शाहजहांपुर में जड़ी-बूटी असली है या नकली ,पकड़ होगी कैसे?

डीएनए के अनुसार वर्गीकरण
10-01-2026 09:12 AM
शाहजहांपुर में जड़ी-बूटी असली है या नकली ,पकड़ होगी कैसे?

शाहजहाँपुर के जनजीवन में हरियाली का गहरा नाता है। सड़क किनारे खड़े नीम के पेड़, गर्रा (देवहा) नदी के तट पर झूमती झाड़ियाँ और खेतों की मेड़ों पर लगी बाड़ हमारे बचपन की यादों का अटूट हिस्सा हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब यही नीम का पेड़ सूखकर महज़ लकड़ी बन जाता है, या वही औषधीय झाड़ियाँ चूर्ण (पाउडर) का रूप ले लेती हैं, तो उनकी असली पहचान कैसे हो?

जब कोई वनस्पति "जड़ी-बूटी" बनकर बाज़़ार में पहुँचती है, तो उसकी शुद्धता पहचानना लगभग नामुमकिन हो जाता है। सूखे तने, कटी हुई जड़ें और पिसे हुए पाउडर को देखकर बड़े-बड़े विशेषज्ञ भी गच्चा खा सकते हैं। यहीं से शुरुआत होती है आधुनिक विज्ञान के उस 'खोजी' तंत्र की, जिसे हम डीएनए बारकोडिंग (DNA Barcoding) कहते हैं। यह तकनीक शाहजहाँपुर की अनमोल वानस्पतिक संपदा को एक नई सुरक्षा देने जा रही है।

जैसे-जैसे वैश्विक स्तर पर आयुर्वेद का चलन बढ़ा है, जड़ी-बूटियों का बाज़़ार भी विस्तृत हुआ है। लेकिन इस चमक के पीछे मिलावट का एक काला सच भी है। हर्बल (herbal) उत्पादों की गुणवत्ता पूरी तरह सही पौधे के चुनाव पर टिकी होती है। यदि दवा बनाने में असली औषधि के बजाय किसी ज़़हरीली खरपतवार का इस्तेमाल हो जाए, तो वह फायदे के बजाय जानलेवा साबित हो सकती है।

बाज़़ार में मिलने वाला कच्चा माल (Raw Drug) अक्सर ऐसे रूप में होता है कि उसे सूँघकर या चखकर पहचानना मुमकिन नहीं। यहीं हमें एक ऐसी वैज्ञानिक मुहर की ज़रूरत होती है जो कभी झूठ न बोले और वह मुहर है पौधे का “डीएनए (DNA)।”

क्या है डीएनए बारकोडिंग?
इसे आप किसी सुपरमार्केट (supermarket) के 'बारकोड' (barcode) की तरह समझ सकते हैं। जैसे एक स्कैनर कोड को पढ़ते ही सामान की पूरी जानकारी दे देता है, वैसे ही हर पौधे के भीतर एक अनोखा आनुवंशिक कोड (Genetic Code) होता है। वैज्ञानिकों ने पौधों के डीएनए के कुछ ऐसे खास हिस्सों की पहचान की है जो हर प्रजाति के लिए अलग होते हैं।

इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके लिए हमें पूरा पेड़ या फूल नहीं चाहिए। यदि हमारे पास सूखी जड़ का एक रेशा, तने का बुरादा या किसी पत्ती का एक छोटा सा टुकड़ा भी है, तो प्रयोगशाला में उसकी सटीक पहचान हो सकती है।

शाहजहाँपुर की जीवनरेखा, गर्रा नदी, हमारे क्षेत्र की जैव-विविधता की रीढ़ है। शोध कार्यों में इसके तटवर्ती गलियारे (River Corridor) को एक 'जीवंत प्रयोगशाला' (Living Field-Lab) माना जा रहा है। नदी के बेसिन में उगने वाले सैकड़ों पौधे न केवल मिट्टी को थामे रखते हैं, बल्कि पर्यावरण का संतुलन भी बनाते हैं।

अक्सर बाढ़ के बाद नदी के किनारों पर कुछ बाहरी या 'आक्रामक' (Invasive) पौधे उग आते हैं, जो हमारी स्थानीय वनस्पतियों को नष्ट कर सकते हैं। डीएनए बारकोडिंग हमें यह समझने में मदद करती है कि बाढ़ के बाद हमारे कौन से 'पुराने साथी' वापस लौटे हैं और कौन से बाहरी 'घुसपैठिए' हमारे तंत्र को नुकसान पहुँचा रहे हैं।

इस वैज्ञानिक मुहिम का सबसे अहम कदम है—ज़़िले के सभी 527 प्रकार के पुष्पीय पौधों की एक डिजिटल और जेनेटिक कुंडली (Reference Library) तैयार करना।

  • पहले स्थानीय पौधों के प्रामाणिक नमूने और फोटो लिए जाएंगे।
  • प्रयोगशाला में उनका डीएनए कोड (Barcoding) दर्ज कर एक डेटाबेस बनाया जाएगा।
  • यह डेटा एक 'सुरक्षित तिजोरी' की तरह काम करेगा।

एक बार यह लाइब्रेरी तैयार हो गई, तो पंसारी की दुकान से लिए गए किसी भी नमूने का मिलान इस डेटा से किया जा सकेगा। इससे मिलावट तो पकड़ी ही जाएगी, साथ ही असली किसानों और संग्रहकर्ताओं को उनकी उपज का सही दाम और पहचान भी मिलेगी।

इस प्रकार अब शाहजहाँपुर केवल अनुमानों पर नहीं, बल्कि प्रमाणों (Evidence) के आधार पर संरक्षण के फैसले लिए जाएँगे। 'एक पेड़ माँ के नाम' जैसे अभियान जब इस वैज्ञानिक सोच से जुड़ेंगे, तो परिणाम क्रांतिकारी होंगे। हमें सिर्फ पेड़ों की गिनती नहीं बढ़ानी, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि गर्रा नदी के डूब क्षेत्र (Floodplain) की मूल वनस्पतियाँ सुरक्षित रहें।

शाहजहाँपुर की असली खूबसूरती उसकी मिट्टी और उससे जुड़े पारंपरिक ज्ञान में है। जब हम अपनी प्राचीन विरासत को आधुनिक डीएनए तकनीक से जोड़ते हैं, तो हम आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए एक मज़़बूत कवच तैयार कर रहे होते हैं।

संदर्भ 
https://tinyurl.com/26sv3wn8
https://tinyurl.com/2cxpwe5b
https://tinyurl.com/2brbpmy2
https://tinyurl.com/266v6nfc
https://tinyurl.com/22vx74ad
https://tinyurl.com/242vnam7 

.