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शाहजहांपुर के क्रिकेट प्रेमियों ने टेस्ट क्रिकेट में 400 रनों की नाबाद पारी और फ़र्स्ट-क्लास क्रिकेट में 501 रनों के सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर के बारे में ज़रूर सुना होगा। क्रिकेट की दुनिया के ये दोनों सबसे बड़े और अटूट रिकॉर्ड वेस्टइंडीज़ के महान बल्लेबाज़ ब्रायन लारा के नाम दर्ज़ हैं जो त्रिनिदाद और टोबैगो से ताल्लुक रखते हैं। लेकिन जिस देश ने क्रिकेट जगत को ब्रायन लारा जैसे जादुई खिलाड़ी दिए, वहां इस खेल की शुरुआत का इतिहास बेहद संघर्षपूर्ण और सामाजिक भेदभाव से भरा रहा है। त्रिनिदाद और टोबैगो की खेल संस्कृति में क्रिकेट का एक बहुत ही खास स्थान है। यह खेल महज़ चौके-छक्के लगाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि औपनिवेशिक काल के दौरान इसे स्थानीय आबादी के बीच प्रतिरोध, समानता और राष्ट्रीय गौरव के एक बड़े प्रतीक के रूप में देखा गया। आज यह खेल कैरेबियाई द्वीपों को एकजुट करने वाली एक बहुत बड़ी ताक़त बन चुका है।
त्रिनिदाद और टोबैगो में क्रिकेट की शुरुआत और शुरुआती क्लबों का इतिहास क्या है?
त्रिनिदाद और टोबैगो में क्रिकेट का खेल उन्नीसवीं सदी में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान लाया गया था। शुरुआती दौर में यह खेल पूरी तरह से अंग्रेज़ों और कुलीन वर्ग की जागीर हुआ करता था। अठारह सौ सत्तर के दशक के अंत में कुलीन श्वेत लोगों (मुख्य रूप से अंग्रेज़ों) के एक समूह ने 'सॉवरेन क्रिकेट क्लब' की स्थापना की थी। वे लोग क्वींस पार्क सवाना में क्रिकेट खेला करते थे। यह जानना भी बेहद दिलचस्प है कि इंग्लैंड की टीम के दूसरे कप्तान जॉर्ज आर. सी. हैरिस असल में त्रिनिदाद में ही पैदा हुए थे। वे औपनिवेशिक गवर्नर लॉर्ड हैरिस और द्वीप में जन्मी इंग्लिश क्रियोल सारा कमिंस के बेटे थे। अठारह सौ अस्सी के दशक के अंत तक यह खेल काफी लोकप्रिय हो गया और सॉवरेन क्लब की जगह 'क्वींस पार्क क्रिकेट क्लब' ने ले ली। धीरे-धीरे यह खेल बागानों की सीमाओं से बाहर निकला और एफ्रो-त्रिनिदाद और इंडो-त्रिनिदाद समुदायों के बीच तेज़ी से फैलने लगा। बीसवीं सदी की शुरुआत तक हालात ऐसे हो गए थे कि क्रिकेट समाज के हर हिस्से का लोकप्रिय खेल बन गया।
क्वींस पार्क ओवल मैदान का विकास और इसका ऐतिहासिक सफर कैसा रहा है?
क्वींस पार्क क्रिकेट क्लब ने साल 1896 में पुरानी सरकारी फार्म की ज़मीन का एक हिस्सा हासिल किया, जिसे आज सेंट क्लेयर कहा जाता है। इस ज़मीन को एक हज़ार डॉलर के सालाना किराये पर 199 सालों के लिए पट्टे पर लिया गया था और यही जगह बाद में ऐतिहासिक 'क्वींस पार्क ओवल' मैदान बनी। इस जगह को समतल करके घास उगाई गई और एक भव्य पवेलियन बनाया गया। महिलाओं के लिए एक अलग स्टैंड (जो विक्टोरियन युग में लैंगिक अधिकारों के लिए एक बड़ी बात थी) और आम जनता के लिए भी स्टैंड बनाए गए। हालांकि, इस क्लब की सदस्यता नीतियां बेहद भेदभावपूर्ण थीं, जिसका एडगर मैरेसे-स्मिथ जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध किया। आर्थिक तंगी के कारण 1909 में क्लब को सरकार से 8,500 डॉलर का बेलआउट पैकेज लेना पड़ा, जिसे चुकाने में तीस साल लग गए। साल 1930 में इसी मैदान पर इंग्लिश क्रिकेटर पैट्सी हेंड्रेन ने पहला टेस्ट शतक लगाया था, जिसे देखने के लिए दर्शक मैदान के पास लगे समन के पेड़ों पर चढ़ गए थे। साल 1952 में पुराने पवेलियन की मरम्मत हुई और 1966 में महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय और प्रिंस फिलिप के आधिकारिक दौरे के लिए यहाँ एक बाल रैली का आयोजन किया गया था। साल 2007 के क्रिकेट विश्व कप से पहले इस मैदान का सत्तर मिलियन डॉलर की लागत से आधुनिकीकरण किया गया, जिसके बाद इसकी क्षमता बीस हज़ार दर्शकों से अधिक हो गई। उत्तरी रेंज की जंगली पहाड़ियों की पृष्ठभूमि वाला यह मैदान वेस्टइंडीज़ के सबसे खूबसूरत मैदानों में गिना जाता है।

साल 1891 का पहला टूर्नामेंट क्या था और सामाजिक समानता की लड़ाई कैसे लड़ी गई?
