शाहजहांपुर की गर्रा नदी में काई क्यों बढ़ती है और खतरा कहाँ है?

बैक्टीरिया, प्रोटोज़ोआ, क्रोमिस्टा और शैवाल
10-01-2026 09:12 AM
शाहजहांपुर की गर्रा नदी में काई क्यों बढ़ती है और खतरा कहाँ है?

शाहजहांपुर के लोगों के लिए गर्रा (देवहा) नदी केवल बहता हुआ पानी नहीं, बल्कि शहर की जीवनरेखा है। जब हम पुल से गुजरते हैं, तो सतह पर तैरते प्लास्टिक को देखकर नाक-भौं सिकोड़ लेते हैं। लेकिन यकीन मानिए, नदी का असली स्वास्थ्य सतह पर नहीं, बल्कि पानी के अंदर तय होता है।

गर्रा नदी के पानी में बैक्टीरिया, प्रोटोजोआ और शैवाल (Algae) का एक विशाल संसार बसा हुआ है। यह सूक्ष्म जीवों (Microbes) की दुनिया ही यह फैसला करती है कि हमारी नदी 'निर्मल' रहेगी या एक 'बदबूदार नाले' में बदल जाएगी।

नदी को 'बीमार' कौन कर रहा है? 
सरकारी रिपोर्ट्स (reports) और 'राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन' (NMCG) के दस्तावेज बताते हैं कि शाहजहांपुर के विस्तार के साथ-साथ नदी किनारे बस्तियां तो बढ़ीं, लेकिन सीवेज प्रबंधन (Sewage Treatment) उस रफ्तार से नहीं बढ़ा।

शहर के पुराने नाले और घरों का गंदा या अनुपचारित पानी जब बिना साफ किए नदी में मिलता है, तो यह अपने साथ भारी मात्रा में 'पोषक तत्व' (Nutrients) लेकर आता है। सुनने में 'पोषक तत्व' शब्द अच्छा लगता है, लेकिन नदी के लिए यह 'मीठा जहर' है। यही गंदगी नदी के नाजुक संतुलन को बिगाड़ने की पहली सीढ़ी है।

आपने अक्सर नदी के किनारों पर हरी काई (Algae) जमी देखी होगी। हम इसे सामान्य मानते हैं, लेकिन विज्ञान की नजर में यह खतरे की घंटी है। जब नालों के जरिए नाइट्रोजन (nitrogen) और फास्फोरस (phosphorus) नदी में घुलते हैं, तो यह काई पागलों की तरह बढ़ने लगती है, इसे वैज्ञानिक भाषा में 'एल्गल ब्लूम' (Algal Bloom) कहते हैं।

शुरुआत में यह हरापन ठीक लगता है, लेकिन असली मुसीबत तब शुरू होती है, जब यह काई मरती है। मरी हुई काई को सड़ाने (Decompose) के लिए बैक्टीरिया पानी की सारी ऑक्सीजन (oxygen) खींच लेते हैं। नतीजा? पानी में ऑक्सीजन खत्म होने लगती है, जलीय जीव दम तोड़ने लगते हैं और नदी से सड़ी हुई बदबू आने लगती है। शाहजहांपुर में नदी से आने वाली दुर्गंध का मुख्य कारण यही है।

लेकिन डरिए मत, स्थिति पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। प्रकृति ने नदी की सफाई के लिए अपनी खुद की सेना भी तैयार कर रखी है, जिसमें सबसे प्रमुख सिपाही हैं- प्रोटोजोआ (Protozoa)।

ये नन्हे जीव (जो नंगी आंखों से नहीं दिखते) पानी के 'वैक्यूम क्लीनर' (Vaccum Cleaner) हैं। दुनिया भर के बड़े-बड़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (Sewage Treatment Plant) इसी सिद्धांत पर काम करते हैं। प्रोटोजोआ गंदे पानी में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को खा जाते हैं और पानी को 'साफ' (Polish) करने का काम करते हैं। अगर गर्रा नदी के पानी की जांच में स्वस्थ प्रोटोजोआ मिलते हैं, तो यह शुभ संकेत है कि नदी की किडनी अभी काम कर रही है।

File:Marine algae in Gullmarsfjorden at Sämstad 4.jpg

बैक्टीरिया और प्रोटोजोआ के अलावा, एक और खास जीव है, 'डायटम' (Diatom)। इन्हें आप नदी का 'ब्लैक बॉक्स' या 'नन्हा जासूस' कह सकते हैं। पानी की रासायनिक जांच (Chemical Test) तो केवल उस पल का हाल बताती है जब पानी लिया गया था। लेकिन डायटम के कवच पर पुराने प्रदूषण के निशान रह जाते हैं। ये बताते हैं कि पिछले कुछ महीनों में नदी ने कितना प्रदूषण झेला है। वैज्ञानिक इनका इस्तेमाल यह जानने के लिए करते हैं कि सीवेज का असर नदी के किस हिस्से में सबसे ज्यादा है।

नदी की सेहत सिर्फ नालों पर नहीं, बल्कि इस पर भी निर्भर करती है कि हम अपने शहर का कूड़ा (Solid Waste) कैसे संभालते हैं। अगर शहर का गीला कचरा सड़ेगा, तो उसका रसाव (Leachate) बारिश के साथ बहकर नदी में ही जाएगा और हानिकारक बैक्टीरिया को बढ़ाएगा।

साथ ही, जैसा हमने हाल ही में देखा, जब बांध से अचानक पानी छोड़ा जाता है, तो नदी का रूप विकराल हो जाता है। यह तेज बहाव नदी को धोता जरूर है, लेकिन अपने साथ किनारों की गंदगी और मिट्टी भी पानी में घोल देता है। इससे हमारे 'मित्र कीड़ों' (प्रोटोजोआ) का घर उजड़ जाता है और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) गड़बड़ा जाता है।

शाहजहांपुर की गर्रा नदी को बचाने की लड़ाई केवल 'सफाई अभियान' चलाकर नहीं जीती जा सकती। हमें उस अदृश्य दुनिया का ख्याल रखना होगा जो हमारी नजरों से ओझल है। रास्ता साफ है, हमें नालों के गंदे पानी को नदी में गिरने से रोकना होगा और कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण करना होगा। जब हम नदी में प्रोटोजोआ और डायटम जैसे 'मित्र जीवों' को पनपने का मौका देंगे, तभी हमारी नदी वास्तव में सांस ले पाएगी। अब समय आ गया है कि हम नदी को सिर्फ पानी का बहता हुआ स्रोत न मानकर, उसे एक 'जीवित प्रणाली' के रूप में देखें और उसका सम्मान करें।

संदर्भ 
https://tinyurl.com/2bddh3td
https://tinyurl.com/296vmb5f
https://tinyurl.com/22lbtwkg
https://tinyurl.com/2c9xrddp
https://tinyurl.com/26baoyye
https://tinyurl.com/22vx74ad
https://tinyurl.com/2294nofm

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