जौनपुर में दीपावली का त्योहार बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। लोग अपने घरों में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश जी की पूजा-अर्चना कर हर्षोल्लास के साथ दीपोत्सव मनाते हैं। त्योहार के इस खास अवसर पर लोग रंग-बिरंगे पटाखे जलाकर आतिशबाज़ी का आनंद लेते हैं। घरों को सुंदर रंग-बिरंगी लाइटों, दीयों और मोमबत्तियों से सजाया जाता है। लोग नए-नए वस्त्र धारण कर, पूरे विधि-विधान से लक्ष्मी-गणेश का पूजन करते हुए खुशी-खुशी दीपावली का उत्सव मनाते हैं।
हालाँकि, पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सरकार लोगों को पहले ही सचेत करना चाहती है और जागरूकता फैलाने का प्रयास करती है, ताकि लोग बहुत अधिक पटाखें ना जलाएँ। किंतु इन चेतावनियों के बावजूद भी, लोग बहुत आतिशबाजी करते हैं, जिससे प्रदूषण स्तर बढ़ता है।
भारत के कोने-कोने में दीपावली का एक अलग ही रंग देखने को मिलता है, लेकिन हमारे शहर जौनपुर की दिवाली की अपनी एक विशिष्ट पहचान है। यहाँ, यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित न रहकर, सामाजिक एकता का प्रतीक बन जाता है। इस सामाजिक सौहार्द की मिसाल तब और गहरी हो जाती है, जब मुस्लिम महिलाएँ भी दीपावली की तैयारियों में बढ़-चढ़कर भाग लेती हैं। 'उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन' से जुड़ी आत्मनिर्भर महिलाओं ने, ऐसे इको-फ्रेंडली (पर्यावरण-अनुकूल) दीपक तैयार किए हैं, जो बिना तेल के, केवल मोम की मदद से लगभग 45 मिनट तक प्रज्वलित रहते हैं। इन दीपकों को बनाने की प्रक्रिया बेहद दक्षतापूर्ण है, जिन्हें छह अलग-अलग चरणों से गुज़ारकर तैयार किया जाता है। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देती है, बल्कि स्थानीय महिलाओं की आत्मनिर्भरता और प्रतिभा का भी एक जीवंत उदाहरण है। यह अनोखा प्रयास दर्शाता है कि जौनपुर में दीपावली केवल रोशनी का पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक सद्भाव का एक अद्भुत प्रतीक है।
केवल भारत ही नहीं, बल्कि दिवाली का त्योहार अब पूरे विश्व में मनाया जा रहा है। उदाहरण के लिए, कनाडा (Canada) में भी दीपावली के त्योहार की पूरी चमक-धमक देखने को मिलती है। चमचमाते दीयों और रंग-बिरंगी रंगोलियों से लेकर स्वादिष्ट पकवानों का स्वाद चखने, दोस्तों-रिश्तेदारों से मिलने और नाचने-गाने तक, जश्न का हर रंग यहाँ मौजूद है।

सामान्यतः, कनाडा में व्यक्तिगत आयोजनों के अतिरिक्त दीपावली का उत्सव विश्वविद्यालयों के छात्र संगठनों, सांस्कृतिक समूहों या मंदिरों जैसे विभिन्न सामुदायिक संस्थाओं द्वारा आयोजित किया जाता है। इसके अलावा, नगर निगमों के सहयोग से सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जो प्रायः शहर के मुख्य केंद्रों में होते हैं। इन कार्यक्रमों में संगीत, नृत्य, पारंपरिक भारतीय व्यंजनों के मेले, बाज़ार और आतिशबाजी का भव्य दृश्य देखने को मिलता है। यहाँ आयोजित होने वाले कुछ मुख्य दिवाली कार्यक्रम निम्नलिखित हैं:
1. 'ग्लोबल आर्ट्स, कल्चर एंड हेरिटेज फाउंडेशन (Global Arts, Culture and Heritage Foundation)' का आयोजन
