मेरठ वासियों के लिए हाल ही में एक ऐतिहासिक क्षण आया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा क्षेत्रीय तीव्र परिवहन प्रणाली (RRTS) का उद्घाटन किया गया। यह आधुनिक रैपिड ट्रांज़िट प्रणाली, मेट्रो रेल की तरह ही उन्नत तकनीक और ऊर्जा दक्षता पर आधारित है। मेट्रों के प्रति यहां के लोगों की जिज्ञासा किसी से छिपी नहीं है। यह जिज्ञासा जायज़ भी है, क्योंकि मेट्रो रेल प्रणाली शहरों को अनगिनत लाभ प्रदान करती है। मेट्रो से होने वाले अनगिनत लाभों में वाहनों की भीड़भाड़, वायु प्रदूषण और निजी वाहनों पर निर्भरता में कमी आदि शामिल हैं। कई बार एक निजी वाहन के बजाय, मेट्रो से सफ़र करना अधिक सुविधाजनक और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प साबित होता है। आज के इस लेख में, हम यही जानने का प्रयास करेंगे कि बड़े-बड़े शहरों के अनगिनत लोगों को उर्जावान रखने वाली मेट्रो रेल प्रणाली, ख़ुद कैसे उर्जावान रहती है? इसके अलावा, आज हम उन प्रमुख भारतीय कंपनियों के बारे में भी जानने की कोशिश करेंगे, जो मेट्रो ट्रेनों के साथ-साथ संबंधित तकनीक और उपकरणों का डिज़ाइन, निर्माण और आपूर्ति करती हैं।
परियोजना संख्या 1351, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) द्वारा पंजीकृत पहली स्वच्छ विकास तंत्र (CDM) परियोजना है। DMRC, बिजली से चलने वाली मास रैपिड प्रणाली संचालित करती है। यह प्रणाली विभिन्न सेवा लाइनों पर 4-कार या 6-कार रोलिंग स्टॉक का उपयोग करती है। ये सभी ट्रेनें, तीन-चरण एसी ट्रैक्शन मोटर्स (Three-Phase AC Traction Motors) से सुसज्जित हैं। एक पुनर्योजी ब्रेकिंग सिस्टम (Regenerative Braking System) भी है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस तकनीक की बदौलत, ट्रेनों के ब्रेक लगाने पर बिजली उत्पन्न होती है। इसकी वजह से औसतन, ट्रेनें अपने द्वारा उपयोग की जाने वाली बिजली का लगभग 35% हिस्सा स्वयं ही बना लेती हैं। ये ट्रेनें प्रति किलोमीटर लगभग 5.26 kWh बिजली उत्पन्न करती हैं।

ब्रेक लगाने के दौरान उत्पन्न बिजली को सिस्टम में वापस भेज दिया जाता है। इस बिजली का उपयोग उसी ट्रैक पर चल रही अन्य ट्रेनें कर सकती हैं। यह प्रक्रिया राष्ट्रीय ग्रिड (National Grid) पर पड़ने वाले भारी लोड को कम करती है। यदि पुनर्योजी ब्रेकिंग सिस्टम न हो तो, DMRC को राष्ट्रीय ग्रिड से अधिक बिजली खींचने की आवश्यकता पड़ सकती है। इसके अलावा, बिजली संयंत्रों में अक्सर कोयले का इस्तेमाल होता है, जिससे बड़ी मात्रा में CO2 निकलती है। इसलिए, पुनर्योजी ब्रेकिंग का उपयोग करके, DMRC इन उत्सर्जनों को काबू करने में बहुत बड़ी भूमिका निभा रही है। यही उन्नत तकनीक आज देश की आधुनिक मेट्रो और RRTS जैसी प्रणालियों को भी अधिक ऊर्जा दक्ष और पर्यावरण के अनुकूल बनाती है।
चलिए, अब भारत की उन प्रमुख कंपनियों के बारे में जानते हैं, जो मेट्रो, रेलगाड़ियों और संबंधित प्रौद्योगिकी और उपकरणों का विनिर्माण कर रही हैं।

उक्त सभी के अलावा, कुछ विदेशी कंपनियां भी हैं, जिन्हें मेट्रो और संबंधित प्रौद्योगिकी के उत्पादन हेतु अनुबंधित किया गया है। जिस प्रकार देश में आधुनिक मेट्रो नेटवर्क का विस्तार हो रहा है और मेरठ में हाल ही में उद्घाटित RRTS जैसी अत्याधुनिक प्रणालियाँ विकसित की जा रही हैं, उसी प्रकार इन वैश्विक कंपनियों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। इन कंपनियों में शामिल हैं:

संदर्भ
https://tinyurl.com/2xlfuzsk
https://tinyurl.com/2yektff6
https://tinyurl.com/2a6tjxpb
https://tinyurl.com/27kjanps
https://tinyurl.com/24x6cpqr
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