प्लास्टिक के विकल्प के रूप में नए रोज़गार का मौका

शहरीकरण - नगर/ऊर्जा
07-06-2018 01:32 PM
प्लास्टिक के विकल्प के रूप में नए रोज़गार का मौका

अभी हाल ही में 5 जून को पर्यावरण दिवस मनाया गया। यह दिवस प्रत्येक वर्ष इसी दिन मनाया जाता है जिसमें सब पर्यावरण को स्वच्छ और साफ़ रखने की बात करते हैं। परन्तु यदि इस पर गौर किया जाए तो क्या सच में हम वातावरण को सुरक्षित रख रहे हैं? वर्तमान काल में लखनऊ समेत विश्व का हर शहर, गावं, क़स्बा आदि एक ऐसी वस्तु से पीड़ित है जिसका प्रयोग सभी धड़ल्ले से करते हैं लेकिन जो हमारे वातावरण के लिए एक ज़हर से कम नहीं है। यह वस्तु है प्लास्टिक की थैली, स्ट्रॉ, व अन्य इससे जुड़े सामान। प्लास्टिक एक ऐसा पदार्थ है जो कि सैकड़ों साल तक मिट्टी में मिलती नहीं है और इस कारण पर्यावरण पर एक अत्यंत खतरनाक प्रभाव पड़ता है।

इन्हीं प्लास्टिक के कचरे में पड़े होने के कारण कई जानवर इनका सेवन कर लेते हैं जिससे उनकी मृत्यु भी हो जाती है। प्लास्टिक का मिट्टी में मिल जाने से मिट्टी की उर्वरकता पर भी फर्क पड़ता है। कूड़ों के ढेर में यदि देखा जाए तो अन्य किसी प्रकार के कूड़े जल्द ख़त्म हो जाते हैं परन्तु प्लास्टिक नहीं ख़त्म होता जिससे गन्दगी बरकरार रहती है। यही प्लास्टिक नदियों, तालाबों, नालों और नहरों आदि में हवा से या किसी अन्य कारण से चले जाता है जिससे जलीय जीवन पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। अभी हाल ही में एक व्हेल मछली समुद्र तट पर मरी पड़ी मिली जिसके पेट से सैकड़ों प्लास्टिक की थैलियाँ आदि की प्राप्ति हुयी जो इस बात की संगीनता की तरफ ध्यान आकर्षित करती है।

तमाम परेशानियां होने के बाद यह सवाल उठता है कि आखिर इससे बचने के अन्य उपाय क्या हैं? अभी हाल ही में मुंबई में प्लास्टिक पर पूर्ण रूप से प्रतिबन्ध लगाया गया, मुंबई ही नहीं बल्कि विश्व के कई सथानों पर प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबन्ध है। प्लास्टिक से निजात पाने के कई साधन उपलब्ध हैं जैसे कि कपड़े के थैलों का प्रयोग और सस्ते कागज़ के बने थैलों का प्रयोग करना। मुंबई समेत बैंगलोर में विभिन्न एन.जी.ओ. द्वारा सस्ते कागज़ के थैलों का निर्माण किया जा रहा है। ये थैले प्रयोग करने में मजबूत व जल्द ख़त्म होने वाले होते हैं जिससे पर्यावरण पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। साथ ही ये रोज़गार को भी बढ़ावा दे सकते हैं। लखनऊ में भी ऐसे कागज़ के थैलों का प्रयोग करके आने वाली पर्यावरणीय दिक्कतों से निजात पाया जा सकता है। ऐसे उपक्रमों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है जो कि पर्यावरण को सुरक्षित बनाने का कार्य करें। गोंद में भी प्लास्टिक गोंद से अच्छा विकल्प है आटे आदि की बनी लेई का प्रयोग करना, जो अत्यंत कारगर साबित हो सकता है तथा इससे इन थैलों का निर्माण कोई भी अपने घर पर कर सकता है। इन सभी बिन्दुओं से पर्यावरण में होने वाली दिक्कतों से बचा जा सकता है।

1. http://www.freepressjournal.in/weekend/paper-bags/267593
2. https://myplasticfreelife.com/2012/10/want-plastic-free-glue-make-homemade-wheat-paste/

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