कैरेबियाई द्वीपों पर दास प्रथा खत्म होने के बाद भी वहां के श्वेत मध्यम वर्ग ने अपने क्लबों में अश्वेत लोगों के खेलने पर पाबंदी लगा रखी थी। साल 1891 में बारबाडोस, त्रिनिदाद और ब्रिटिश गुयाना के बीच इतिहास का पहला इंटरकोलोनियल टूर्नामेंट आयोजित किया गया था, जिसे स्थानीय अश्वेत लोग मैदान के बाहर से ईर्ष्या के साथ देखने के लिए मजबूर थे। लेकिन जल्द ही अश्वेत लोगों ने अपने क्लब बना लिए और वे क्लब प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने लगे। त्रिनिदाद में क्लब क्रिकेट खेलने वाले मशहूर लेखक सी. एल. आर. जेम्स के अनुसार, क्रिकेट का मैदान एक ऐसी जगह बन गया था जहां औपनिवेशिक लोग अपनी राजनीतिक रूप से दबी हुई सामाजिक भावनाओं को खुलकर व्यक्त कर सकते थे। बाहरी समाज में भले ही भारी नस्लीय भेदभाव हो, लेकिन क्रिकेट के मैदान पर सभी इंसान सैद्धांतिक रूप से बिल्कुल एक समान माने जाते थे। सत्तर और अस्सी के दशक में जब वेस्टइंडीज़ ने क्रिकेट में इंग्लैंड को हराया, तो इसे औपनिवेशिक ताकतों के खिलाफ एक बहुत कड़े प्रतिरोध और कैरेबियाई एकता के प्रतीक के रूप में देखा गया।

महान बल्लेबाज़ ब्रायन लारा का शुरुआती जीवन और उनके क्रिकेट सफर की शुरुआत कैसे हुई?
त्रिनिदाद ने विश्व क्रिकेट को कई महान खिलाड़ी दिए हैं, जिनमें सबसे बड़ा नाम ब्रायन लारा का है। ब्रायन लारा का जन्म साल 1969 में हुआ था। उनके पिता का नाम बंटी और माँ का नाम पर्ल लारा था। ब्रायन लारा अपने ग्यारह भाई-बहनों में से एक थे। जब वे महज़ छह साल के थे, तब उनके पिता बंटी और उनकी बड़ी बहन एग्नेस साइरस ने उन्हें स्थानीय हार्वर्ड क्लब कोचिंग क्लिनिक में दाखिला दिलवाया था, जहां वे हर रविवार को कोचिंग लिया करते थे। इतनी कम उम्र में कोचिंग मिलने के कारण लारा ने सही बल्लेबाज़ी तकनीक बहुत जल्दी सीख ली थी। उनके भाई विंस्टन भी एक बहुत ही स्टाइलिश दाएं हाथ के बल्लेबाज़ थे, जो लारा के लिए एक आदर्श की तरह थे। लारा की शुरुआती शिक्षा सेंट जोसेफ रोमन कैथोलिक प्राइमरी स्कूल में हुई। इसके बाद वे लोअर सांता क्रूज़ के मोरो रोड पर स्थित सैन जुआन सेकेंडरी स्कूल गए। चौदह साल की उम्र में वे फातिमा कॉलेज चले गए, जहां क्रिकेट कोच हैरी रामदास की देखरेख में उनके खेल में ज़बरदस्त निखार आया और पंद्रह साल की उम्र में ही वे वेस्टइंडीज़ की अंडर-19 टीम के लिए खेलने लगे थे।
ब्रायन लारा के ऐतिहासिक रिकॉर्ड और त्रिनिदाद के अन्य दिग्गज खिलाड़ियों का क्या योगदान है?
जनवरी 1988 में ब्रायन लारा ने त्रिनिदाद और टोबैगो के लिए अपना पहला फ़र्स्ट-क्लास मैच खेला। साल 1990 में, महज़ बीस साल की उम्र में वे त्रिनिदाद और टोबैगो टीम के सबसे कम उम्र के कप्तान बन गए। उसी साल उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ वेस्टइंडीज़ के लिए अपना टेस्ट डेब्यू भी किया। दुर्भाग्य से, साल 1989 में उनके पिता का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया और वे अपने बेटे को टेस्ट क्रिकेट खेलते हुए कभी नहीं देख पाए। साल 2002 में कैंसर के कारण उनकी माँ का भी निधन हो गया। लारा के नाम फ़र्स्ट-क्लास क्रिकेट में नाबाद 501 रन और टेस्ट क्रिकेट में नाबाद 400 रन बनाने का विश्व रिकॉर्ड दर्ज़ है। उनके इस अतुलनीय योगदान के लिए साल 2012 में उन्हें इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) के हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया। लारा के अलावा, जेफ्री स्टोलमेयर, गेरी गोमेज़ और डेरिक मरे जैसे शानदार खिलाड़ी भी क्वींस पार्क क्लब की ही देन हैं। साल 1901 में जन्मे महान ऑलराउंडर लीरी कॉन्सटेंटाइन और आधुनिक दौर के आक्रामक टी-ट्वेंटी खिलाड़ी कीरोन पोलार्ड ने भी त्रिनिदाद का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है। महिला क्रिकेट में भी अनीसा मोहम्मद जैसी खिलाड़ियों ने टी-ट्वेंटी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दुनिया की प्रमुख विकेट लेने वाली गेंदबाज़ बनकर एक बहुत बड़ा मुकाम हासिल किया है।
संदर्भ
https://tinyurl.com/22tjr87n
https://tinyurl.com/248usnmw
https://tinyurl.com/2yvkn99m
https://tinyurl.com/22h939zp