समय - सीमा 9
मानव और उनकी इंद्रियाँ 10
मानव और उनके आविष्कार 10
भूगोल 10
जीव-जंतु 10
इतिहास गवाह है कि इंसान हमेशा से मौसम के भरोसे ही जिया है। हमारे पूर्वजों ने अपने घर वहीं बनाए जहाँ मौसम साफ रहता था। कब बारिश होगी और कब धूप खिलेगी—इन सवालों के जवाब ही तय करते थे कि वे कब खेती करेंगे और कब सफर पर निकलेंगे। आज भी हालात बहुत नहीं बदले हैं। सही मौसम पूर्वानुमान (Weather Forecast) सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि हमारी सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार है। अगर हम शाहजहांपुर की बात करें, तो यह शहर मौसम के दो अलग-अलग छोरों मानसून से पहले की जानलेवा गर्मी (Heat Stress) और उसके बाद आने वाली बाढ़ के बीच झूलता रहता है। सच तो यह है कि जलवायु एक 'मूक योजनाकार' (Silent Planner) है, जो चुपचाप हमारे शहर की रफ़्तार और दिशा तय करती है।
जब आप अखबार में पढ़ते हैं कि आज शाहजहांपुर का तापमान 'सामान्य' से ऊपर है, तो इसका असल मतलब क्या होता है?
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के रिकॉर्ड इसे बहुत अच्छे से समझाते हैं। शाहजहांपुर की वेधशाला (Observatory) रोजाना के तापमान और बारिश का हिसाब रखती है। लेकिन असली खेल 'प्रस्थान' या 'डिपार्चर' (Departure from Normal) का है। मान लीजिए आज तापमान 40 डिग्री है और पिछले कई सालों का औसत 38 डिग्री रहा है, तो माना जाएगा कि तापमान सामान्य से 2 डिग्री ज्यादा है। यही तुलना हमें बताती है कि आज की गर्मी या सर्दी हमारे शरीर के लिए कितनी खतरनाक हो सकती है।
इस 'सामान्य' (Normal) लेवल को तय करने के लिए आईएमडी (IMD) पुणे पिछले कई दशकों का डेटा इस्तेमाल करता है। शाहजहांपुर के लिए बने ये 'क्लाइमेटोलॉजिकल नॉर्मल्स' एक लक्ष्मण रेखा (बेसलाइन) का काम करते हैं। इसी के आधार पर वैज्ञानिक हमें बताते हैं कि शहर का मौसम पटरी पर है या बहक रहा है। यह डेटा सिर्फ खबरों के लिए नहीं, बल्कि खेती से लेकर शहर की नालियों की सफाई तक की प्लानिंग में काम आता है।
शाहजहांपुर में गर्मियों का मौसम अब सिर्फ पसीने पोंछने की बात नहीं रह गया है, बल्कि यह हमारी सेहत के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है। राष्ट्रीय रिपोर्ट्स साफ बताती हैं कि तापमान में गड़बड़ी (Temperature Anomalies) बढ़ रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग का 'वार्षिक जलवायु सारांश' यह इशारा करता है कि औसत तापमान लगातार ऊपर जा रहा है। शाहजहांपुर भी इस बदलाव की चपेट में है। दिन की चुभती जलन और रात की उमस अब आम बात हो गई है, जो सीधे तौर पर हमारे काम करने की ताकत को घटा रही है।
इस खतरे से निपटने के लिए 'उत्तर प्रदेश हीट वेव एक्शन प्लान' एक बहुत जरूरी हथियार है। यह प्लान बताता है कि पारा चढ़ने पर प्रशासन को क्या कदम उठाने चाहिए। इसमें 'अर्ली वार्निंग सिस्टम' यानी समय रहते चेतावनी देने पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है। शाहजहांपुर के लिए इसका मतलब है—लोगों को पहले ही अलर्ट करना, अस्पतालों को तैयार रखना और मजदूरों के काम के घंटे बदलना। यह सिर्फ सरकारी कागज नहीं, बल्कि लू (Heatwave) से जान बचाने का एक पक्का रोडमैप है।
गर्रा और खन्नौत नदियाँ मानसून में रौद्र रूप क्यों ले लेती हैं?
