सर्दी–जुकाम में इस्तेमाल होने वाला विक्स वेपोरब: उत्पत्ति और लोकप्रियता की कहानी

विचार II - दर्शन/गणित/चिकित्सा
14-01-2026 09:18 AM
सर्दी–जुकाम में इस्तेमाल होने वाला विक्स वेपोरब: उत्पत्ति और लोकप्रियता की कहानी

आज सर्दी-जुकाम, खांसी या सीने में जकड़न जैसी आम परेशानियों में लोग कई तरह के घरेलू और औषधीय मरहमों का सहारा लेते हैं। इन्हीं में से एक नाम विक्स वेपोरब (Vicks Vaporub) भी है, जो समय के साथ बहुत-से घरों में जाना-पहचाना हो गया। हालाँकि आज इसका प्रयोग सामान्य लगता है, लेकिन इसकी शुरुआत एक साधारण औषधीय प्रयोग के रूप में हुई थी। उन्नीसवीं शताब्दी में बने ऐसे मरहम धीरे-धीरे लोगों की दिनचर्या में शामिल होते गए, जहाँ अनुभव, आदत और उपलब्धता ने उनकी पहचान बनाई। इस तरह विक्स जैसे उत्पाद केवल दवाएँ नहीं रहे, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि किस तरह कुछ औषधीय उपाय समय के साथ समाज के घरेलू स्वास्थ्य व्यवहार का हिस्सा बन जाते हैं—बिना किसी अतिरंजना या प्रचार के।
आज के इस लेख में हम सबसे पहले, हम इसके नामकरण से जुड़ी दिलचस्प कहानी जानेंगे, फिर इसके आविष्कार में इस्तेमाल हुए औषधीय तत्वों और इसके वैज्ञानिक तरीके से काम करने की प्रक्रिया पर नज़र डालेंगे। इसके बाद, हम देखेंगे कि 1918 की फ्लू (Flu) महामारी ने कैसे इस छोटे से मरहम को दुनिया भर में मशहूर कर दिया। फिर बात करेंगे कि भारत में यह उत्पाद कैसे आया और समझेंगे कि इसके स्मार्ट मार्केटिंग तरीकों ने इसे हर घर की जरूरत कैसे बना दिया। अंत में, हम उन घरेलू उपयोगों पर भी चर्चा करेंगे, जिन्हें लोग आज भी अपनाते हैं, भले ही वे आधिकारिक रूप से सुझाए न गए हों।

विक्स वेपोरब का उद्गम और नामकरण की रोचक कहानी
विक्स वेपोरब के निर्माता लंसफोर्ड रिचर्डसन (Lunsford Richardson) एक प्रतिभाशाली अमेरिकी फार्मासिस्ट थे, जो अपने ग्राहकों को सर्दी और सीने की भारीपन जैसी परेशानियों से तुरंत राहत दिलाने वाली दवा बनाना चाहते थे। उन्होंने शुरुआत में एक मरहम बनाया और उसे लंबा-चौड़ा नाम दिया—
“रिचर्डसन’स क्रूप एंड न्यूमोनिया क्योर साल्व (Richardson’s Croup and Pneumonia Cure Salve)”
हालांकि यह नाम दवा की उपयोगिता तो बताता था, लेकिन न बोलने में आसान था, न याद रखने में, और न ही छोटे डिब्बे पर फिट आने लायक। इसलिए रिचर्डसन ने नाम बदलकर “विक्स” (Vicks) कर दिया। इस नाम को लेकर दो कहानियाँ हैं—
पहली कहानी कहती है कि उन्होंने यह नाम अपने बहनोई डॉ. जोशुआ विक (Dr. Joshua Vick) के सम्मान में रखा, जिनकी सलाह ने अक्सर उन्हें प्रेरित किया। दूसरी कहानी कहती है कि उन्हें अपने अध्ययन में मिली एक वंशावली सूची में विक सीड कंपनी (Vick Seed Company) का नाम पसंद आया। दोनों ही कथाएँ बताती हैं कि “विक्स” नाम को चुनने में सरलता, आकर्षक ध्वनि और याद रखने की क्षमता सबसे बड़े कारण थे। यह वही नाम है जिसने आगे चलकर वैश्विक पहचान हासिल की।

विक्स वेपोरब का आविष्कार और उसके औषधीय तत्व
विक्स वेपोरब की लोकप्रियता का वास्तविक रहस्य इसके सही-संतुलित अवयवों के मिश्रण में छिपा है। लंसफोर्ड रिचर्डसन ने 1875 में एक ऐसा मरहम तैयार किया जिसमें प्राकृतिक सुगंध, औषधीय तत्व और त्वचा पर आसानी से फैलने वाला आधार शामिल था।

इसके मुख्य घटक हैं—

  • मेन्थॉल (Menthol), जो गहरी ठंडक देकर तुरंत राहत देता है,
  • कपूर, जो सूजन कम करता है और सांस लेने में सहायक है,
  • नीलगिरी का तेल, जो वायुमार्ग खोलता है,
  • थाइमोल (Thymol), एक शक्तिशाली जीवाणुरोधी तत्व,
  • और पेट्रोलियम जेली (Petroleum Jelly), जो सभी तत्वों को एक साथ बांधकर त्वचा में समाने का माध्यम बनती है।

जब इसे सीने या पीठ पर लगाया जाता है, तो शरीर की गर्मी से मेन्थॉल और कपूर वाष्पित होने लगते हैं और तुरंत राहत का अनुभव करवाते हैं। यह प्रक्रिया जिसे “हॉट पॉल्टिस इफेक्ट” (Hot Poultice Effect) भी कहा जाता है, रक्त परिसंचरण बढ़ाती है, जमाव को ढीला करती है और मांसपेशियों को आराम पहुचाती है। यही संयुक्त प्रभाव इसे हर मौसम में भरोसेमंद बनाता है।

