्रों के पक्षी
5. शिकारी एवं रात्रिचर पक्षी
इन मुख्य पक्षियों के अलावा, हमारे मुंगेर जिले में एक दुर्लभ पक्षी भी देखा गया है। यह ग्रेटर एडजुटेंट स्टॉर्क (Leptoptilos dubius - गरुड़) है। इसे मुंगेर ज़िले में पहली बार देखा गया है और यह विश्व स्तर पर एक संकटग्रस्त पक्षी है। इनकी प्रजनन गतिविधि सितंबर माह में शुरू होती है। जबकि, जून से अगस्त महीनों के बीच इन्हें अपने भोजन की तलाश के दौरान देखा जा सकता है।
ग्रेटर एडजुटेंट को आईयूसीएन (IUCN) की ‘रेड लिस्ट (लाल सूची)’ में संकटग्रस्त (Endangered) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। भारत में यह केवल असम और बिहार राज्यों, तथा कंबोडिया (Combodia) में रहता है। हाल ही में मुंगेर के गंगा तट पर, लगभग 10 पक्षियों का एक परिवार देखा गया है।
ग्रेटर एडजुटेंट, 8 फीट के पंखों के फैलाव के साथ, 5 फीट की ऊंचाई तक बढ़ सकता है। यह भारत में शीर्ष पांच सबसे बड़े और सबसे भारी उड़ने वाले पक्षियों में से एक है। इनकी लंबी, मोटी व पीली चोंच, बिखरे हुए पंखों वाले पीले से गुलाबी रंग के सिर और गर्दन के आगे होती है। इन्हें एक लटकती हुई व फूलने वाली गले की थैली (Gular pouch) की उपस्थिति से पहचाना जाता है।
असम और बिहार के गांवों के स्थानीय निवासियों द्वारा, ग्रेटर एडजुटेंट की आबादी को बचाने के लिए 2009 से ही कई अभियान चलाए गए हैं। दावा है कि हाल ही में, भागलपुर और गंगा तथा कोसी के मैदानों के आसपास, मुंगेर ज़िले में ग्रेटर एडजुटेंट के लिए पर्याप्त घोंसला बनाने के स्थल बन गए हैं। उन्हें दलदल, झीलों के साथ-साथ शहर के पास शुष्क घास के मैदानों और खेतों के पास आसानी से देखा जा सकता है। वे अक्सर बूचड़खानों और मानव बस्तियों के पास कचरे के स्थलों से जुड़े होते हैं।
संदर्भ
1. https://tinyurl.com/4vjr4drd
2. https://tinyurl.com/57przu48
A. City Readerships (FB + App) - This is the total number of city-based unique readers who reached this specific post from the Prarang Hindi FB page and the Prarang App.
B. Website (Google + Direct) - This is the Total viewership of readers who reached this post directly through their browsers and via Google search.
C. Messaging Subscribers - This is the total viewership from City Portal subscribers who opted for hyperlocal daily messaging and received this post.
D. Total Viewership - This is the Sum of all our readers through FB+App, Website (Google+Direct), Email, WhatsApp, and Instagram who reached this Prarang post/page.
E. The Reach (Viewership) - The reach on the post is updated either on the 6th day from the day of posting or on the completion (Day 31 or 32) of one month from the day of posting.