कैसे पौधों की खुशबू, परागणकों को आकर्षित कर, उनके जीवन चक्र को आगे बढ़ाती है?

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11-02-2026 09:24 AM
कैसे पौधों की खुशबू, परागणकों को आकर्षित कर, उनके जीवन चक्र को आगे बढ़ाती है?

विभिन्न पौधों के लिए, उनकी विशिष्ट ‘गंध’ संचार का एक महत्वपूर्ण रूप होती है। यह गंध वाष्पशील कार्बनिक या जैविक यौगिकों (Organic compound) का एक रूप होती है, जो जटिल रसायनों का एक संयोजन है। यह परागणकों को आकर्षित करने और कुछ स्थितियों में शिकारियों को दूर करने के लिए, आसानी से वाष्पित हो जाते हैं और हवा में फैलते हैं। यह गंध पौधों द्वारा वायुमंडल में उत्सर्जित, कम आणविक भार यौगिकों (Molecular weight compounds) का भी एक जटिल मिश्रण हो सकती है। सरल शब्दों में, पौधे परागणकों को लुभाने या कीटों को दूर रखने के लिए, गंध पैदा करते हैं। और हम मनुष्य इस परिदृश्य में एक गवाह बन जाते हैं।
पौधों द्वारा गंध पैदा करना, यह वास्तव में उनकी एक रणनीति का हिस्सा है, जो पौधों को उनके प्रजनन में मदद करती है। पौधे बीज पैदा करने के लिए, फूलते हैं जो आगे चलकर नए पौधे बनते हैं। एक व्यवहार्य बीज बनाने के लिए, फूलों से परागकणों को फूलों में ही मौजूद, बीजांड पर निषेचित करना होता हैं। कुछ पौधे बीजांड को निषेचित करने हेतु, अपने स्वयं के परागकणों का उपयोग करके स्व-परागण कर सकते हैं। जबकि, कुछ दूसरे पौधों को उसी प्रजाति के दूसरे पौधे से परागकण की आवश्यकता होती है।
कभी-कभी गुरुत्वाकर्षण शक्ति, कुछ परागकणों को बीजांड पर गिरने में मदद करती है। कभी-कभी वे हवा से उड़कर बीजांड पर गिरते हैं। जबकि, अन्य फूलों का परागण पक्षियों, चमगादड़ों, कीड़ों या यहां तक कि छोटे कृंतकों द्वारा किया जाता है, जो पराग को एक फूल से दूसरे फूल तक ले जाते हैं। इन मामलों में, फूलों को इन परागणकों को लुभाने हेतु, थोड़ा प्रोत्साहित करना पड़ता हैं। अतः पशु परागणकों को मिठास, ऊर्जा और पोषक तत्वों से भरपूर नेक्टर (Nectar) या प्रोटीन से भरे परागकणों से पुरस्कृत किया जाता है, जिसे वे खा सकते हैं। यह नेक्टर पीते समय, परागणकर्ता पराग को उठाते हैं, जिसे वह अगले फूल पर छिड़क देता है।

वर्ष 1953 में कुछ वैज्ञानिकों ने गुलाब की खुशबू में 20 विभिन्न रसायनों की पहचान की थी। बाद में, वर्ष 2006 तक इन रसायनों की संख्या 400 से अधिक पाई गई थी।कुछ फूलों की गंध, जैसे गुलाब या लिली (Lily) की खुशबू, उन परागणकों को आकर्षित करने के लिए होती है, जो मीठी सुगंध की ओर आकर्षित होते हैं। इन परागणकों में भौंरा, मधुमक्खियां और कई तितली प्रजातियां शामिल हैं। ये गंध फूलों की पंखुड़ियों में उत्पन्न होती हैं, तथा फूलों के आकार और रंग के साथ मिलकर, परागणकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य का संकेत देती हैं।
जबकि, कुछ परागणक ऐसी गंधों की ओर आकर्षित होते हैं, जो सड़ते मांस या गोबर की गंध के समान होते हैं। ऐसी गंधों से आकर्षित होकर, मक्खियां तथा भृंग जैसे कीड़े, इन पर भोजन और प्रजनन करते हैं।
रोज़मेरी (Rosemary), लैवेंडर (Lavender), या पुदीना जैसी जड़ी-बूटियों की स्फूर्तिदायक गंध, पौधों की सुगंध की दुनिया के एक और पहलू को उजागर करती है।सामान्य उपयोग में, जड़ी-बूटियां पौधों का एक व्यापक रूप से वितरित समूह है। इनमें स्वादिष्ट या सुगंधित गुण होते हैं, जिनका उपयोग भोजन को स्वादिष्ट बनाने, सजावट, औषधीय प्रयोजन या सुगंध के लिए किया जाता है। इन पौधों की पत्तियों की सतह पर,ग्रंथि युक्त रेशे होते है, जिनके द्वारा आवश्यक तेल (Essential oil) स्रावित होते हैं। इन्हीं रेशों से एक विशिष्ट गंध निकलती है। उत्पन्न होने वाली यह तैलीय या तीखी गंध,कुछ कीट शिकारियों के खिलाफ रक्षात्मक भूमिका निभाती है। 


एक दूसरे से संबंधित पौधों की कुछ प्रजातियां, जो अपने परागण के लिए विभिन्न प्रकार के कीड़ों पर निर्भर होती हैं, अलग-अलग गंध पैदा करती हैं।यह विशेषता परागणकों की घ्राण संवेदनशीलता या प्राथमिकताओं को दर्शाती हैं। ऐसे विशिष्ट संकेत प्रदान करके, फूलों की सुगंध,कीटों के लिए, उनके विशेष खाद्य स्रोतों को आजमाने की क्षमता को सुविधाजनक बनाती है। साथ ही, सफल पराग स्थानांतरण और इस प्रकार, यौन प्रजनन सुनिश्चित होता है।
जबकि, मनुष्य इन सुगंध के रहस्य को उजागर करने हेतु प्रयत्नशील हैं, कीड़े वास्तव में जानते हैं कि, गंध को कैसे खोजा जाता है। वैसे तो, इस बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है कि, कीड़े फूलों की सुगंध के भीतर पाए जाने वाले घटकों पर कैसे प्रतिक्रिया करते हैं। लेकिन, यह स्पष्ट है कि, वे गंधों के जटिल मिश्रणों के बीच अंतर करने में सक्षम होते हैं। 


एक अन्य तथ्य यह है कि, पौधों में गंध का अधिकतम उत्पादन तभी होता है, जब फूल परागण के लिए तैयार होते हैं और जब इसके संभावित परागणकर्ता भी सक्रिय होते हैं। फूलों के विकास के दौरान, खिलने वाले और युवा फूल, जो पराग दाताओं के रूप में कार्य करने के लिए तैयार नहीं होते हैं, कम गंध पैदा करते हैं तथा परिपक़्व फूलों की तुलना में परागणकों के लिए, कम आकर्षक होते हैं।


संदर्भ
https://tinyurl.com/4xs9ypzv 
https://tinyurl.com/ypryvr3t 
https://tinyurl.com/2bxnsx92 
https://tinyurl.com/4jmvbyj5 

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