एआई के दौर में खतरे में आपकी निजता, क्या हमेशा के लिए इंटरनेट पर दर्ज हो रहा है आपका डेटा?

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एआई के दौर में खतरे में आपकी निजता, क्या हमेशा के लिए इंटरनेट पर दर्ज हो रहा है आपका डेटा?

शाहजहांपुर हो या दुनिया का कोई अन्य कोना, आज हर किसी के हाथ में मौजूद स्मार्टफोन पर तेज़ी से संदेश पहुंचाने वाले प्लेटफॉर्म की कहानी एक छोटे से हॉस्टल के कमरे से शुरू हुई थी। साल 2004 में 19 साल के मार्क ज़करबर्ग ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के अपने हॉस्टल के कमरे से 'द फेसबुक' (The Facebook) नाम के एक नेटवर्क की शुरुआत की थी। जो चीज एक कॉलेज नेटवर्किंग साइट के रूप में शुरू हुई थी, वह तेजी से दुनिया भर में फैल गई और 2004 के अंत तक इसके दस लाख सक्रिय उपयोगकर्ता हो गए थे। साल 2005 में इस कंपनी को “पेपाल” (PayPal) के सह-संस्थापक पीटर थील से अपना पहला बड़ा निवेश मिला और इसका नाम 'द फेसबुक' से बदलकर 'फेसबुक' कर दिया गया। साल 2008 तक इसके उपयोगकर्ताओं की संख्या दस करोड़ को पार कर गई। इसके बाद कंपनी ने 2012 में इंस्टाग्राम को एक अरब डॉलर में और 2014 में वॉट्सऐप को खरीदकर अपना साम्राज्य और बड़ा कर लिया।

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अक्टूबर 2021 में कंपनी ने अपना नाम फेसबुक से बदलकर 'मेटा' रख लिया, जो सोशल मीडिया से आगे बढ़कर 'मेटावर्स' यानी एक आभासी दुनिया के निर्माण के उनके नजरिए को दर्शाता था। शुरुआती झटकों के बाद, 2026 की शुरुआत तक मेटा 1.5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के बाजार पूंजीकरण के साथ दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक बन चुकी है। 2024 की पहली तिमाही तक 3.24 अरब लोग हर दिन फेसबुक, वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम या मैसेंजर में से कम से कम एक ऐप का इस्तेमाल कर रहे थे, जिसका मतलब है कि दुनिया के 70 प्रतिशत से ज्यादा इंटरनेट उपयोगकर्ता हर दिन मेटा से जुड़े हुए हैं। भारत में वॉट्सऐप के 50 करोड़ उपयोगकर्ता हैं। जो कंपनी कभी सिर्फ लोगों को जोड़ने का काम करती थी, वह अब ओपन-वेट्स एआई इकोसिस्टम की निर्माता बन चुकी है।

क्या आपका हर क्लिक और लोकेशन, कंपनी के सर्वर में खामोशी से दर्ज़ हो रहा है?
जब आप अपना अकाउंट बनाते हैं तो मेटा को आपका नाम, जन्मतिथि, ईमेल पता और वॉट्सऐप इस्तेमाल करने पर फोन नंबर मिल जाता है। लेकिन यह विशाल कंपनी सिर्फ आपके द्वारा दी गई जानकारी तक सीमित नहीं है। मेटा आपके द्वारा अपलोड की गई तस्वीरों के मेटाडेटा से आपकी लोकेशन तक का पता लगा लेती है। इसके अलावा, यह कंपनी तकनीकी डेटा भी इकट्ठा करती है, जैसे कि आपके फोन का ब्रांड, ऑपरेटिंग सिस्टम, इंस्टॉल किए गए ऐप, वाई-फाई, ब्लूटूथ, सेल टावर सिग्नल और आईपी एड्रेस। इन सबके जरिए फेसबुक यह भी जान लेता है कि आप किसके साथ रहते हैं।

