शाहजहांपुर महोत्सव: जानें कैसे शहर की हर गली बन जाती है कला का मंच?

दृष्टि III - कला/सौंदर्य
11-01-2026 09:04 AM
शाहजहांपुर महोत्सव: जानें कैसे शहर की हर गली बन जाती है कला का मंच?

क्या सुंदरता केवल आँखों को लुभाने वाली सजावट है? या इसका अर्थ इससे कहीं ज़्यादा गहरा है? जब हम किसी शहर की कला, उसके स्मारकों और उत्सवों को देखते हैं, तो हमें यह समझना होगा कि सौंदर्य केवल बाहरी दिखावा नहीं है। यह वह ज़रिया है जिसके ज़रिए समाज अपने मूल्यों और इतिहास को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाता है। शाहजहाँपुर के नज़रिए से देखें, तो यह सौंदर्य यहाँ के पवित्र स्थलों, बाग-बगीचों और शहीदों की यादों में आज भी ज़िंदा है।

भारतीय परंपरा में कला और सुंदरता को देखने का नज़रिया बहुत गहरा रहा है। भरत मुनि का 'रस सिद्धांत' हमें सिखाता है कि कोई भी दृश्य रूप “चाहे वह मूर्ति हो, इमारत हो या बाग” हमें केवल उसकी उपयोगिता तक सीमित नहीं रखता, बल्कि एक गहरे अर्थ से जोड़ता है। 'रस' वह अहसास है जो किसी कलाकृति को देखने पर हमारे भीतर जागता है। यह एक ऐसी मानसिक स्थिति है जहाँ इंसान अपनी निजी चिंताओं को भूलकर एक सुखद आनंद का अनुभव करता है। जब हम शाहजहाँपुर की विरासत को देखते हैं, तो हमें इसी 'रस' की अनुभूति होती है, जहाँ ईंट-पत्थर केवल ढाँचे नहीं, बल्कि भावनाओं को व्यक्त करने वाले माध्यम बन जाते हैं।

शहर की सुंदरता को समझने के लिए हमें इसके अतीत की परतों को टटोलना होगा। शाहजहाँपुर का इतिहास और इसकी बुनियाद मुग़ल काल से जुड़ी है, जिसकी झलक आज भी यहाँ की गलियों और पुरानी निशानियों में मिलती है। यही ऐतिहासिक पृष्ठभूमि इस शहर को एक अलग पहचान देती है। संस्कृति और विरासत के मामले में शाहजहाँपुर एक संपन्न ज़िला है। यहाँ की वास्तुकला और पुरानी बस्तियाँ हमें उस दौर की याद दिलाती हैं जब इस शहर की नींव रखी गई थी। इतिहास का यही ताना-बाना आज के शाहजहाँपुर के दृश्य को एक रूप देता है, जिससे यह शहर केवल कंक्रीट का जंगल नहीं, बल्कि इतिहास की एक खुली किताब जैसा महसूस होता है।
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शाहजहाँपुर में सार्वजनिक सुंदरता का सीधा संबंध हमारी 'स्मृति' और आज़ादी की लड़ाई से है। यहाँ सुंदरता का मतलब सिर्फ़ सजावट नहीं, बल्कि बलिदान का सम्मान है। जब हम शहर में निकलते हैं, तो 'शहीद द्वार' और 'राम प्रसाद बिस्मिल स्मारक' जैसे प्रमुख स्थल हमारे सामने आते हैं। ये केवल ईंट और गारे से बनी इमारतें नहीं हैं, बल्कि ये आज़ादी के इतिहास को एक जीवंत रूप में हमारे सामने पेश करती हैं। प्रशासनिक दस्तावेज़ों में शामिल 'प्रमुख दर्शनीय स्थलों' में इन स्मारकों का खास महत्व है। यहाँ के मंदिर और ऐतिहासिक इमारतें उस 'सौंदर्य मानचित्र' का हिस्सा हैं जो पर्यटकों और स्थानीय लोगों को गर्व का अहसास कराते हैं।

