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हम सभी जानते हैं कि आंखें हमारे शरीर का सबसे अनमोल अंग हैं। ये न केवल हमें बाहरी दुनिया की खूबसूरती दिखाती हैं, बल्कि जीवन के हर छोटे-बड़े काम को संभव बनाती हैं। मगर आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी और सेहत के प्रति लापरवाही की वजह से बड़ी संख्या में लोग आंखों की गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, ये बीमारियां सिर्फ़ नज़र को धुंधला नहीं करतीं, बल्कि समय पर सही इलाज न मिलने पर इंसान को हमेशा के लिए अंधा भी बना सकती हैं।
मोतियाबिंद और ग्लूकोमा जैसी बीमारियां आंखों को कैसे नुकसान पहुँचाती हैं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, आज आंखों की कई बीमारियां बहुत सामान्य हो गई हैं। इनमें मोतियाबिंद (Cataract), ग्लूकोमा (Glaucoma) और रेटिना से जुड़ी समस्याएं प्रमुख हैं। मोतियाबिंद में आंखों का प्राकृतिक लेंस धुंधला हो जाता है, जिससे दृष्टि कमज़ोर पड़ने लगती है। वहीं ग्लूकोमा, जिसे 'काला मोतिया' भी कहा जाता है, आंखों की नसों पर दबाव बढ़ाकर उन्हें धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त कर देता है। इसके अलावा, बढ़ती उम्र के कारण होने वाला 'मैकुलर डिजनरेशन' (Macular Degeneration) और डायबिटीज़ के मरीज़ों में 'डायबिटिक रेटिनोपैथी' सीधे रेटिना को प्रभावित करती है। बच्चों में अक्सर 'लेजी आई' (Amblyopia) की समस्या देखी जाती है, जिसका बचपन में उपचार न होने पर उनकी नज़र स्थायी रूप से कमज़ोर हो सकती है।
गंभीर बीमारियों के लक्षण और कारणों को कैसे पहचानें?
इन बीमारियों को समय रहते पहचानना बेहद ज़रूरी है। यदि आपको अचानक धुंधला दिखने लगे, आंखों में तेज़ दर्द हो, रोशनी के इर्द-गिर्द घेरे (Halos) नज़र आएं या आंखें लगातार लाल रहें, तो सतर्क हो जाएं, ये किसी गंभीर समस्या के संकेत हो सकते हैं। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे आनुवंशिकता (पारिवारिक इतिहास), बढ़ता प्रदूषण, डायबिटीज़ जैसी बीमारियां और सूरज की पराबैंगनी किरणों का प्रभाव। कई बार पुरानी चोट या पोषण की कमी भी नज़र कमज़ोर होने की बड़ी वजह बनती है।
भारत से दृष्टिहीनता की समस्या को जड़ से मिटाने और जागरूकता फैलाने के लिए केंद्र सरकार 'राष्ट्रीय अंधता एवं दृष्टि दोष नियंत्रण कार्यक्रम' (NPCBVI) चला रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 1976 में शुरू किए गए इस मिशन का मुख्य उद्देश्य देश में दृष्टि दोष के मामलों में कमी लाना है। सरकार का विशेष ज़ोर मोतियाबिंद के ऑपरेशन, बच्चों को विटामिन-ए (Vitamin A) की ख़ुराक देने और स्कूलों में नियमित जांच शिविर आयोजित करने पर है।
सरकार का लक्ष्य है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी बेहतर इलाज मिले। इस कार्यक्रम के तहत मुफ़्त नेत्र शिविर लगाए जाते हैं और ज़रूरतमंदों को मुफ़्त चश्मा व चिकित्सा उपलब्ध कराई जाती है। सरकार निजी अस्पतालों और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि दूर-दराज़ के गांवों तक नेत्र चिकित्सा की पहुँच सुनिश्चित की जा सके। दृष्टि दोष को कम करना ही इस योजना की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
इसी सेवा भाव और आंखों की सुरक्षा के क्षेत्र में 'डॉ. श्रॉफ चैरिटी आई हॉस्पिटल' (Dr. Shroff Charity Eye Hospital) एक नई उम्मीद बनकर उभरा है। इस संस्थान का इतिहास दशकों पुराना है और इसकी स्थापना ही मानवता की सेवा के लिए की गई थी। एससीईएच (SCEH) का मिशन महज़ इलाज करना नहीं, बल्कि उच्च स्तरीय नेत्र चिकित्सा को किफ़ायती और सुलभ बनाना है। संस्थान का सपना है कि धन के अभाव में किसी की आंखों की रोशनी न जाए। अपनी आधुनिक मशीनों और अनुभवी डॉक्टरों की टीम के साथ यह अस्पताल लाखों लोगों का जीवन रोशन कर रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं की कमी को देखते हुए, डॉ. श्रॉफ चैरिटी आई हॉस्पिटल ने लखीमपुर खीरी के 'मोहम्मदी' में अपना केंद्र स्थापित किया है। आज यह केंद्र इस पूरे क्षेत्र के सबसे बेहतरीन नेत्र अस्पतालों में शुमार है। दिल्ली के मुख्य अस्पताल की देखरेख में चलने वाला यह केंद्र स्थानीय निवासियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यहाँ आधुनिक उपकरणों से बारीकी से जांच की जाती है और विशेषज्ञों की निगरानी में जटिल ऑपरेशन किए जाते हैं।
मोहम्मदी और आसपास के ग्रामीणों को अब बेहतर इलाज के लिए बड़े शहरों के चक्कर काटने की ज़रूरत नहीं है। एससीईएच का यह केंद्र अपनी चैरिटी सेवाओं के लिए जाना जाता है, जहाँ ज़रूरतमंद मरीज़ों का विशेष ध्यान रखा जाता है। अस्पताल की टीम सहायता के लिए सदैव तत्पर रहती है। यह संस्थान सिर्फ़ इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों में जाकर लोगों को नेत्र रोगों से बचाव के तरीके भी सिखाता है, जो सरकारी मिशन के साथ तालमेल बिठाने की एक उत्कृष्ट मिसाल है।
कुल मिलाकर जागरूकता और समय पर लिया गया निर्णय ही आंखों को सुरक्षित रखने का सबसे बड़ा माध्यम है। जहाँ एक ओर 'क्लीवलैंड क्लिनिक' जैसी वैश्विक संस्थाएं हमें सचेत करती हैं, वहीं भारत सरकार के अभियान और डॉ. श्रॉफ चैरिटी आई हॉस्पिटल जैसे संस्थान ज़मीनी स्तर पर बदलाव ला रहे हैं। यदि हम लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें और उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठाएं, तो रोशनी का यह अधिकार हर व्यक्ति तक पहुँच सकता है।
संदर्भ
https://tinyurl.com/2alnbrng
https://tinyurl.com/27ahj6bt
https://tinyurl.com/25v5lzxj
https://tinyurl.com/2a2uhvy8