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लखनऊवासियों, जब आप सुबह घर की बालकनी में रखे गमलों में खिले चमकीले फूलों को देखते हैं, या सफ़ेद बारादरी, अम्बेडकर पार्क और गोमती रिवरफ्रंट के सजे-संवरे बागानों में रंगों की फुहारों जैसी फूलों की कतारों को निहारते हैं, क्या कभी मन में यह सवाल उठा है कि आखिर ये फूल इतने अद्भुत रंग कहाँ से लाते हैं? हमारी तहज़ीब की नफ़ासत, चिकनकारी की बारीक कढ़ाई और शहर की रौनक की तरह ही प्रकृति का यह रंग-लोक भी उतना ही गहरा, नाज़ुक और रहस्यमय है। हर गुलाब की लालिमा, हर गेंदा की चमक, हर लैवेंडर (lavender) की सौंधी बैंगनी छटा - इन सबके पीछे एक वैज्ञानिक कथा छिपी होती है, जो उतनी ही अद्भुत है जितनी इन फूलों की खूबसूरती।
आज के इस लेख में हम समझेंगे कि फूलों के रंग कैसे बनते हैं। इसमें प्रकाश और तरंगदैर्ध्य की भूमिका, फूलों में पाए जाने वाले प्रमुख वर्णकों जैसे फ्लेवोनॉइड्स, कैरोटीनॉयड्स, टैनिन और क्लोरोफिल का योगदान, तथा कुछ फूलों का संरचना के कारण रंगीन या सफ़ेद दिखना शामिल है। साथ ही, हम यह भी जानेंगे कि ये रंग परागण और पौधों के अस्तित्व में क्यों महत्वपूर्ण होते हैं।
फूलों के रंग कैसे बनते हैं?
फूलों में दिखाई देने वाले रंग मूलतः उनके पंखुड़ियों में मौजूद वर्णक अणुओं और प्रकाश की परस्पर क्रिया का परिणाम होते हैं। जब सूर्य का प्रकाश फूल पर पड़ता है, तो वर्णक कुछ विशेष तरंगदैर्ध्यों को अवशोषित कर लेते हैं और बाकी तरंगदैर्ध्यों को वापस परावर्तित करते हैं। यही परावर्तित तरंगदैर्ध्य हमारी आँखों को रंग के रूप में दिखाई देते हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी फूल के वर्णक नीली तरंगों को छोड़कर बाकी सभी तरंगों को अवशोषित कर लें, तो वह हमें नीला दिखाई देगा। सरल संरचना वाले फूलों में आमतौर पर एक ही प्रमुख वर्णक होता है, जिससे वे एक ही रंग में दिखते हैं। लेकिन जटिल बनावट वाले फूलों में वर्णकों का मिश्रण, परतों और कोशिकीय संरचनाओं का विविध खेल उन्हें बहुरंगी, गहरे या चमकदार बना देता है। विभिन्न वर्णकों का संयोजन - कभी-कभी थोड़ी मात्रा में भी - एक अनोखा और दुर्लभ रंग उत्पन्न कर सकता है, जो फूलों की सुंदरता को और विशेष बनाता है।

फूलों के प्रमुख वर्णक परिवार और उनकी रंग–निर्माण भूमिका
(a) फ्लेवोनोइड्स (Flavonoids) — एंथोसायनिन (Anthoxanthin) व एंथोक्सैन्थिन (Anthocyanin) के रंग
फ्लेवोनॉइड्स फूलों के रंग निर्माण का सबसे बड़ा और सबसे विविध वर्णक परिवार है। एंथोसायनिन वर्णक लाल, गुलाबी, नीले और बैंगनी रंगों को उत्पन्न करता है - जैसे गुलाब, लिली, डेल्फ़ीनियम (Delphinium) और जेरेनियम (Geranium)। एंथोक्सैन्थिन दूसरी ओर पीले और सफ़ेद रंगों के लिए जिम्मेदार होता है, जैसा कि आप डैफ़ोडिल या गेंदा में देखते हैं। ये दोनों ही कोशिका रस में घुलनशील होते हैं और फूलों की ऊपरी परतों में फैलकर रंग प्रदान करते हैं। यही वर्णक शरद ऋतु में पत्तियों के रंग बदलने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि क्लोरोफिल के कम होने पर फ्लेवोनॉइड्स का रंग अधिक उभर जाता है।