गर्मी का सितम कम होते ही शाहजहांपुर के सामने दूसरी बड़ी मुसीबत आ खड़ी होती है—बाढ़। जिले का भूगोल ही ऐसा है कि यहाँ की नदियाँ, गर्रा और खन्नौत, मानसून आते ही उफनने लगती हैं। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन नदियों का जलस्तर बहुत तेजी से बढ़ता है, जिससे किनारे वाले इलाकों में खतरा मंडराने लगता है। जब पहाड़ों पर बारिश होती है, तो वह पानी सीधा शहर के निचले इलाकों में घुस आता है।
बाढ़ का पानी सिर्फ नदी तक सीमित नहीं रहता, यह रिहायशी कॉलोनियों और हाईवे तक पहुँच जाता है। शहर के कई हिस्से टापू बन जाते हैं और रास्ते बंद हो जाते हैं। विश्वस्त मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि नदियों के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन को भी अलर्ट कर दिया है। ये हालात हमें चेतावनी देते हैं कि शहर की प्लानिंग करते समय नदियों के रास्ते (Floodplain) का ध्यान रखना अब बेहद जरूरी हो गया है।
पीले, नारंगी और लाल रंग के अलर्ट हमें क्या इशारा करते हैं?
इन खतरों के बीच जनता को सुरक्षित रखने के लिए सही जानकारी का होना बहुत जरूरी है। शाहजहांपुर के लिए मौसम विभाग की चेतावनियाँ इसमें हमारी मदद करती हैं। आईएमडी खतरों को बताने के लिए रंगों के कोड इस्तेमाल करता है—जैसे येलो (सचेत रहें), ऑरेंज (तैयार रहें) और रेड (तुरंत कार्रवाई करें)। जब शाहजहांपुर के लिए भारी बारिश का अलर्ट आता है, तो वह सिर्फ भविष्यवाणी नहीं होती, बल्कि वह एक सिग्नल होता है ताकि लोग अपनी सुरक्षा के लिए एक्शन ले सकें।
क्या हमारा शहर मौसम के बदलते मिजाज के लिए तैयार है?
शाहजहांपुर इस लड़ाई में अकेला नहीं है, यह पूरे राज्य के जलवायु परिवर्तन का हिस्सा है। 'उत्तर प्रदेश स्टेट एक्शन प्लान ऑन क्लाइमेट चेंज' (UP SAPCC) इस मुद्दे को बड़े पैमाने पर देखता है। रिपोर्ट कहती है कि कई जिले जलवायु जोखिम (Climate Risk) के साये में हैं। बात सिर्फ बाढ़ या सूखे की नहीं है, बल्कि हमारे शहरों को जलवायु-अनुकूल बनाने की है।
राज्य सरकार अब 'अनुकूलन' (Adaptation) पर जोर दे रही है। इसका मतलब है कि हमें मौसम के हिसाब से खुद को बदलना होगा। शाहजहांपुर के लिए जरूरी है—लू से बचने के तरीके, बाढ़ की सटीक जानकारी और पानी का सही मैनेजमेंट। भविष्य में मौसम और बिगड़ सकता है, इसलिए हमें अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को 'क्लाइमेट रेसिलिएंट' यानी मौसम की मार झेलने लायक बनाना होगा।
आखिर में, शाहजहांपुर के मौसम को हम केवल कुदरत का खेल नहीं कह सकते। यह एक प्रशासनिक जिम्मेदारी भी है। एक जागरूक नागरिक होने के नाते हमें देखना होगा कि कौन से मोहल्ले डूबते हैं और गर्मी का मजदूरों पर क्या असर पड़ रहा है। सरकारी आंकड़े और आईएमडी (IMD) का डेटा हमारे फैसलों में दिखना चाहिए। जब हम 'डिपार्चर फ्रॉम नॉर्मल' को समझेंगे, तभी हमारा शहर सुरक्षित रहेगा। गर्रा और खन्नौत का चढ़ता पानी और गर्मी की तपिश हमें बार-बार याद दिलाएगी कि प्रकृति के संकेतों को पढ़ना अब हमारी मजबूरी है।
संदर्भ
https://tinyurl.com/2ar6ka5l
https://tinyurl.com/22rsr7dr
https://tinyurl.com/22bql8m9
https://tinyurl.com/2clp6ucp
https://tinyurl.com/2xqj2jmb
https://tinyurl.com/24zq5jwr