इस पूरे 'सौंदर्य मानचित्र' में सबसे खास स्थान 'अमर शहीद राम प्रसाद बिस्मिल स्मारक' का है। यह स्मारक उस महान क्रांतिकारी को समर्पित है जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। शाहजहाँपुर शहर में स्थित इस स्मारक को एक सुंदर पार्क के रूप में सजाया गया है। यहाँ की हरियाली और शांत माहौल इसे न केवल एक यादगार स्थल बनाते हैं, बल्कि यह एक ऐसी जगह भी है जहाँ लोग सुकुन के पल बिता सकते हैं और अपने इतिहास से जुड़ सकते हैं। नगर निगम और स्थानीय प्रशासन ने इसे एक बेहतरीन पर्यटन स्थल के रूप में सँभाला है, ताकि युवा पीढ़ी अपने नायकों को याद रख सके। यह स्मारक मिसाल है कि कैसे एक शहर अपने शहीदों की यादों को खूबसूरती के साथ सँजो सकता है।

शाहजहाँपुर का सौंदर्य केवल पत्थर की इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यहाँ के उत्सवों में भी धड़कता है। त्यौहार और मेले शहर के लिए एक गतिशील मंच का काम करते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण 'शाहजहाँपुर महोत्सव' है। वर्ष 2025 में, इस महोत्सव का आयोजन 9 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक गांधी भवन प्रेक्षागृह में तय किया गया था। यह आयोजन शहर के सांस्कृतिक जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा है।

महोत्सव के दौरान पूरा शहर एक नए रंग-रूप में नज़र आता है। शाहजहाँपुर महोत्सव 2025 की शुरुआत शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हुई थी। इस दौरान होने वाली सजावट, प्रतियोगिताएँ और सार्वजनिक मंच शहर के स्वरूप में हर साल नई जान फूँक देते हैं। यह वह समय होता है जब शहर अपनी रोज़मर्रा की छवि से बाहर निकलकर कला और संस्कृति के एक भव्य उत्सव में बदल जाता है। स्थानीय कलाकारों को अपनी कला दिखाने का मौका मिलता है और शहरवासी मिलकर खुशियाँ मनाते हैं। ये आयोजन साबित करते हैं कि सुंदरता ठहरी हुई चीज़ नहीं है, बल्कि यह सबकी भागीदारी से और निखरती है।

पर्यटन के लिहाज़ से देखें तो शाहजहाँपुर में 'विरासत यात्रा' (Heritage Walk) की अपार संभावनाएँ हैं। ज़िला पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, शहर में कई ऐसे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल हैं जिन्हें एक कड़ी में पिरोया जा सकता है। हनुमान धाम, कोरोनेशन पिलर और अन्य खास जगहों को जोड़कर एक ऐसा रास्ता तैयार किया जा सकता है जो पर्यटकों को शहर की असली रूह से रूबरू कराए। यह योजना न केवल बाहर से आने वालों के लिए, बल्कि यहाँ के रहने वालों के लिए भी अपने शहर को एक नई नज़र से देखने का ज़रिया बन सकती है।

आखिर में, शहर की सुंदरता को बनाए रखने और उसे और बेहतर करने के लिए समय-समय पर इसके मूल्यांकन की ज़रूरत है। यह एक सरल लेकिन असरदार कदम हो सकता है। हमें अपने शहर की दीवारों पर बनी पेंटिंग्स (भित्ति चित्रों), ऐतिहासिक दरवाज़ों, मज़ारों की कला और यादगार स्थलों का दस्तावेज़ीकरण करना चाहिए। जो चीज़ें शाहजहाँपुर को अनोखा बनाती हैं, उनका संरक्षण बेहद ज़रूरी है। साथ ही, इन जगहों पर रोशनी की सही व्यवस्था, दिशा-निर्देश और साफ़-सफ़ाई पर ध्यान देकर हम अपने शहर के सौंदर्य को और भी ज़्यादा निखार सकते हैं।


संदर्भ 
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