'ग्लोबल आर्ट्स, कल्चर एंड हेरिटेज फाउंडेशन' द्वारा आयोजित "फेस्टिवल ऑफ लाइट्स (Festival of Lights)" एक वार्षिक कार्यक्रम है। दावा किया जाता है कि यह उत्तरी अमेरिका का सबसे बड़ा दीपावली उत्सव है। टोरंटो (Toronto) के 'नेथन फिलिप्स स्क्वायर' में आयोजित होने वाले इस उत्सव में दीपावली की अनेक प्रस्तुतियाँ देखने को मिलती हैं। इनमें आतिशबाजी, संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियाँ तथा 100 से अधिक स्थानीय विक्रेताओं वाला एक विशाल बाज़ार शामिल है। इस कार्यक्रम में प्रवेश पूरी तरह से निःशुल्क है।
2. दिवाली धमाका
'ड्रीम मीडिया एजेंसी (Dream Media Agency)’ और 'कॉकटेल इंटरनेशनल ग्रुप इंक. (Cocktail International Group Inc.)' की मेजबानी में होने वाला ‘दिवाली धमाका' का आयोजन मिसिसॉगा (Mississauga) के 'कैपिटल बैंक्वेट सेंटर' में होता है। यह कार्यक्रम भी निःशुल्क है और इसमें पूरे परिवार के मनोरंजन की समुचित व्यवस्था है। इसमें बच्चों के लिए चेहरा चित्रकारी, नृत्य, संगीत, मेहंदी और दीपावली बाज़ार शामिल हैं। कार्यक्रम के दौरान आगंतुकों के लिए कई आकर्षक उपहार, सर्वश्रेष्ठ परिधान पुरस्कार और रैफल ड्रॉ (Raffle opportunities) के अवसर भी रखे जाते हैं।
3. 'नॉर्थ यॉर्क दिवाली फेस्ट (North York Diwali Fest)'
'नॉर्थ यॉर्क दीवाली फेस्ट' का आयोजन 'मोक्ष कनाडा फाउंडेशन' द्वारा 'मेल लास्टमैन स्क्वायर' में किया जाता है। इस उत्सव में भोजन, संगीत प्रस्तुतियों और दीपावली खरीदारी मेलों के साथ-साथ हस्तकला और कला कार्यशालाओं का विशेष आकर्षण होता है, जहाँ आने वाले लोग स्वयं सजावटी वस्तुएँ बनाना सीख सकते हैं। इसके अलावा, कार्यक्रम में एक रंगोली प्रतियोगिता भी आयोजित की जाती है और इसमें प्रवेश पूर्णतः निःशुल्क होता है।
4. वैंकूवर (Vancouver) में दीपावली का जश्न
कनाडा में सर्वाधिक भारतीय आबादी वाले शहरों में से एक होने के कारण, वैंकूवर और उसके आसपास दीपावली के ढेरों कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इनमें से एक प्रमुख और स्थायी आकर्षण 'दीवाली फेस्ट' है। 'दीवाली फेस्ट' का आयोजन 'दीवाली सेलिब्रेशन सोसाइटी' द्वारा प्रतिवर्ष किया जाता है। इसके अंतर्गत वैंकूवर और सरे शहर में कई स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इन कार्यक्रमों के शुल्क और आकर्षण अलग-अलग होते हैं।
5. ब्रिटिश कोलंबिया (British Columbia) में दीपावली मनाने का एक अनोखा अनुभव, यहाँ की बोट (नाव) पार्टियाँ हैं, जो शहर के तटीय इलाके में स्थित होने के कारण संभव हो पाती हैं। इन नौका समारोहों का आयोजन 'वैंकूवर बोट पार्टीज' द्वारा किया जाता है।
6. वैंकूवर और टोरंटो की तुलना में मॉन्ट्रियल (Montreal) में भले ही भारतीय समुदाय की आबादी थोड़ी कम हो, किंतु फिर भी यहाँ दिवाली का त्योहार मनाने वालों के लिए दीपावली के सुंदर आयोजन किए जाते हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प कार्यक्रम 'पियरफॉन्ड्स पब्लिक लाइब्रेरी (Pierrefonds Public Library)' द्वारा आयोजित 'कैंडल मेकिंग वर्कशॉप' (मोमबत्ती बनाने की कार्यशाला) है। यह आयोजन लोगों को दीये बनाने, उन्हें सजाने और दीपावली के दौरान उनके धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व को गहराई से समझने का अवसर प्रदान करता है। इस कार्यक्रम में भी प्रवेश निःशुल्क है।
