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जौनपुरवासियों, मिठास की बात हो और चॉकलेट का ज़िक्र न हो, ऐसा कैसे हो सकता है? गोमती नदी के किनारे बसी हमारी यह ऐतिहासिक नगरी जहाँ एक ओर इमली, आम और गन्ने की मिठास के लिए जानी जाती है, वहीं अब नई पीढ़ी के दिलों में चॉकलेट ने भी अपनी खास जगह बना ली है। बच्चों की जेब में टॉफी की जगह अब मिनी चॉकलेट्स हैं, और त्योहारों में परंपरागत मिठाइयों के साथ चॉकलेट गिफ्ट पैक्स भी शामिल हो गए हैं। स्कूलों, शादी-ब्याह या बाजार की चहल-पहल — हर मौके पर चॉकलेट ने हमारी ज़िंदगी में मिठास और आधुनिकता का नया स्वाद घोल दिया है।
पहले वीडियो में हम चॉकलेट बनने की प्रक्रिया को देखेंगे।
चलिए जानते हैं कि चॉकलेट कैसे बनाई जाती है-
1. कोको की खेती (Cacao Cultivation)
चॉकलेट की शुरुआत थियोब्रोमा कोको (Theobroma Cacao) नामक पेड़ की खेती से होती है, जो उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उगता है। इसके फलों को कोको पॉड्स (Cacao Pods) कहते हैं, जिनमें 30–50 तक बीज (Beans) होते हैं।
2. कटाई और बीज निकालना (Harvesting & Bean Extraction)
कोको पॉड्स को हाथ से तोड़ा जाता है ताकि पेड़ को नुकसान न पहुंचे। फिर पॉड्स को खोलकर बीज और सफेद गूदा (Pulp) निकाला जाता है।
3. किण्वन (Fermentation)
बीजों को लकड़ी के बक्सों में रखा जाता है और ऊपर केले के पत्ते ढके जाते हैं। इस प्रक्रिया में 5–8 दिन लगते हैं। यह स्वाद बढ़ाने और हानिकारक सूक्ष्मजीवों को नष्ट करने का कार्य करता है।
4. धूप में सुखाना (Drying)
फर्मेंटेशन के बाद बीजों में उच्च नमी होती है, जिसे हटाना ज़रूरी होता है। इन्हें धूप में सुखाया जाता है और नियमित रूप से पलटा जाता है। फिर इन्हें बोरे (Hessian Sacks) में भरकर एक्सपोर्ट के लिए तैयार किया जाता है।
5. भूनना (Roasting)
फैक्ट्री में सबसे पहले बीजों को साफ कर भुना जाता है। इससे न केवल स्वाद गहराता है बल्कि बैक्टीरिया (Bacteria) भी नष्ट होते हैं।
6. विनोइंग (Winnowing)
भुने हुए बीजों की बाहरी परत (Shell) को हटाया जाता है, जिससे सिर्फ कोको निब्स (Cocoa Nibs) बचते हैं। यह प्रक्रिया विनोइंग मशीन (Winnowing Machine) द्वारा की जाती है।
7. ग्राइंडिंग (Grinding into Chocolate Liquor)
निब्स को मेलांजर ग्राइंडर (Melangeur Grinder) में पीसकर कोको पेस्ट या लिकर (Chocolate Liquor) बनाया जाता है, जिसमें कोको सॉलिड्स (Cocoa Solids) और कोको बटर (Cocoa Butter) होते हैं। इसमें शक्कर (Sugar), दूध पाउडर (Milk Powder) और वनीला (Vanilla) जैसे स्वाद मिलाए जाते हैं।
8. टेम्परिंग (Tempering)
चॉकलेट को सही तापमान पर गर्म व ठंडा करके टेम्पर किया जाता है। यह प्रक्रिया क्रिस्टल संरचना (Crystal Structure) को स्थिर बनाती है, जिससे चॉकलेट चमकदार (Glossy), कड़क (Firm) और "स्नैप" वाली बनती है।
9. मोल्डिंग और पैकेजिंग (Molding & Packaging)
टेम्पर्ड चॉकलेट को मोल्ड्स (Molds) में डाला जाता है, बुलबुले (Air Bubbles) हटाने के लिए हिलाया जाता है, फिर ठोस होने के बाद इसे फॉयल या पेपर (Foil or Paper) में पैक किया जाता है।
नीचे दिए गए लिंक के ज़रिए हम देखेंगे कि चॉकलेट कैसे बनाई जाती है और इसे घर पर कैसे बनाया जा सकता है।
संदर्भ-
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