चौपाल से विश्व मंच तक: तेजन बाई की अद्भुत यात्रा

ध्वनि I - कंपन से संगीत तक
08-03-2026 09:07 AM
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तेजन बाई (जन्म 24 अप्रैल 1956) छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका हैं, जिन्हें महाभारत की कथाओं को लोक-शैली में प्रस्तुत करने के लिए विश्वभर में जाना जाता है। उनका जन्म दुर्ग ज़िले (वर्तमान बालोद क्षेत्र) के एक पारधी परिवार में हुआ था। बहुत कम आयु में ही उन्होंने अपने नाना से पंडवानी की शिक्षा ली और पारंपरिक सामाजिक सीमाओं के बावजूद मंच पर प्रस्तुति देना शुरू किया। उस समय पंडवानी की “कापालिक” शैली में महिलाओं का प्रदर्शन करना असामान्य माना जाता था, किंतु तेजन बाई ने अपनी प्रभावशाली आवाज़, दमदार अभिव्यक्ति और नाटकीय प्रस्तुति से इस परंपरा में स्त्री उपस्थिति को सशक्त रूप से स्थापित किया। उन्हें पद्मश्री (1988), पद्म भूषण (2003) और पद्म विभूषण (2019) सहित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।

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उल्लेखित वीडियो में उनकी वही ऊर्जावान और ओजपूर्ण प्रस्तुति दिखाई देती है, जिसमें गायन, अभिनय और कथा-वाचन का अद्भुत समन्वय है। एक हाथ में तंबूरा लेकर वे केवल महाभारत का वर्णन नहीं करतीं, बल्कि पात्रों को सजीव कर देती हैं। उनकी आवाज़ में ग्रामीण भारत की मिट्टी, लोक-संस्कृति और सामूहिक स्मृति की शक्ति झलकती है। तेजन बाई ने पंडवानी को गाँव की चौपाल से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचाया और यह सिद्ध किया कि लोक कला में नारी शक्ति उतनी ही प्रखर और प्रभावशाली हो सकती है। वे आज भी भारत की मौखिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की जीवंत प्रतीक मानी जाती हैं।

संदर्भ:

https://tinyurl.com/22ebx9kt 
https://tinyurl.com/mpwnxve3 



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