जंगल ऊपर से जितने शांत और स्थिर दिखते हैं, ज़मीन के नीचे उनकी दुनिया उतनी ही रहस्यमयी और जीवंत होती है। एक स्वस्थ जंगल हर साल कई टन मृत लकड़ी, पत्तियां और जैविक कचरा उत्पन्न करता है। फिर भी, जंगल की ज़मीन कभी भी कचरे के ढेर में नहीं दबती। इसका कारण ज़मीन के नीचे काम करने वाले सूक्ष्मजीवों, मुख्य रूप से कवक और बैक्टीरिया का एक विशाल नेटवर्क है। जौनपुर और उसके आस-पास के क्षेत्रों में मौजूद वृक्षों के पारिस्थितिकी तंत्र को समझने के लिए, हमें ज़मीन के नीचे मौजूद इस जैविक इंजन को समझना होगा। मृत कार्बनिक पदार्थों का अपघटन वन पारिस्थितिकी तंत्र में कार्बन और नाइट्रोजन चक्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
वन पारिस्थितिकी तंत्र में गिरे हुए पत्तों और मृत लकड़ियों का क्या होता है?
जंगलों में मृत कार्बनिक पदार्थों में मोटे और महीन मृत लकड़ी और गिरे हुए पत्ते शामिल होते हैं। गिरे हुए पत्तों का कचरा वार्षिक पौधे के कचरे का 22 से 81 प्रतिशत तक हो सकता है। ठंडे और गर्म समशीतोष्ण वनों में पर्णपाती पेड़ों द्वारा हर साल 3 से 5 टन प्रति हेक्टेयर पत्तों का कचरा उत्पन्न होता है। यह कचरा मिट्टी के कटाव को रोकता है, बारिश की बूंदों से मिट्टी को बचाता है और सूक्ष्म जलवायु में होने वाले उतार-चढ़ाव से सुरक्षा प्रदान करता है।
कवक और बैक्टीरिया इस कचरे के मुख्य अपघटक हैं। कवक अपने विशिष्ट एंजाइमों (enzyme) और हाइफे (hyphae) के माध्यम से नए सबस्ट्रेट्स तक पहुंचने की क्षमता के कारण अपघटन में सबसे बड़ा योगदान देते हैं। अपघटन की यह प्रक्रिया वैश्विक स्तर पर हर साल 60 टेराग्राम कार्बन (60 Tg C) छोड़ती है, जो जीवाश्म ईंधन के जलने से निकलने वाले कार्बन से 11 गुना अधिक है। मृत लकड़ी भी वन मिट्टी के लिए पोषक तत्वों का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जो गिरे हुए पत्तों में नाइट्रोजन (N), फास्फोरस (P), पोटेशियम (K) और कैल्शियम (Ca) के वार्षिक इनपुट का 1 से 18 प्रतिशत योगदान देती है।
गिरे हुए पत्तों के भीतर मौजूद कार्बन कोशिका भित्ति के क्षरण के माध्यम से बाहर निकलता है। कोशिका भित्ति के घटकों को उनकी कठोरता के आधार पर तीन समूहों में बांटा जा सकता है: पानी में घुलनशील अणु, हेमीसेल्यूलोज (hemicellulose) व सेल्यूलोज (cellulose), और लिग्निन (lignin) व अन्य सुगंधित यौगिक। पानी में घुलनशील छोटे अणु जैसे अमीनो एसिड और शर्करा आसानी से सुलभ होते हैं और तेजी से बढ़ने वाले सूक्ष्मजीवों द्वारा विघटित कर दिए जाते हैं। अतीत में बैक्टीरिया की भूमिका को अक्सर नजरअंदाज किया गया था, क्योंकि यह माना जाता था कि वे लकड़ी के पॉलिमर को नष्ट करने में सीमित क्षमता रखते हैं। हालांकि, हाल के वर्षों में यह सिद्ध हुआ है कि बैक्टीरिया भी लिग्निन को विघटित करने में सक्षम हैं। कचरे में नाइट्रोजन की मात्रा अपघटकों द्वारा अपने चयापचय (metabolic) आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बाहरी नाइट्रोजन के अवशोषण से भी प्रभावित होती है।
जंगल के पेड़ ज़मीन के नीचे फंगल माइसीलियम के ज़रिए कैसे संवाद करते हैं?
