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सर्दियों की शुरुआत के साथ ही मेरठ के आसपास स्थित प्राकृतिक क्षेत्रों में प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो जाता है। इसी क्रम में, हस्तिनापुर वन्यजीव अभयारण्य के अंतर्गत, बिजनौर में गंगा बैराज के पास स्थित हैदरपुर आर्द्रभूमि (Haiderpur Wetland) हर वर्ष हज़ारों प्रवासी पक्षियों की मेज़बानी करती है। ये पक्षी मध्य एशिया और यूरोप की लंबी यात्रा कर यहां पहुंचते हैं, जहां वे सर्दियों के दौरान प्रजनन करते हैं और मार्च की शुरुआत में वापस लौट जाते हैं। ऐसी ही महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों के संरक्षण और उनके पारिस्थितिक महत्व को रेखांकित करने के उद्देश्य से हर वर्ष विश्व आर्द्रभूमि दिवस (World Wetlands Day) मनाया जाता है, जो 2 फ़रवरी को मनाया जाता है। हैदरपुर आर्द्रभूमि एक यूनेस्को रामसर साइट (UNESCO Ramsar Site) है और इसे देश की सबसे बड़ी मानव निर्मित आर्द्रभूमियों में से एक माना जाता है। इसका निर्माण वर्ष 1984 में मध्य गंगा बैराज के बनने के बाद हुआ था। यह आर्द्रभूमि लगभग 6,908 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है, जहां गंगा और उसकी सहायक नदी सोलानी से जल की आपूर्ति होती है।
अभी हाल ही में, जनवरी 2026 में, भारत में कच्छ (गुजरात) के छारी-ढांड (Chhari-Dhand) और एटा (उत्तर प्रदेश) के पटना बर्ड सैंक्चुअरी (Patna Bird Sanctuary) को रामसर साइट का दर्जा मिला है, जिससे भारत में कुल रामसर साइटों (Ramsar Sites) की संख्या 98 हो गई है। इन वेटलैंड्स में कई प्रवासी और स्थानीय पक्षियों के साथ चिंगारा (Chinkara), भेड़िया (Wolf), कैराकल (Caracal), डेजर्ट कैट (Desert Cat) और डेजर्ट फॉक्स (Desert Fox) जैसे वन्यजीव पाए जाते हैं 2014 से अब तक भारत में रामसर साइटों (Ramsar Sites) की संख्या 26 से बढ़कर 98 हो गई है।
हैदरपुर वेटलैंड को जैव विविधता का एक समृद्ध केंद्र माना जाता है। यहां पक्षियों की 300 से अधिक प्रजातियां, मछलियों की 40 से अधिक और 10 से अधिक स्तनधारी प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से कई विश्व स्तर पर संकटग्रस्त हैं। यहां आम तौर पर तीतर, बटेर, मोर, कबूतर, बाज़, सारस, चील, उल्लू, सफेद गिद्ध, कोयल और बुलबुल देखे जाते हैं। इसके अलावा किंगफिशर (Kingfisher), मैना, रेड-वेंटेड बुलबुल (Red-vented Bulbul), गौरैया और बया बुनकर (Baya Weaver) भी यहां बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। आर्द्रभूमि और आसपास के अभयारण्य क्षेत्रों में तेंदुए, जंगली बिल्लियां, बंदर, लोमड़ी, भेड़िये, नीलगाय, सियार, नेवले, हनी बेजर, बारासिंघा, जंगली सूअर, खरगोश, कस्तूरी और चमगादड़ जैसे स्तनधारी भी देखे जा सकते हैं। वहीं मॉनिटर छिपकली, अजगर, भारतीय कोबरा, क्रेट और वाइपर जैसे सरीसृप भी यहां प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके साथ ही, यह आर्द्रभूमि गंभीर रूप से लुप्तप्राय घड़ियाल (गेवियलिस गैंगेटिकस (Gavialis Gangeticus)) और कई संकटग्रस्त उभयचर प्रजातियों का भी महत्वपूर्ण आवास है।