कनाडा के अलावा, अमेरिका में भी बीते कुछ वर्षों में दीपावली के जश्न का दायरा काफी बढ़ा है। अब यह रोशनी का पर्व कैलिफोर्निया (California) के 'डिज्नीलैंड' और न्यूयॉर्क (New York) के 'टाइम्स स्क्वायर' जैसे प्रसिद्ध स्थलों पर भी धूमधाम से मनाया जाने लगा है।
अब न्यूयॉर्क के विद्यालयों में भी दीपावली की छुट्टी रहेगी। जबकि अमेरिका में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों के लिए दीपावली मनाने का अर्थ अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़े रहना है। अपनी जड़ों से जुड़े रहने के इन्हीं प्रयासों ने अब अमेरिकी नागरिकों और वहाँ रहने वाले अन्य देशों के लोगों को भी भारतीय संस्कृति को अपनाने और इसमें घुलने-मिलने के लिए प्रेरित किया है। भारतीय छात्र, इस त्योहार की रौनक बनाए रखने के लिए अपने छोटे-छोटे समूह और समुदाय बनाते हैं, जिनमें अमेरिकी नागरिक भी बड़े उत्साह से सम्मिलित होते हैं।
यद्यपि यह त्योहार मुख्य रूप से अमेरिका के विभिन्न हिस्सों में बसे भारतीय समुदायों के बीच ही मनाया जाता है, तथापि बीते कुछ वर्षों में अमेरिकी लोग भी इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेने लगे हैं। यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान और जुड़ाव वास्तव में बेहद सुखद है।
अमेरिका के विभिन्न विश्वविद्यालयों में भारत से आए कम से कम 1 लाख छात्र अध्ययनरत हैं। 'ड्यूक', 'प्रिंस्टन', 'हार्वर्ड', 'रटगर्स' और अन्य कई विश्वविद्यालय परिसरों में दीपावली का आयोजन न केवल भारतीय छात्रों को अपनी परंपराओं से जोड़े रखने का एक माध्यम है, बल्कि यह अमेरिकी छात्रों को अन्य संस्कृतियों को जानने और समझने का अवसर भी प्रदान करता है।
अमेरिका में दीपावली पारंपरिक भारतीय रीति-रिवाजों और स्थानीय संस्कृति के सुंदर सम्मिश्रण के साथ मनाई जाती है। इसका स्वरूप इस बात पर निर्भर करता है कि संबंधित क्षेत्र में भारतीय समुदाय की आबादी कितनी है। घनी भारतीय आबादी वाले बड़े शहरों में, भारतीय लोग मिलकर ऐसे सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं जो सभी के लिए खुले होते हैं। इनमें अक्सर विभिन्न पृष्ठभूमि के लोग और अमेरिकी नागरिक शामिल होते हैं। वहीं, कुछ छोटे शहरों में, जहाँ भारतीयों की संख्या कम है, आयोजन अधिक समुदाय-केंद्रित होते हैं।

दीये जलाने, पारंपरिक पोशाक पहनने और साथ मिलकर भोजन करने जैसी मूल परंपराएँ आज भी यथावत बनी हुई हैं, भले ही यहाँ उत्सव का दायरा और सार्वजनिक प्रदर्शन भारत की तुलना में थोड़ा छोटा हो। हालाँकि स्थानीय नियमों के कारण वहाँ पटाखों के उपयोग पर प्रतिबंध रहता है।
संदर्भ
1. https://tinyurl.com/5afbzmyv
2. https://tinyurl.com/ya5j988m
3. https://tinyurl.com/2hdv5yfc
4. https://tinyurl.com/2x3f79ju
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