बुरांश: हिमालय का लाल चमत्कारी फूल और सेहत का प्राकृतिक खजाना

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18-01-2026 09:02 AM

बुरांश एक अत्यंत खास और पारंपरिक हिमालयी फूल है, जो मुख्य रूप से उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में पाया जाता है। इसे स्थानीय भाषा में बुरांस या बुरांश कहा जाता है और वैज्ञानिक रूप से यह रोडोडेंड्रोन (Rhododendron) प्रजाति से संबंधित है। इसके चमकीले लाल और गुलाबी रंग के फूल न केवल देखने में आकर्षक होते हैं, बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर माने जाते हैं। सदियों से पहाड़ी समुदाय इस फूल का उपयोग स्वास्थ्यवर्धक पेय और पारंपरिक औषधियों के रूप में करता आ रहा है।

बुरांश के फूलों में प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidants), फ्लेवोनॉयड्स (flavonoids), क्वेरसेटिन (quercetin) और रुटिन (rutin) जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को कई तरह की बीमारियों से बचाने में सहायक माने जाते हैं। बुरांश का रस या स्क्वैश सूजन को कम करने, लीवर को स्वस्थ रखने और हृदय संबंधी समस्याओं में लाभकारी माना जाता है। यह जोड़ों के दर्द, गठिया, ब्रोंकाइटिस (bronchitis) और गाउट (gout) जैसी समस्याओं में भी राहत देने में मदद कर सकता है। इसके नियमित और संतुलित सेवन से इम्यून सिस्टम (immune system) को मजबूती मिलने की बात भी पारंपरिक ज्ञान में कही जाती है। आयुर्वेद और होम्योपैथी में बुरांश का उपयोग लंबे समय से किया जाता रहा है।

बुरांश का सबसे लोकप्रिय उपयोग इसके रस और स्क्वैश (squash) के रूप में होता है। पारंपरिक तरीके से इसके फूलों को पानी में उबालकर एक गाढ़ा अर्क तैयार किया जाता है, जिसे ठंडा कर पानी के साथ मिलाकर पिया जाता है। स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें शहद या सीमित मात्रा में प्राकृतिक मिठास मिलाई जाती है। गर्मियों में यह पेय शरीर को ठंडक देता है और थकान दूर करने में मदद करता है। कुल मिलाकर, बुरांश केवल एक सुंदर फूल नहीं है, बल्कि पहाड़ों की प्रकृति द्वारा दिया गया ऐसा उपहार है, जो स्वाद, सेहत और परंपरा - तीनों का अनोखा संगम प्रस्तुत करता है।

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