पेड़ केवल निष्क्रिय पौधे नहीं हैं, बल्कि वे कवक के एक भूमिगत नेटवर्क के माध्यम से संवाद करते हैं, जिसे माइकोराइजल नेटवर्क (Mycorrhizal networks) कहा जाता है। इन जटिल प्रणालियों में माइसीलियम (Mycelium) नामक छोटे धागे होते हैं जो पेड़ों की जड़ों के साथ जुड़ जाते हैं। यह कवक नेटवर्क एक सूचना राजमार्ग के रूप में कार्य करता है, जो पेड़ों को संसाधनों और महत्वपूर्ण सूचनाओं को साझा करने की अनुमति देता है। इस अद्भुत संचार नेटवर्क को उचित ही "वुड-वाइड वेब" (wood-wide web) का नाम दिया गया है।

अपघटक कवक गिरे हुए पत्तों, शाखाओं और यहां तक कि पूरे पेड़ के तनों को तोड़कर पोषक तत्वों को वापस मिट्टी में छोड़ते हैं। पेड़ों और कवक ने एक असाधारण विनिमय प्रणाली विकसित की है। पेड़ प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) के माध्यम से उत्पन्न होने वाली शर्करा (sugars) का 20 प्रतिशत तक अपने फंगल भागीदारों के साथ साझा करते हैं। बदले में, कवक अपने धागों को मिट्टी में फैलाते हैं, जिससे वे मिट्टी के उस आयतन (volume) का पता लगा सकते हैं जो पेड़ों की जड़ों की तुलना में सैकड़ों गुना बड़ा होता है। ये कवक फास्फोरस और नाइट्रोजन जैसे आवश्यक पोषक तत्व निकालकर पेड़ों को देते हैं।
जब किसी पेड़ को किसी बीमारी या शिकारी जीव से खतरा होता है, तो वह माइकोराइजल नेटवर्क या हवा के माध्यम से रासायनिक संकेत (chemical signals) छोड़ सकता है। उदाहरण के लिए, जब एक जिराफ अकैसिया (Acacia) के पत्तों को खाना शुरू करता है, तो पेड़ चोट का पता लगाता है और एथिलीन गैस (ethylene gas) के रूप में एक संकट संकेत छोड़ता है। पड़ोसी अकैसिया पेड़ इसके जवाब में अपने पत्तों में टैनिन (tannins) पंप करते हैं, जिससे उनका स्वाद खराब हो जाता है और जिराफ उन्हें खाने से बचते हैं।
मातृ वृक्ष पूरे जंगल को एक साथ कैसे जोड़े रखते हैं?
जंगल में सबसे बड़े और सबसे पुराने पेड़ों को मातृ वृक्ष या मातृ पेड़ (Mother trees) कहा जाता है। ये मातृ वृक्ष इस संचार प्रणाली के केंद्र में होते हैं, जो आसपास की वनस्पतियों और जीवों का पोषण करते हैं। ये प्राचीन रक्षक अपने विशाल जड़ प्रणालियों के माध्यम से पोषक तत्वों और सूचनाओं के हस्तांतरण की सुविधा प्रदान करते हैं, जिससे छोटे पेड़ों को पनपने में मदद मिलती है। ये मातृ पेड़ कीटों या बीमारियों जैसे आने वाले खतरों के बारे में पड़ोसी पौधों को चेतावनी भी देते हैं।

अनुसंधान बताता है कि अधिक मातृ वृक्षों वाले वनों में अधिक जैव विविधता होती है और वे पर्यावरणीय तनावों के प्रति अधिक लचीले होते हैं। जब किसी मातृ वृक्ष को काट दिया जाता है या हटा दिया जाता है, तो स्थापित जड़ प्रणाली गायब हो जाती है, जिससे पोषक तत्वों का साझाकरण और संचार बाधित हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप पड़ोसी पेड़ों को महत्वपूर्ण संसाधनों और सुरक्षात्मक संकेतों से वंचित होना पड़ता है, जिससे पूरे वन पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बिगड़ जाता है।
कवक और पेड़ों की यह साझेदारी जलवायु परिवर्तन और बीमारियों से कैसे बचाती है?