चौंकाने वाली बात यह है कि अगर आपका फेसबुक पर अकाउंट नहीं भी है, तब भी कंपनी आपको ट्रैक कर सकती है। इंटरनेट ब्राउज़ करते समय जिन वेबसाइटों पर 'फेसबुक पिक्सल' या सोशल एपीआई लगा होता है, वे आपके उस साइट पर जाने का डेटा सीधे फेसबुक को भेज देती हैं। इसके अलावा, जब लोग अपने फोन की कॉन्टैक्ट लिस्ट फेसबुक पर अपलोड करते हैं, तो आपका नंबर भी बिना आपकी मर्जी के उनके पास पहुंच जाता है। यूरोपीय संघ में 'जीडीपीआर' जैसे सख्त कानून हैं जो राजनीतिक झुकाव और स्वास्थ्य जैसी निजी जानकारी की सुरक्षा करते हैं। लेकिन अमेरिका और कई अन्य देशों में जहां निजता के कड़े कानून नहीं हैं, वहां कंपनी इस विस्तृत डेटा का इस्तेमाल यूजर्स को प्रभावित करने और उन्हें बहुत ही सटीक विज्ञापन दिखाने के लिए करती है। 

क्या आपकी सार्वजनिक तस्वीरें और पोस्ट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ईंधन बन रही हैं?
मेटा की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रणनीति में 'लामा' (एलएलएएमए) मॉडल एक मुख्य हिस्सा बन चुका है। पहले यह दावा किया जाता था कि लामा मॉडल को फेसबुक के हर प्रकार के डेटा पर प्रशिक्षित किया गया है, लेकिन मेटा ने इससे इनकार किया है। मेटा के पुराने मॉडल लामा 2 को पूरी तरह से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध डेटासेट, जैसे कॉमन क्रॉल और विकिपीडिया पर प्रशिक्षित किया गया था, और उसमें कंपनी के प्लेटफॉर्म का कोई उपयोगकर्ता डेटा नहीं था। लेकिन लामा 3 और लामा 4 के साथ मेटा ने अपनी रणनीति बदल दी। मेटा ने आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार किया है कि लामा 3 को प्रशिक्षित करने के लिए फेसबुक और इंस्टाग्राम की सार्वजनिक रूप से साझा की गई पोस्ट का इस्तेमाल किया गया है।

कंपनी के अनुसार, इस प्रशिक्षण में केवल सार्वजनिक पोस्ट, टिप्पणियां और सार्वजनिक रूप से देखे जा सकने वाले चित्र शामिल हैं, जो इंटरनेट पर किसी के भी देखने के लिए उपलब्ध हैं। मेटा ने स्पष्ट किया है कि डायरेक्ट मैसेज (निजी संदेश) या निजी प्रोफाइल जानकारी जैसे डेटा का इस्तेमाल इसमें नहीं किया जाता है। मार्क ज़करबर्ग ने खुद एक अर्निंग्स कॉल में बताया कि मेटा के पास मौजूद सार्वजनिक फेसबुक और इंस्टाग्राम डेटा की मात्रा इंटरनेट के सबसे बड़े डेटाबेस 'कॉमन क्रॉल' से भी ज्यादा है। यह विशाल डेटा मेटा को क्षेत्रीय भाषा, आम बोलचाल के लहजे और सांस्कृतिक बातचीत को समझने में एक बड़ी बढ़त देता है। लामा 4 के प्रशिक्षण में अरबों तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है, जो एआई को टेक्स्ट और दृश्य दोनों को समझने में सक्षम बनाता है। 

