कागज़ के वैश्विक मानक आकार: इतिहास, विकास और ISO प्रणाली की दिलचस्प कहानी

अवधारणा I - मापन उपकरण (कागज़/घड़ी)
09-02-2026 09:23 AM
कागज़ के वैश्विक मानक आकार: इतिहास, विकास और ISO प्रणाली की दिलचस्प कहानी

201 ईसा पूर्व के आसपास, चीन (China) के हान राजवंश (Han Dynasty) के काल में काग़ज़ का आविष्कार हुआ, जिसके बाद इसका उपयोग धीरे-धीरे पूरी दुनिया में फैलता चला गया। आज काग़ज़ हमारे जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है और इसका प्रयोग लेखन, मुद्रण, पैकेजिंग, शिक्षा और प्रशासन जैसे अनेक क्षेत्रों में किया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि काग़ज़ अलग-अलग मानक आकारों में ही क्यों उपलब्ध होता है? दरअसल, अलग-अलग समय और देशों में काग़ज़ के कई मानक आकार प्रचलन में रहे हैं, परंतु वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आईएसओ (ISO) मानक को सबसे अधिक स्वीकार्यता प्राप्त है। इस लेख में हम काग़ज़ के इन्हीं मानकों को विस्तार से समझेंगे।

इतिहासकारों के अनुसार, भारत में काग़ज़ का निर्माण और उपयोग सबसे पहले सिंधु घाटी सभ्यता के दौरान हुआ। समय के साथ भारत में काग़ज़ का उत्पादन विभिन्न रूपों और आकारों में होने लगा। हालांकि, भारत में काग़ज़ बनाने का पहला संगठित कारख़ाना कश्मीर में सुल्तान जैनुल आबेदीन (1417–1467 ईसवी) के शासनकाल में स्थापित किया गया था। इसके बाद 1870 के आसपास कोलकाता के पास ‘बाली’ नामक स्थान पर हुगली नदी के तट पर प्राचीन तकनीक पर आधारित एक आधुनिक काग़ज़ मिल की स्थापना हुई। आगे चलकर देश के अन्य हिस्सों में भी काग़ज़ उद्योग का तेज़ी से विकास हुआ।

File:Paper size - US system.svg

विश्व भर में स्टेशनरी (Stationery), कार्ड और मुद्रित दस्तावेज़ों के लिए प्रयुक्त काग़ज़ की शीट्स अलग-अलग आकारों में मिलती हैं। इन मानक आकारों को आईएसओ मानक काग़ज़ आकार कहा जाता है। वर्ष 1975 में ‘अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन’ (International Organisation for Standardisation – ISO) द्वारा ‘आईएसओ 216’ मानक के अंतर्गत इन्हें औपचारिक रूप से अपनाया गया। ये मानक काग़ज़ की लंबाई और चौड़ाई के बीच एक निश्चित अनुपात पर आधारित होते हैं। इनमें सबसे अधिक प्रचलित आकार A4 है, जिसे अधिकांश कार्यालयी दस्तावेज़ों के लिए डिफ़ॉल्ट माना जाता है। A4 काग़ज़ का माप 210 मिमी × 297 मिमी होता है।

आईएसओ 216 मानक की नींव जर्मन डीआईएन 476 (German DIN 476) प्रणाली पर रखी गई थी। डीआईएन (Deutsches Institut für Normung) जर्मनी का राष्ट्रीय मानकीकरण संस्थान है, जिसका मुख्यालय बर्लिन (Berlin) में स्थित है। इस प्रणाली की खासियत यह है कि किसी भी आकार का काग़ज़ उसी श्रृंखला के अगले बड़े आकार के काग़ज़ के क्षेत्रफल का ठीक आधा होता है। सभी आईएसओ काग़ज़ आकार √2 : 1 (लगभग 1:1.414) के अनुपात पर आधारित होते हैं।

