सोना-चांदी नहीं, अब 'डेटा' है असली संपत्ति! जानिए शाहजहांपुर कैसे बना डिजिटल गढ़।

संचार और सूचना प्रौद्योगिकी उपकरण
11-01-2026 09:05 AM
सोना-चांदी नहीं, अब 'डेटा' है असली संपत्ति! जानिए शाहजहांपुर कैसे बना डिजिटल गढ़।

आज के दौर में आईटी गैजेट्स (IT gadgets) “जैसे मोबाइल फोन, लैपटॉप, प्रिंटर और एलईडी स्क्रीन” अब केवल बेजान मशीनें नहीं रह गई हैं। ये वो छोटे निजी उपकरण हैं जिन्होंने हमारे काम, बैंकिंग, बातचीत और यहाँ तक कि हमारी यादों को सिकोड़कर जेब के आकार में बदल दिया है। लेकिन इसके साथ ही, तेजी से बदलती इलेक्ट्रॉनिक तकनीक ने हमारे सामने एक नई तरह की चुनौती खड़ी कर दी है। ये गैजेट्स प्लास्टिक और धातु के वो टुकड़े हैं जिन्हें हम या तो सुधारते हैं, बेचते हैं, या फिर फेंकने पर मजबूर हो जाते हैं। मानव इतिहास में यह बदलाव बहुत मायने रखता है क्योंकि यह तय करता है कि हम किसे कीमती मानते हैं (जैसे हमारा डेटा), हम अपने साथ क्या लेकर चलते हैं, और हमारे शहरों को किस नई मुसीबत (खतरनाक ई-कचरा) का सामना करना पड़ रहा है।

एक ऐतिहासिक शहर आधुनिक तकनीक से कैसे जुड़ रहा है?
शाहजहांपुर, जो 1813 में एक जिले के रूप में स्थापित हुआ था, आज अपनी ऐतिहासिक पहचान को बरकरार रखते हुए आधुनिक तकनीक से भी तालमेल बिठा रहा है। जिले की लोकेशन और यहाँ का बुनियादी ढांचा इस तकनीक को आम लोगों तक पहुँचाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। एमएसएमई (MSME) की रिपोर्ट बताती है कि जिले का सड़क और रेल नेटवर्क, साथ ही संचार के साधन, वह रीढ़ हैं जो इन गैजेट्स को दुकानों से निकालकर हम तक और बाजारों तक पहुँचाते हैं। जब एक पुराना शहर आधुनिक डिजिटल दुनिया से जुड़ता है, तो रास्तों और कनेक्टिविटी का महत्व और भी बढ़ जाता है।

वारंटी खत्म होने के बाद गैजेट्स का क्या होता है?
जब हम कोई नया फोन या लैपटॉप खरीदते हैं, तो उसकी कहानी खरीदने पर खत्म नहीं होती, बल्कि वहां से एक नई कहानी शुरू होती है—'मरम्मत की संस्कृति' (repair culture)। अगर हम शाहजहांपुर के औद्योगिक प्रोफाइल पर नज़र डालें, तो पाते हैं कि यहाँ "मोबाइल हैंडसेट रिपेयरिंग" और "कंप्यूटर हार्डवेयर" सुधारने वाली दुकानें बड़ी तादाद में मौजूद हैं। ये आंकड़े गवाही देते हैं कि जिले में कई लोगों की रोजी-रोटी इसी बात पर टिकी है कि गैजेट्स को उनकी वारंटी खत्म होने के बाद भी कैसे जिंदा रखा जाए। यह कोई 'जुगाड़' नहीं है, बल्कि एक पूरा आर्थिक सिस्टम है जो खराब हो चुके उपकरणों को फिर से काम लायक बनाता है।

आखिर यह 'ई-कचरा' साधारण कूड़े से अलग क्यों है?
हर उपकरण की एक उम्र होती है। जब फोन, लैपटॉप, प्रिंटर या एलईडी डिस्प्ले काम करना बंद कर देते हैं, तो वे 'ई-कचरा' (E-waste) बन जाते हैं। सरकार के मुताबिक, ई-कचरे में कंप्यूटर और मोबाइल जैसी चीजें शामिल हैं। इन्हें हम साधारण कूड़े की तरह डस्टबिन में नहीं फेंक सकते क्योंकि इनमें कीमती धातुओं के साथ-साथ जहरीले तत्व भी होते हैं। इसलिए, इनका वैज्ञानिक तरीके से निपटान और संसाधनों की रिकवरी (resource recovery) बहुत जरूरी है। यह कचरा केवल 'कचरा' नहीं, बल्कि दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले पार्ट्स का खजाना भी है।

क्या हमारा शहर इस नए 'खतरनाक कचरे' को संभालने के लिए तैयार है?
शाहजहांपुर में भी अब इस नए तरह के कचरे को संभालने के लिए नियम और योजनाएं काम कर रही हैं। शाहजहांपुर छावनी बोर्ड (Cantonment Board) ने अपने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों में ई-कचरे को एक अलग और खास श्रेणी में रखा है। यह साफ करता है कि पुराने गैजेट्स ने नगर निगमों की जिम्मेदारियों को बढ़ा दिया है। अब यह केवल झाड़ू लगाने या नाली साफ करने का मामला नहीं है, बल्कि खतरनाक इलेक्ट्रॉनिक कचरे को अलग करने और उसे संभालने का तकनीकी काम भी है।

इसी तरह, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) के तहत शाहजहांपुर के लिए जो एक्शन प्लान बना है, उसमें भी कचरा इकट्ठा करने और मटेरियल रिकवरी जैसी योजनाओं पर जोर दिया गया है। शहर के सिस्टम को अब इस तरह तैयार किया जा रहा है कि वह प्लास्टिक और गीले कचरे के साथ-साथ इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के अवशेषों को भी सही ठिकाने लगा सके।

अंत में, यह समझना बहुत जरूरी है कि ये गैजेट्स हमारे लिए केवल प्लास्टिक के डिब्बे नहीं हैं। हाल ही में दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट ने बताया कि शाहजहांपुर पुलिस ने सर्विलांस सेल की मदद से 61 खोए हुए मोबाइल फोन बरामद किए। जब पुलिस ने ये फोन उनके असली मालिकों को लौटाए, तो लोगों के चेहरों पर खुशी लौट आई। यह घटना साबित करती है कि मोबाइल फोन अब हमारी पहचान का हिस्सा बन चुके हैं। उनमें हमारा डेटा, हमारी पुरानी यादें और हमारे अपनों का संपर्क छिपा होता है। खोए हुए फोन का मिलना या खराब फोन का सुधरना, आधुनिक शहर की जिंदगी का एक बहुत भावुक पहलू है। यह तय करता है कि हम किसी चीज को वापस पाते हैं, उसे सुधारते हैं या हमेशा के लिए खो देते हैं।
 

संदर्भ 
https://tinyurl.com/2cqwpvra
https://tinyurl.com/22ezsu6y
https://tinyurl.com/2294nofm
https://tinyurl.com/286n27j2
https://tinyurl.com/25oghpko
https://tinyurl.com/256w6ywh 
 

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