उरुग्वे की विश्व कप कहानी और फुटबॉल इतिहास के यादगार पल

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उरुग्वे फुटबॉल इतिहास की सबसे सफल राष्ट्रीय टीमों में से एक रही है। वर्ष 1930 में जब पहला फीफा विश्व कप आयोजित हुआ, तब उरुग्वे ने मेज़बान देश के रूप में अर्जेंटीना को 4-2 से हराकर इतिहास का पहला विश्व कप अपने नाम किया। उस समय उरुग्वे को दुनिया की सबसे मजबूत फुटबॉल टीमों में गिना जाता था।

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इसके बाद 1950 विश्व कप में उरुग्वे ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। ब्राज़ील में खेले गए टूर्नामेंट के निर्णायक मुकाबले में उसने मेज़बान और प्रबल दावेदार ब्राज़ील को 2-1 से हरा दिया। लगभग दो लाख दर्शकों के सामने मिली इस जीत को "माराकानाज़ो" के नाम से जाना जाता है और यह आज भी खेल इतिहास के सबसे बड़े उलटफेरों में गिनी जाती है।

उरुग्वे का नाम 2010 विश्व कप में भी एक विवादास्पद लेकिन यादगार घटना के कारण चर्चा में रहा। क्वार्टर फाइनल में घाना के खिलाफ मैच के अंतिम क्षणों में लुइज़ सुआरेज़ (Luis Suárez) ने गोल लाइन पर खड़े होकर अपने हाथों से निश्चित गोल को रोक दिया। इसके लिए उन्हें लाल कार्ड मिला, लेकिन घाना पेनल्टी का फायदा नहीं उठा सका। बाद में उरुग्वे ने पेनल्टी शूटआउट जीतकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। यह घटना आज भी विश्व कप इतिहास के सबसे चर्चित पलों में से एक मानी जाती है।

संदर्भ -
https://tinyurl.com/yw294zaj
https://tinyurl.com/2xhcdvnh 
https://tinyurl.com/mwtukbv4 
https://tinyurl.com/y2uvyh5u 

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