इस अनुपात को पूरी श्रृंखला में बनाए रखा जाता है, जिससे किसी दस्तावेज़ को छोटा या बड़ा करते समय उसका अनुपात नहीं बिगड़ता। A-श्रृंखला का मूल आकार A0 होता है, जिसका क्षेत्रफल ठीक 1 वर्ग मीटर होता है। मिलीमीटर में इसका माप 841 × 1189 मिमी (33.1 × 46.8 इंच) होता है। काग़ज़ के आकारों की कई श्रृंखलाएं होती हैं, जैसे A, B और C। A3, A4, A5, B4 और B5 जैसे आकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक रूप से उपयोग में लाए जाते हैं। ये आकार कैस्केडिंग स्टाइल शीट्स (Cascading Style Sheets – CSS) में भी शामिल हैं, जो HTML या XML में लिखे गए दस्तावेज़ों की प्रस्तुति को नियंत्रित करने के लिए प्रयुक्त होती हैं।

आईएसओ 216 मानक का उपयोग उत्तरी अमेरिका (North America) और लैटिन अमेरिका (Latin America) के कुछ हिस्सों को छोड़कर लगभग पूरी दुनिया में किया जाता है। उल्लेखनीय है कि उत्तरी अमेरिका में एक अलग ‘नॉर्थ अमेरिकन पेपर साइज’ प्रणाली प्रचलित है, जो मिलीमीटर के बजाय इंच पर आधारित होती है। इसके अतिरिक्त, आईएसओ 217 और आईएसओ 269 जैसे पूरक मानक भी हैं, जिनमें आईएसओ 269 की ‘C’ श्रृंखला को प्रायः A और B आकारों के साथ जोड़ा जाता है, खासकर लिफ़ाफ़ों के लिए।

क्या आप जानते हैं कि काग़ज़ के आकार का सबसे पहला दस्तावेजीकृत मानक वर्ष 1389 में इटली के बोलोना (Bologna, Italy) शहर में पत्थर पर अंकित किया गया था? इसमें चार मानक आकारों का उल्लेख मिलता है। A-श्रृंखला को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि किसी शीट को आधा काटने पर उसी अनुपात के दो छोटे आकार प्राप्त हो जाते हैं। गणितीय सूत्र √2 : 1 (लगभग 1.414 : 1) इस संरचना का आधार है।

A-श्रृंखला में A0 से लेकर A10 तक काग़ज़ के आकार उपलब्ध हैं, जिनमें A4 सबसे अधिक प्रचलित कार्यालयी आकार है। आईएसओ प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ यह है कि प्रत्येक आकार अपने पास के आकार से या तो दोगुना बड़ा होता है या आधा। उदाहरण के लिए, A4 काग़ज़ A5 से दोगुना और A3 का आधा होता है। इसके अलावा ‘लेटर’, ‘लीगल’, ‘लेजर’ और ‘टैब्लॉयड’ (Letter, Legal, Ledger, Tabloid) जैसे आकार भी आज तक दैनिक उपयोग में आम तौर पर देखे जाते रहे हैं, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां आईएसओ मानक पूरी तरह लागू नहीं है।

संदर्भ:
https://tinyurl.com/yc2d3zmc  
https://tinyurl.com/ey97kvw7 

Definitions of the Post Viewership Metrics

A. City Readerships (FB + App) - This is the total number of city-based unique readers who reached this specific post from the Prarang Hindi FB page and the Prarang App.

B. Website (Google + Direct) - This is the Total viewership of readers who reached this post directly through their browsers and via Google search.

C. Messaging Subscribers - This is the total viewership from City Portal subscribers who opted for hyperlocal daily messaging and received this post.

D. Total Viewership - This is the Sum of all our readers through FB+App, Website (Google+Direct), Email, WhatsApp, and Instagram who reached this Prarang post/page.

E. The Reach (Viewership) - The reach on the post is updated either on the 6th day from the day of posting or on the completion (Day 31 or 32) of one month from the day of posting.