(b) कैरोटीनॉयड (Carotenoids) — चमकीले पीले और नारंगी रंग
कैरोटीनॉयड्स वे वर्णक हैं जो सूरजमुखी, गेंदा, कैलिफ़ोर्निया पोस्ता और गेंदे जैसे फूलों में चमकीले पीले-नारंगी रंग पैदा करते हैं। ये वर्णक क्लोरोप्लास्ट (Chloroplast) और क्रोमोप्लास्ट (Chromoplast) नामक संरचनाओं में पाए जाते हैं और प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही, कैरोटीनॉयड्स पत्तियों और फूलों को अत्यधिक धूप से होने वाली क्षति से भी बचाते हैं। उनके मजबूत रंग और स्थिरता उन्हें विशेष रूप से आकर्षक और कीड़ों के लिए आसानी से पहचानने योग्य बनाती है।
(c) टैनिन (Tannin), बीटालेन (Betalains) और क्लोरोफिल (Chlorophyll) — अन्य विशेष रंग
टैनिन फूलों में भूरे, गहरे, काले या धूमिल रंगों का निर्माण करते हैं, जो कुछ विशेष पौधों में ही पाए जाते हैं। बेटुलिन (Betulin) और बेटालाइन (Betalain) मुख्यतः कैक्टस (cactus) और कुछ विशेष प्रजाति के फूलों में पाए जाते हैं, और ये चमकीले बैंगनी, गहरे लाल या मैजेंटा रंग उत्पन्न करते हैं। क्लोरोफिल हरे रंग का सार्वभौमिक वर्णक है, जो हालांकि फूलों की पंखुड़ियों में बहुत कम मात्रा में होता है, लेकिन पत्तियों में इसकी उपस्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है। दिलचस्प बात यह है कि निषेचन के बाद जब फूल बूढ़ा होने लगता है, तो इन वर्णकों का टूटना शुरू हो जाता है, जिससे रंग फीके पड़ते जाते हैं।

संरचनात्मक रंग: जब रंग वर्णकों से नहीं, फूल की संरचना से बनते हैं
कुछ फूलों में दिखाई देने वाला रंग केवल वर्णक की वजह से नहीं होता, बल्कि उनकी पंखुड़ियों की सूक्ष्म संरचनाएं और हवा की जेबें प्रकाश के साथ मिलकर रंग उत्पन्न करती हैं। जैसे कि अधिकतर शुद्ध सफेद फूलों में कोई सफेद वर्णक नहीं होता - वे अपनी पंखुड़ियों के ऊतकों के बीच मौजूद हवा के रिक्त स्थानों के कारण सभी तरंगदैर्ध्यों को परावर्तित करते हैं, जिससे वे चमकदार सफेद दिखाई देते हैं। बटरकप (Buttercup) का चमकीला, चमकदार पीला रंग उसकी पंखुड़ियों में मौजूद तीन परतों द्वारा उत्पन्न प्रकाश-परावर्तन की विशेष गतिकी से बनता है। इसके अलावा, धूप, बारिश, मिट्टी की नमी, तापमान और हवा जैसे बाहरी कारक भी इस संरचनात्मक रंग को गहराई से प्रभावित कर सकते हैं, जिससे फूलों का वास्तविक रंग मौसम के साथ बदलता हुआ प्रतीत होता है।
फूलों के रंग का पौधे के अस्तित्व और प्रजनन में महत्व
