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शाहजहांपुर की गर्रा नदी सिर्फ़ पानी की एक धारा नहीं है, बल्कि यह मगरमच्छों (Mugger crocodile) जैसे 'कीस्टोन' जीवों का एक सुरक्षित और प्राकृतिक घर भी है। अक्सर यह ग़लतफ़हमी होती है कि इनका रिहायशी इलाक़ों में आना कोई सामान्य बात है, जबकि सच यह है कि नदी में इनका होना यह बताता है कि वहाँ का पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) अभी भी ज़िंदा और सेहतमंद है।
क्या गर्रा नदी की गहराई में एक अलग दुनिया बसती है?
शाहजहांपुर ज़िला अपनी ऐतिहासिक पहचान के लिए मशहूर है, लेकिन इसकी एक और पहचान है जो अक्सर बाढ़ के दिनों में हमारे दरवाज़ों तक दस्तक देती है। यह पहचान है इसकी नदियों की, और ख़ासकर गर्रा नदी में बसने वाले जलीय जीवों की। गर्रा नदी केवल पानी का बहाव नहीं है, बल्कि यह मगरमच्छों और कछुओं का एक 'छिपा हुआ संसार' है। मानसून के दौरान जब नदी उफ़ान पर होती है, तो अक्सर ये जीव पानी के तेज़ बहाव के साथ बहकर बस्तियों और नहरों के क़रीब आ जाते हैं। ऐसे हालात में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हम डर के साये में जीते रहें, या फिर सही जानकारी के साथ इन जीवों के साथ रहने का कोई सुरक्षित रास्ता निकालें? यह केवल एक कुदरती आफ़त नहीं है, बल्कि हमारी नदियों और इंसानी आबादी के बीच उस पुराने रिश्ते की परीक्षा है, जिसे हमें फिर से गहराई से समझने की ज़रूरत है।![]()
शाहजहांपुर का भूगोल मगरमच्छों को इतना क्यों भाता है?
शाहजहांपुर की भौगोलिक बनावट ही इस पूरी कहानी की असली वजह है। गर्रा नदी पूरे ज़िले के परिदृश्य को दो ख़ूबसूरत हिस्सों में बांटती है। यह विभाजन सिर्फ़ काग़ज़ी या प्रशासनिक नहीं है, बल्कि ज़मीनी स्तर पर नदी के मोड़ों पर शांत 'सैंडबार्स' (रेतीले टीले) और आर्द्रभूमियों (Wetlands) का निर्माण करता है। ये जगहें मगरमच्छों के लिए धूप सेंकने (Basking) और अंडे देने के लिए एकदम सही और सुरक्षित मानी जाती हैं। जैसे-जैसे शहर का विस्तार हो रहा है, नदी के ये शांत कोने ही इन जीवों के अस्तित्व का आख़िरी सहारा बचे हैं।
इस संघर्ष की एक बानगी जुलाई 2024 की भीषण बाढ़ के दौरान देखने को मिली, जब एक मगरमच्छ बहकर गाँव की दहलीज तक आ पहुँचा। डरे हुए ग्रामीणों ने उसे रस्सी से बांध दिया। यह घटना साफ़ तौर पर दिखाती है कि जब जंगली जीव और इंसान अचानक आमने-सामने होते हैं, तो जानकारी की कमी में पहली प्रतिक्रिया हमेशा घबराहट और बचाव की ही होती है।
गाँव में मगरमच्छ का होना नदी की 'अच्छी सेहत' का सबूत कैसे?
आम तौर पर हम मगरमच्छ को सिर्फ़ एक ख़तरनाक शिकारी की नज़र से देखते हैं, लेकिन विज्ञान उन्हें नदी का 'डॉक्टर' या 'मैनेजर' मानता है। नदी में इनकी मौजूदगी इस बात का पक्का सबूत है कि वहाँ मछलियों की तादाद काफ़ी है और नदी का पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) अभी भी ठीक से काम कर रहा है। ये 'कीस्टोन स्पीशीज़' (Keystone Species) हैं, जिनका होना पानी की खाद्य श्रृंखला (Food Chain) को संतुलित रखता है। अगर तमाम प्रदूषण के बावजूद गर्रा नदी में मगरमच्छ बचे हुए हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि नदी में ख़ुद को साफ़ रखने और पुनर्जीवित करने की ताक़त अभी बाक़ी है। उत्तर प्रदेश का गंगा-रामगंगा तंत्र मीठे पानी के कछुओं का भी एक महत्वपूर्ण घर है, और इन्हें बचाने के लिए हमें इनके प्रजनन स्थलों (Breeding grounds) को सुरक्षित रखना होगा।
भ्रम (Fear) बनाम वैज्ञानिक तथ्य (Scientific Fact)
| भ्रम (क्या लोग सोचते हैं) | सच्चाई (विज्ञान क्या कहता है) |
| मगरमच्छ जानबूझकर इंसान का शिकार करने गाँव आते हैं। | बाढ़ के दौरान पानी के तेज़ बहाव में वे रास्ता भटककर नहरों या बस्तियों में आ जाते हैं। |
| नदी में मगरमच्छ का होना ख़तरे की घंटी है। | यह नदी की अच्छी सेहत और पर्याप्त भोजन (मछलियों) का प्रमाण है। |
| नदी में कचरा फेंकने से जानवरों पर कोई फ़र्क नहीं पड़ता। | नदी किनारे फेंका गया मांस या कचरा मगरमच्छों को तट और आबादी की ओर आकर्षित करता है। |
क्या दहशत छोड़कर 'नदी मित्र' बनना ही भविष्य का रास्ता है?
मगरमच्छों के साथ इस संघर्ष को कम करने का सबसे बेहतरीन और व्यावहारिक रास्ता 'यूपी मॉडल' है। इसमें 'नदी मित्र' (River Friends) बनाना और सामुदायिक स्तर पर घोंसलों का संरक्षण करने जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। शाहजहांपुर के नदी तटों पर भी स्थानीय लोगों को शामिल करके उनके बीच जागरूकता फैलानी होगी। लोगों को यह समझना होगा कि नदी में कचरा या बचा हुआ भोजन न फेंकें, क्योंकि यह मांसाहारी जीवों को आबादी की ओर खींच लाता है। विशेषज्ञों का भी यही मानना है कि घबराहट और अज्ञानता को पीछे छोड़कर ही हम अपनी इस प्राचीन जल-विरासत को बचा सकते हैं। जब हम इन जीवों को दुश्मन के बजाय नदी के रक्षक के रूप में देखना शुरू करेंगे, तभी शाहजहांपुर की ये नदियाँ अपनी असली शान वापस पा सकेंगी। यह सह-अस्तित्व (Co-existence) ही हमारे और इन जलीय शिकारियों के भविष्य का एकमात्र सुरक्षित रास्ता है।
संदर्भ
https://tinyurl.com/2dboes63
https://tinyurl.com/2bhe4pvt
https://tinyurl.com/263suejv
https://tinyurl.com/2dqbavkk
https://tinyurl.com/25uparyy
https://tinyurl.com/2294nofm