क्या सोशल मीडिया कंपनी अब पूरी तरह से एआई कंपनी में तब्दील हो चुकी है?
साल 2026 तक मेटा प्लेटफॉर्म्स ने सोशल नेटवर्किंग कंपनी से खुद को एक बुनियादी 'एआई-फर्स्ट' उपयोगिता के रूप में पूरी तरह से बदल लिया है। कंपनी का 'रियलिटी लैब्स' विभाग भले ही 2025 में 19.2 अरब डॉलर के घाटे में रहा हो, लेकिन कंपनी का मानना है कि यह भविष्य के कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म का प्रवेश द्वार है। मेटा का 'लामा 4' मॉडल जिसे 'बेहेमोथ' कहा जाता है, इस समय एआई की दुनिया में एक मानक बन चुका है और लाखों डेवलपर्स इसका उपयोग कर रहे हैं। 'लामा 5' पर अभी काम चल रहा है जो वीडियो को भी मूल रूप से समझ सकेगा।

मेटा अब सिर्फ फोन की स्क्रीन तक सीमित नहीं है। हार्डवेयर के मोर्चे पर कंपनी के 'रे-बैन मेटा स्मार्ट ग्लासेस' ने बाजार में तहलका मचा दिया है और अकेले 2025 में इसके 70 लाख यूनिट बिके हैं। ये चश्मे 'मेटा एआई' नाम के वॉयस-एक्टिवेटेड असिस्टेंट का मुख्य जरिया बन गए हैं। साल 2026 के इस दौर को 'एजेंटिक एआई' का दौर कहा जा रहा है, जहां एआई सिर्फ सवालों के जवाब नहीं देता, बल्कि आपके लिए काम भी करता है, जैसे यात्रा की बुकिंग करना या विज्ञापन अभियान चलाना। अपनी तकनीक को ओपन-सोर्स (मुफ्त में उपलब्ध) करके मेटा चाहती है कि उसका एआई मॉडल ही दुनिया भर में भविष्य का मुख्य ढांचा बन जाए। 

क्या एआई के इस दौर में आपके डेटा की निजता हमेशा के लिए खतरे में है?
मेटा द्वारा एआई प्रशिक्षण के लिए डेटा के उपयोग को लेकर गंभीर चिंताएं भी पैदा हो रही हैं। मेटा ने 27 मई 2025 से फेसबुक और इंस्टाग्राम के सार्वजनिक पोस्ट, तस्वीरें, वीडियो और कैप्शन को अपनी एआई के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। वॉट्सऐप के निजी चैट 'एंड-टू-एंड' एन्क्रिप्टेड होते हैं, इसलिए कंपनी उनका इस्तेमाल नहीं कर सकती, लेकिन अगर आप वॉट्सऐप के अंदर 'मेटा एआई' बोट से बात करते हैं, तो उस बातचीत को सार्वजनिक मानकर एआई को प्रशिक्षित करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

इस डेटा उपयोग के बड़े खतरे हैं। एक बार जब आपका डेटा एआई को प्रशिक्षित करने के लिए इस्तेमाल हो जाता है, तो उसे वहां से वापस निकालना या मिटाना असंभव हो जाता है। इसके अलावा, मेटा इस डेटा के जरिए उपयोगकर्ताओं की पसंद और व्यवहार का गहराई से विश्लेषण करके और अधिक लक्षित विज्ञापन दिखा सकती है। हालांकि आप फेसबुक और इंस्टाग्राम की प्राइवेसी सेटिंग्स में जाकर 'राइट ऑफ ऑब्जेक्शन' (आपत्ति का अधिकार) फॉर्म भरकर अपने डेटा को एआई ट्रेनिंग में जाने से रोक सकते हैं, लेकिन यह सिर्फ आगे के डेटा के लिए लागू होगा। अगर आप समय सीमा के बाद आपत्ति जताते हैं, तो पहले से प्रशिक्षित डेटा को कभी पलटा नहीं जा सकेगा। यह स्पष्ट है कि आज के डिजिटल युग में अपनी निजता की रक्षा करना खुद उपयोगकर्ता की जिम्मेदारी बन गया है।

संदर्भ 
1. https://tinyurl.com/2d3kt26a
2. https://tinyurl.com/2b7tnzbg
3. https://tinyurl.com/24vdzptr
4. https://tinyurl.com/29rjrm74
5. https://tinyurl.com/27z4vuvq 

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