फूलों के चमकीले रंग केवल सौंदर्य के लिए नहीं होते - वे पौधों के प्रजनन तंत्र की सबसे महत्वपूर्ण रणनीति हैं। फूल अपने रंगों के माध्यम से मधुमक्खियों, तितलियों, हमिंगबर्ड्स (hummingbird), चमगादड़ों और अन्य परागणकर्ताओं को आकर्षित करते हैं। हर प्रजाति की पसंद अलग होती है - जैसे मधुमक्खियाँ पराबैंगनी (UV) रंग देख सकती हैं, जबकि हम नहीं देख सकते। पक्षी लाल, नारंगी और गुलाबी फूलों की ओर आकर्षित होते हैं; चमगादड़ हल्के, सुगंधित और रात में खिलने वाले फूलों की ओर। फूलों के चमकीले रंग परागणकर्ताओं को संकेत देते हैं कि कहाँ अमृत (nectar) और पराग उपलब्ध है, जिन्हें वैज्ञानिक भाषा में नेक्टर गाइड्स (Nectar Guides) कहा जाता है। ये संकेत पौधों के अस्तित्व, प्रजनन और पूरी पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता के लिए आवश्यक हैं।

पुष्प वर्णकों के वैज्ञानिक, औद्योगिक और कृषि संबंधी उपयोग
फूलों के वर्णक केवल प्राकृतिक रंगों का स्रोत नहीं हैं, बल्कि विज्ञान, उद्योग और कृषि में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं। वैज्ञानिक फूलों के रंगों के लिए जिम्मेदार जीनों में संशोधन करके नई प्रजातियाँ विकसित कर सकते हैं, जिनमें दुर्लभ या बिल्कुल नए रंग संयोजन होते हैं - जैसे नीला गुलाब, जिसे आनुवंशिक तकनीक से बनाया गया था। खाद्य उद्योग में एंथोसायनिन और कैरोटीनॉयड जैसे प्राकृतिक रंगद्रव्य सुरक्षित, पौध-आधारित विकल्प के रूप में उपयोग किए जाते हैं। सौंदर्य प्रसाधनों और दवाओं में भी फूलों के रंगद्रव्य महत्वपूर्ण घटक हैं। कृषि और बागवानी में फूलों के वर्णकों का अध्ययन प्रजातियों की पहचान, गुणवत्ता सुधार, रोग प्रतिरोध और बेहतर परागण दक्षता के लिए अत्यंत उपयोगी है।
दुनिया के सबसे सुंदर और रंगीन फूल: प्रकृति की उत्कृष्ट कृतियाँ
दुनिया में कुछ फूल अपने-अपने हिस्से,रंग,बनावट और दुर्लभता के कारण विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। व्हाइट इग्रेट आर्किड (White Egret Orchid) अपने घोड़े को फैला हुआ सफेद पक्षी जैसा दिखता है, जो प्रकृति की अद्भुत कलाकारी का उदाहरण है। पवित्र कमल की किचड़ से पानी की सतह पर खिलता है और पवित्रता और आध्यात्मिकता का प्रतीक माना जाता है। पोम्पोन डाहलिया (Pompon Dahlia) की बहु-भाग वाली जनवरी 2019 की जादुई रचनाएँ हैं। कैला लिली (Calla Lily) अपना एकल, घूमावदार फिनलुडी की देशी के लिए दुनिया भर में पसंद की जाती है। लैवेंडर के विशाल जंगली खेत अपनी सुगंध और दृश्य आकर्षण दोनों के लिए प्रसिद्ध हैं। फ्यूशिया (Fuchsia) के गुलाबी-बैंगनी फूल बेहद महंगे और अनोखे होते हैं। और सैफरॉन क्रोकस (saffron crocus) न केवल सुंदर होता है बल्कि इसके अंदर मौजूद केसर दुनिया का सबसे महंगा मसाला भी प्रदान करता है।
संदर्भ
https://tinyurl.com/4vdyb643
https://tinyurl.com/yc75tyex
https://tinyurl.com/53rmhcd4
https://tinyurl.com/yh5wk54j
https://tinyurl.com/mvanrvne
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