विश्व के कई देशों में ब्रांड के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है अवध का नाम

औपनिवेशिक काल और विश्व युद्ध : 1780 ई. से 1947 ई.
01-04-2020 04:45 PM
विश्व के कई देशों में ब्रांड के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है अवध का नाम

हिंदी भाषा के ऐसे कई अनेक शब्द हैं, जिन्हें अंग्रेजी में एक अलग रूप से पढ़ा या लिखा जाता है। इसका एक सामान्य उदाहरण अवध है, जिसके लिए अंग्रेज़ों ने ‘उध’ या ‘औद’ (Oude) शब्द का इस्तेमाल किया। 18वीं शताब्दी से यूरोप (Europe), अमेरिका (America) और अरब में यह शब्द एक रहस्यमय छवि पेश कर रहा है। कई इत्र बेचने वाली विभिन्न कंपनियां (Companies), होटल (Hotels), रेस्तरां आदि इस शब्द को अपने ब्रांड (Brand) के नाम के रूप में उपयोग करते हैं। उस समय कई वाइनों (Wines), इत्रों, और सॉस (Sauce) के संग्रहों पर इस नाम का लेबल (Label) लगा दिखायी दिया। इस नाम से एक प्रसिद्ध सॉस ‘द किंग ऑफ औद्स फेवरेट सॉस’ (The King of Oude's favourite Sauce) भी बनाया गया जिसका नाम शायद ही आज किसी को याद हो। एक सॉस कंपनी ‘क्रॉस एंड ब्लैकवेल’ (Crosse & Blackwell) लंदन (London), जो 1706 से सॉस का निर्माण कर रही थी, ने अपने सॉस के लिए इस नाम को चुना तथा 1825 में इस नाम को एक प्रसिद्ध ब्रांड बनाया। ऐसा माना जाता है कि, इस ब्रांड का यह नाम तब चुना गया जब अवध के नवाब अमजद अली खान ने इंग्लैंड (England) की यात्रा की। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि, इस नाम को उन्हें श्रद्धांजलि देने से अधिक, उनका मज़ाक बनाने के लिए रखा गया था। नवाब अमजद अली खान की सॉस, 1842 में इंग्लैंड में ‘द किंग ऑफ औद्स फेवरेट सॉस’ से पहले बनी थी। इस सॉस को संभवतः मिर्च, जीरा, हल्दी, लहसुन, अदरक, धनिया जैसे मसालों से बनाया गया था। इंग्लैंड की कार्टून कॉमिक बुक (Cartoon Comic Book) पंच (Punch), 1842 और फिगारो (Figaro), 1836 में इस लोकप्रिय सॉस के मज़ेदार विवरण भी मिलते हैं।

पंच के अनुसार- अवध के राजा ने आखिरकार इस जीवन को त्याग दिया है। हमारे अधिकांश पाठक सॉस के संदर्भ में ‘अवध के राजा’ नाम से परिचित होंगे, जिसे लगातार विज्ञापित किया जा रहा है। अवध के राजा ने अपनी विशाल क्षमताओं को एक सॉस के निर्माण के लिए समर्पित किया। राजा को यह संतुष्टि थी कि उसने एक ऐसे मिश्रण का आविष्कार किया है, जिसके लिए उसका नाम दूर-दूर तक जाना जायेगा। एक क्रांतिकारी आत्मा ने अवध के राजस्व को जब्त कर लिया था तथा राजा के पास कुछ नहीं बचा। इस कमी को पूरा करने का काम उसके तेज़ दिमाग ने किया तथा परिणामस्वरूप सॉस का निर्माण हुआ। क्योंकि राजा के बाद गद्दी पर उसके उत्तराधिकारी का आधिकार था इसलिए इस सॉस पर उसके उत्तराधिकारी का भी अधिकार हुआ। इस रहस्यमयी आविष्कार की मूल उत्पत्ति के पीछे कई किस्से गढ़े गए हैं। कुछ तो इतने आगे निकल गये कि उन्होंने यह कहा कि नवाब प्रजा की सॉस नहीं खा सकते थे इसलिए उन्होंने खुद की सॉस का अविष्कार किया। हालांकि ये कहानियाँ कितनी भी सच्ची या झूठी हों, यह सॉस सबसे अधिक लाभदायक होने के साथ-साथ उन सभी प्रसिद्ध चीज़ों में से एक थी, जिसे अवध के राजा ने अपने उत्तराधिकारियों के लिए छोड़ दिया था।