कवक और पेड़ों की यह साझेदारी वनों को सूखे और जलवायु परिवर्तन (climate change) से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। फंगल नेटवर्क से जुड़े युवा पेड़ों की जीवित रहने की दर उन पेड़ों की तुलना में काफी बेहतर होती है जो इस नेटवर्क से नहीं जुड़े होते। सूखे के दौरान, कवक पेड़ों को मिट्टी की गहरी परतों से पानी तक पहुंचने में मदद करते हैं। भूमध्यसागरीय (Mediterranean) वनों में किए गए हालिया अध्ययनों से पता चलता है कि अत्यधिक सूखे की घटनाओं के दौरान माइकोराइजल नेटवर्क (mycorrhizal network) से जुड़े पेड़ों में जीवित रहने की दर अलग-थलग पेड़ों की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत अधिक थी।
कवक पेड़ों को प्राकृतिक सुरक्षा भी प्रदान करते हैं, एंटीबायोटिक्स (antibiotics) का उत्पादन करते हैं और पेड़ों को मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (immune response) विकसित करने में मदद करते हैं। लू या अत्यधिक गर्मी (heat waves) के दौरान, कवक नेटवर्क से जुड़े पेड़ बेहतर जल पहुंच के माध्यम से अपनी पत्तियों के तापमान को अधिक स्थिर बनाए रखते हैं। ठंडी परिस्थितियों में, कवक एंटीफ्रीज यौगिकों (antifreeze compounds) का उत्पादन करके जड़ों को जमने से होने वाले नुकसान से बचाते हैं। इसके अलावा, यह साझेदारी कार्बन भंडारण (carbon storage) का भी समर्थन करती है। कवक मिट्टी में कार्बन को सीधे ग्लोमालिन (Glomalin) जैसे यौगिकों के माध्यम से जमा करते हैं। यह चिपचिपा प्रोटीन मिट्टी में कार्बन को दशकों या सदियों तक बंद रख सकता है। कवक मिट्टी की संरचना में सुधार करते हैं, जिससे मिट्टी के कण एक साथ बंधते हैं, जल प्रतिधारण (water retention) बढ़ता है और कटाव कम होता है।
वनों की कटाई या क्लियर-कटिंग (clear-cutting) उन फंगल समुदायों को नष्ट कर देती है जो शायद सदियों से विकसित हुए हों। इसलिए, वनों की बहाली (forest restoration) के लिए स्थानीय मिट्टी का उपयोग करना, परिपक्व पेड़ों की रक्षा करना और शीर्ष मिट्टी (topsoil) को संरक्षित करना आवश्यक है। समशीतोष्ण और बोरियल वनों में आमतौर पर एक्टोमाइकोराइजल कवक (ectomycorrhizal fungi) पाए जाते हैं, जो जड़ के सिरों के चारों ओर एक सुरक्षात्मक आवरण बनाते हैं। दूसरी ओर, उष्णकटिबंधीय वनों में अर्बस्कुलर माइकोराइजल कवक (arbuscular mycorrhizal fungi) आम हैं, जो सीधे जड़ कोशिकाओं में प्रवेश करते हैं। पेड़ों और कवक के इस प्राचीन और गहरे संबंध को समझकर ही हम एक ऐसा भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं जिसमें जौनपुर और पूरी दुनिया के जंगल स्वस्थ, लचीले और आत्मनिर्भर बने रहें।
संदर्भ
1. https://tinyurl.com/2dc7jwow
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