मेन्थॉल और विक्स की वैज्ञानिक कार्यप्रणाली
मेन्थॉल एक मोनोटेरपेनॉइड (monoterpenoid) यौगिक है, जो पुदीना तेल से प्राप्त होता है और अपने ताजगीभरे, ठंडक पैदा करने वाले गुणों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। लेकिन यह ठंडक केवल सतही एहसास नहीं है - मेन्थॉल वास्तव में त्वचा और श्वसन तंत्र के रिसेप्टर्स पर असर डालता है। मेन्थॉल शरीर में दो बड़े वैज्ञानिक प्रभाव पैदा करता है:
एनाल्जेसिक (Analgesic) प्रभाव - जो दर्द कम करता है,
सूजनरोधी (Anti-inflammatory) प्रभाव - जो सूजन कम करता है।
जब मेन्थॉल की भाप नाक तक पहुँचती है, तो यह नाक के तंत्रिका रिसेप्टर्स (Nerve receptors) को उत्तेजित करती है, जिससे नाक खुली महसूस होती है, साँस लेना आसान हो जाता है और खांसी भी कम होती है। यानी, विक्स सिर्फ एक मरहम नहीं - यह एक पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया है जो शरीर को वास्तविक (physiological) और मानसिक (psychological) दोनों तरह की राहत प्रदान करती है।

विक्स का वैश्विक विस्तार और 1918 महामारी में लोकप्रियता
विक्स वेपोरब एक साधारण फार्मेसी में शुरू हुआ उत्पाद था, लेकिन 1894 के बाद इसकी बिक्री लगातार बढ़ने लगी। हालांकि इसकी वास्तविक वैश्विक पहचान 1918 में आई-जब दुनिया एक विनाशकारी स्पैनिश फ्लू महामारी से जूझ रही थी। उस समय सांस लेने में कठिनाई, बुखार और खांसी प्रमुख लक्षण थे - और लोग राहत की तलाश में थे। ऐसे में विक्स वेपोरब एक विश्वसनीय उपाय के रूप में उभरा। महामारी के दौरान इसकी बिक्री कई गुना बढ़ गई, और यह अमेरिका के घरों में एक आवश्यक दवा बन गया। इस तेज़ी से बढ़ती लोकप्रियता ने कंपनी को वैश्विक विस्तार की ओर प्रेरित किया। बाद में यह प्रॉक्टर एंड गैम्बल (Procter & Gamble) जैसी विश्व-प्रसिद्ध कंपनी का हिस्सा बन गया और 50 से अधिक देशों में उपलब्ध होने लगा। आज विक्स विश्वभर में भावनात्मक रूप से भी जुड़ा हुआ ब्रांड है - क्योंकि हर पीढ़ी ने अपने बचपन में इसे किसी न किसी रूप में इस्तेमाल किया है।

भारत में विक्स की एंट्री और मार्केटिंग रणनीति
1964 में जब रिचर्डसन हिंदुस्तान लिमिटेड (Richardson Hindustan Limited) के माध्यम से यह भारतीय बाजार में आया, तब इसकी सफलता सुनिश्चित नहीं थी। लेकिन भारत की जलवायु - गर्मियाँ, नमी, मानसून और सर्दियाँ - सर्दी-जुकाम के लिए अनुकूल मानी जाती हैं। यही वजह थी कि विक्स के लिए भारत आदर्श बाजार साबित हुआ।

कंपनी की मार्केटिंग रणनीति ने इसे घर-घर तक पहुंचाने में बड़ा योगदान दिया - 

  • बिक्री अधिकारी देशभर में घूमते और लोगों से सीधे मिलकर प्रोडक्ट समझाते थे,
  • दुकानों और घरों में जाकर उत्पाद का व्यवहारिक इस्तेमाल दिखाया जाता था,
  • और सबसे लोकप्रिय सलाह - गरम पानी में विक्स डालकर भाप लेना - एक गुजरात की गृहिणी से सीखी गई और विज्ञापन का हिस्सा बनी।

धीरे-धीरे विक्स भारतीय संस्कृति का हिस्सा बन गया-इतना कि आज भी बच्चे इसे सर्दी-जुकाम का पहला उपाय मानते हैं।

विक्स के अनौपचारिक उपयोग: उपभोक्ताओं के अनुभव
विक्स की लोकप्रियता का एक और कारण है इसके "अनौपचारिक घरेलू उपयोग," जिन पर उपयोगकर्ता वर्षों से भरोसा करते आए हैं। हालाँकि कंपनी की ओर से इन दावों का औपचारिक समर्थन नहीं है, लेकिन लोग विक्स को कई अलग-अलग तरीकों से उपयोग करते हैं:

  • पैर में फंगल इंफेक्शन (fungal infection) पर
  • तलवों पर लगाकर खांसी रोकने के लिए
  • डैंड्रफ (dandruff) कम करने में
  • फटे होंठों को ठीक करने में
  • मच्छर काटने पर तुरंत राहत के लिए
  • मस्से को सूखाने में

ये उपयोग घरेलू अनुभवों पर आधारित हैं और भारतीय परिवारों में पीढ़ियों से चलते आ रहे हैं।

संदर्भ
https://tinyurl.com/tbmyjykn 
https://tinyurl.com/5y4a2rfz 
https://tinyurl.com/7p95dzav 
https://tinyurl.com/38tn6yfn 
https://tinyurl.com/y3szjuzn 
https://tinyurl.com/4hr64u3m 

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