फिगारो (Figaro), 1836 में भी इस तरह का एक विवरण मिलता है, जो इस प्रकार है:
यदि किसी देश का कोई सम्राट या राजा अपना अधिकांश समय किसी अन्य देश या क्षेत्र में बिताता है, तो यह स्वभाविक होना चाहिए कि, उसका अपने क्षेत्र पर प्रभाव कम हो अर्थात वहां के लोग उसके कम आभारी हों या फिर उसका अपने क्षेत्र पर कोई प्रभाव ही न हो। इस स्थिति पर अवध के राजा पूरी तरह से खरे उतरते हैं, जोकि कई वर्षों से अंग्रेजी महानगर के एक शहर में एक युवक की भांति रह रहे हैं तथा अभी भिन्न प्रांतों का दौरा करने में व्यस्त हैं। नवाब बहुत बुद्धिमान है और हो भी क्यों न, आखिर वह विदेश से लौटा है। उसकी बुद्धिमानी का एक परिणाम जिससे हम परिचित हैं, वह उसके द्वारा बनाया गया सॉस है, जिसे उसने सामान्य रीडिंग सॉस (Reading Sauce) बनाने के विचार को चोरी करके बनाया। यह सॉस उसने जोन्स (Jones's) के संशोधित मशरूम कैचअप (Mushroom Ketchup) तथा हार्वी (Harvey) के विचारों की अभद्रता से चोरी करके निर्मित किया। यदि इस सॉस के बल पर राजा अपने आप को एक उच्च बुद्धिजीवी के रूप में मानता है तो कोई भी व्यक्ति एक सामान्य चर्चा में हार्वी तथा राजा के सॉस दोनों में से हार्वी को ही चुनेगा या उसका पक्ष लेगा। हाल ही में हुई एक घोषणा के अनुसार उसके मंत्रियों ने राजा के बुद्धिमान होने की अवधारण को अमान्य कर दिया क्यों कि उन्हें यह संदेह था, कि राजा अपने सॉस को लेकर ब्रिटिश सरकार के साथ बहुत उदार है। यदि वह बुद्धिमान होता तो अपने सॉस के बारे में ब्रिटिश सरकार को न बताता। पत्रकारों ने अवध के राजा को सबसे अधिक उल्लेखनीय व्यक्ति बताया जिसका कारण हाल ही में उत्तर के कारखानों में किया गया उसका दौरा था। कई अवसरों पर उसने अपने प्रेक्षणों के द्वारा अपनी बुद्धिमानी का परिचय दिया। यह केवल एकमात्र अवलोकन है, हमारी राय में इस तरह का दावा पूरी तरह से गलत है। हमने शाही जन्म के ऐसे कई लोगों के बारे में सुना है, जो वास्तव में ठगी परिवार से संबंधित होते हैं। इससे पहले कि हम इन पर भरोसा करें, हमें इन अवारा या घुमक्कड़ राजाओं, राजकुमारों और राजकुमारियों के चरित्र को बारीकी से देख लेना चाहिए। हमें गंदे प्रिंट के कपड़े पहने तथा सस्ता छाता लिए हुए एक गरीब पागल बुढ़िया याद है, जो स्वयं को रोम की रानी कहती थी तथा ट्रेडमिल (Treadmill) पर मारी गयी। हमें आश्चर्य नहीं होगा यदि इस अवध के आवारा नवाब को भी अंत में कोल्डबाथ फ़ील्ड्स (Coldbath Field) के जेल में डलवा दिया जाये तो।

संदर्भ:
1. https://bit.ly/33Udrbi
2. https://bit.ly/2xCFzUb
3. https://bit.ly/2UP2RhA
4.https://www.periodpaper.com/products/1913-ad-crosse-blackwell-chef-majesty-king-george-logo-original-advertising-085160-gh3-028
5.https://www.gracesguide.co.uk/Crosse_and_Blackwell
6.https://lucknow.prarang.in/posts/1958/oud-oil-more-expensive-than-gold
चित्र सन्दर्भ:
1. https://www.gracesguide.co.uk/Crosse_and_Blackwell
2. https://www.periodpaper.com/products/1913-ad-crosse-blackwell-chef-majesty-king-george-logo-original-advertising-085160-gh3-028

Definitions of the Post Viewership Metrics

A. City Readerships (FB + App) - This is the total number of city-based unique readers who reached this specific post from the Prarang Hindi FB page and the Prarang App.

B. Website (Google + Direct) - This is the Total viewership of readers who reached this post directly through their browsers and via Google search.

C. Messaging Subscribers - This is the total viewership from City Portal subscribers who opted for hyperlocal daily messaging and received this post.

D. Total Viewership - This is the Sum of all our readers through FB+App, Website (Google+Direct), Email, WhatsApp, and Instagram who reached this Prarang post/page.

E. The Reach (Viewership) - The reach on the post is updated either on the 6th day from the day of posting or on the completion (Day 31 or 32) of one month from the day of posting.