शाहजहांपुर की रेतीली ज़मीन पर कौन-सी खेती दे रही सबसे अच्छी कमाई?

फल और सब्जियाँ
22-01-2026 11:02 AM
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शाहजहांपुर की रेतीली ज़मीन पर कौन-सी खेती दे रही सबसे अच्छी कमाई?

शाहजहांपुर की खेती को समझने के लिए सबसे पहले हमें यहाँ के भूगोल को समझना होगा। देखा जाए तो हमारा जिला नदियों का जाल है, कहीं रामगंगा का रेतीला विस्तार है, तो कहीं गर्रा और गोमती की उपजाऊ तराई मौजूद है। जलालाबाद जैसे इलाकों में जहाँ बाढ़ की चुनौती रहती है, वहां के किसानों ने अब एक नई राह चुनी है।

अक्सर हम सोचते हैं कि रेतीली ज़मीन बेकार है, लेकिन सच तो यह है कि यही ज़मीन 'सब्जियों' के लिए सोने जैसी है। शाहजहांपुर की मिट्टी कहीं दोमट है, तो कहीं चिकनी; और यही विविधता इसे बागवानी (Horticulture) के लिए सबसे खास बनाती है। अनाज की खेती में किसान को साल में एक या दो बार बड़ी रकम मिलती है, लेकिन सब्जियां और फल साल भर 'कैश फ्लो' (नकद पैसा) बनाए रखते हैं। इतिहास गवाह है कि जब इंसान ने जंगली पौधों को सलीके से उगाना सीखा, तभी से उसकी तरक्की शुरू हुई।  अनाज के मुकाबले फल-सब्जियां जल्दी खराब होती हैं, इसलिए इन्हें उगाने वाला किसान बाज़ार से ज्यादा गहराई से जुड़ा होता है। शाहजहांपुर में आम और अमरूद के बाग सिर्फ हरियाली नहीं, बल्कि एक चलती-फिरती अर्थव्यवस्था हैं, जो किसानों को तब सहारा देती हैं जब बड़ी फसलें तैयार होने में वक्त लेती हैं।
 

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शाहजहांपुर के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के वैज्ञानिक अब किसानों को एक नया मंत्र दे रहे हैं, और यह मंत्र है: "सही फसल, सही ज़मीन"
अब वो दौर गया कि पड़ोस वाले ने धान लगाया है तो हम भी वही लगाएंगे। वैज्ञानिक बता रहे हैं कि अगर आपकी ज़मीन रेतीली है, तो वहां कौन सी सब्जी जम कर पैदावार देगी, और अगर दोमट मिट्टी है, तो किन फलों के बाग आपको मालामाल कर सकते हैं। केवीके का लक्ष्य अब सिर्फ पैदावार बढ़ाना नहीं, बल्कि 'एंटरप्राइज मिक्स'(Enterprise Mix) तैयार करना है, यानी अनाज के साथ-साथ फल-सब्जी का ऐसा तालमेल जिससे जोखिम कम और मुनाफा ज्यादा हो।

आजकल 'मल्टीलेयर फार्मिंग' (Multilayer Farming) का बड़ा शोर है, और यह शाहजहांपुर के छोटे किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसमें एक ही ज़मीन पर, एक ही समय में अलग-अलग ऊँचाई वाली कई फसलें उगाई जाती हैं। केवीके (KVK) के ट्रेनिंग कैंपों (training camp) में अब किसानों को सिखाया जा रहा है कि कैसे कम जगह में ज्यादा उत्पादन लिया जाए और उपज को खराब होने से कैसे बचाया जाए। यही वो 'हुनर' है जो हमारी खेती को पुराने ढर्रे से निकालकर आधुनिक बना रहा है।

File:Farmer working in the field with their tractor.jpg

शाहजहांपुर के फसल चक्र (Cropping Pattern) में बड़ा बदलाव दिख रहा है। किसान अब समझ गए हैं कि बार-बार गेहूं-धान उगाने से मिट्टी अपनी ताकत खो देती है। ऐसे में बीच-बीच में सब्जियों की खेती न केवल मिट्टी की सेहत सुधारती है, बल्कि कम समय में तैयार होकर किसान की जेब भी गरम रखती है। अच्छी खबर यह है कि जिला प्रशासन और उद्यान विभाग भी इसमें पूरा साथ दे रहे हैं। हाल ही में विभाग ने फल और सब्जियों के पौधे बांटने की बड़ी मुहिम शुरू की है। सरकार चाहती है कि किसान अपने खेत की मेड़ों और खाली पड़ी ज़मीन का इस्तेमाल फलदार पेड़ लगाने में करें।

इतना ही नहीं, छोटे किसानों और 'किचन गार्डनिंग' (Kitchen Gardening) के शौकीनों को सब्जियों के बीज भी मुफ्त दिए जा रहे हैं। इसका बड़ा फायदा यह है कि जो गरीब किसान पैसों की तंगी की वजह से शुरुआत नहीं कर पाते थे, उन्हें अब एक सहारा मिल गया है। यह सिर्फ खेती नहीं, बल्कि परिवार को पोषण देने और कुपोषण से लड़ने का भी एक जरिया है। सब कुछ अच्छा होने के बाद भी एक बड़ी कमी खटकती है—'भंडारण' (Storage)। शाहजहांपुर में आलू के लिए तो कोल्ड स्टोरेज (cold storage) हैं, लेकिन आम, अमरूद और हरी सब्जियों जैसी जल्दी खराब होने वाली चीजों के लिए अभी बुनियादी ढांचा कमजोर है। अगर किसानों को अपनी उपज रखने की सही जगह और बेचने के लिए बेहतर मार्केट लिंक (market link) मिल जाए, तो शाहजहांपुर पूरे प्रदेश के लिए बागवानी का 'रोल मॉडल' (role-model) बन सकता है।

कुल मिलाकर शाहजहांपुर के खेतों की कहानी अब बदल रही है। नदियों की गोद में बसा हमारा जिला परंपरागत खेती के साथ-साथ वैज्ञानिक तरीकों को भी अपना रहा है। केवीके (KVK) की सलाह, सरकार की मुफ्त मदद और हमारे किसानों का पसीना मिलकर एक नया अध्याय लिख रहे हैं। अब खेती सिर्फ 'गुजारा' नहीं, बल्कि एक 'मुनाफे वाला बिजनेस' बनने की राह पर है। आने वाले समय में, शाहजहांपुर का स्वाद और यहाँ की सब्जियां आसपास के कई जिलों की थाली की शोभा बढ़ाएंगी।

संदर्भ 
https://tinyurl.com/2c99sogy
https://tinyurl.com/2bcfpeca
https://tinyurl.com/2d3w7q7b
https://tinyurl.com/2a6a2v8x
https://tinyurl.com/22wcgpeu
https://tinyurl.com/2xhozyw7 

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