यह विविध पारिस्थितिकी तंत्र विश्व स्तर पर 15 से अधिक संकटग्रस्त प्रजातियों को संरक्षण प्रदान करता है, जिनमें हॉग हिरण (Endangered Hog Deer), ब्लैक-बेलीड टर्न (Black-bellied Tern), स्टेपी ईगल (Steppe Eagle), इंडियन स्कीमर और गोल्डन महासीर (Indian Skimmer and Golden Mahseer) जैसी प्रजातियां शामिल हैं। हैदरपुर वेटलैंड 25,000 से अधिक जलपक्षियों को आश्रय प्रदान करता है। ग्रेलैग और बार-हेडेड गीज़ (Greylag and Bar-headed Geese) की वैश्विक आबादी का एक प्रतिशत से अधिक हिस्सा इसी क्षेत्र में पाया जाता है। हालांकि शुरुआती दिनों में पक्षियों की संख्या कम रहती है, लेकिन साल के अंत तक इनकी संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो जाती है। वन विभाग के अधिकारी उन जल निकायों पर विशेष निगरानी रख रहे हैं, जहां पक्षी घोंसले बनाते हैं और भोजन करते हैं।

बिजनौर ज़िले में गंगा और उसकी सहायक नदियों के साथ-साथ झीलें, तालाब और दलदली आर्द्रभूमियां मौजूद हैं, जो इसे विभिन्न पक्षी प्रजातियों के लिए आदर्श आवास बनाती हैं। बिजनौर के पूर्व जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने नदियों और झीलों के आसपास रहने वाले किसानों से अपने खेतों में कीटनाशकों के उपयोग से बचने की अपील की थी, ताकि पक्षियों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जा सके। वन अधिकारियों ने अवैध शिकार की किसी भी गतिविधि पर रोक लगाने के लिए तटीय क्षेत्रों में मुखबिरों की तैनाती भी की है। हालांकि, एक गंभीर चिंता यह है कि प्रवासी पक्षियों के आगमन से पहले ही कई दलदली क्षेत्र सूख चुके हैं। पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार, स्थानीय कृषि गतिविधियों के कारण आर्द्रभूमियों में जल स्तर घटा है, जिससे आशंका है कि प्रवासी पक्षी किसी वैकल्पिक निवास स्थान की ओर रुख कर सकते हैं।

पिछले वर्ष यहां लगभग 20,000 पक्षी दर्ज किए गए थे, लेकिन यदि इस वर्ष आर्द्रभूमि में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हुआ, तो इनकी संख्या प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आवश्यकता पड़ने पर प्रबंधकों द्वारा आर्द्रभूमि में मैन्युअल (Manual) रूप से पानी भरा जा सकता है। मेरठ के निकट हस्तिनापुर क्षेत्र में स्थित आर्द्रभूमियों का लगभग पूरा क्षेत्र निजी किसानों के स्वामित्व में है, जहां उन्हें खेती करने का अधिकार प्राप्त है। ऐसे में बेहतर संरक्षण के लिए सरकार द्वारा निजी भूमि के अधिग्रहण जैसे कदम उठाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
पूरे भारत में पक्षियों की संख्या में लगातार गिरावट एक गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। अगस्त 2023 में स्टेट ऑफ इंडियन बर्ड्स (State of Indian Birds) द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, देश की लगभग 60 प्रतिशत पक्षी प्रजातियों की संख्या में दीर्घकालिक गिरावट दर्ज की गई है, जबकि 40 प्रतिशत प्रजातियों में हाल के वर्षों में तेज़ गिरावट देखी गई है। वर्तमान में 178 पक्षी प्रजातियों को “उच्च संरक्षण प्राथमिकता” की श्रेणी में रखा गया है। विशेष रूप से खुले पारिस्थितिक तंत्रों में रहने वाली और लंबी दूरी तक प्रवास करने वाली प्रजातियों की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो आने वाले समय के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
संदर्भ
https://tinyurl.com/3j5sze7x
https://tinyurl.com/2f5w8nhb
https://tinyurl.com/2fw4m727
https://tinyurl.com/27m489ey
https://tinyurl.com/bde5y57y
https://tinyurl.com/39swfd37
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