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रोगाणुरोधी प्रतिरोध के उद्भव और प्रसार को सीमित करने की आवश्यकता को संबोधित करने के प्रयास में, विटालिस फेज थेरेपी (Vitalis Phage Therapy) हाल ही में भारत में शुरू की गई है। इस पहल को प्रणव जौहरी द्वारा विकसित किया गया है, इन्होंने फेज थेरेपी से अपने जीवाणुनाशक-प्रतिरोधी संक्रमण का सफलतापूर्वक इलाज किया। विटालिस फेज थैरेपी में भारत के मरीजों के लिए जॉर्जिया (Georgia) के त्बिलिसी (Tbilisi) में एलियावा इंस्टीट्यूट ऑफ बैक्टीरियोफेज, माइक्रोबायोलॉजी और वायरोलॉजी (Eliava Institute of Bacteriophages, Microbiology and Virology) द्वारा पेश की गई फेज थेरेपी की सुविधा है। रोगाणुरोधी प्रतिरोध भारत में पहले से ही एक स्वास्थ्य आपातकाल है। हर साल, अनुमानित 58,000 नवजात बच्चे रक्तपूतिता के कारण मर जाते हैं क्योंकि जीवाणुनाशक बैक्टीरिया के संक्रमण का इलाज करने में विफल होते हैं। अप्रैल 2017 में, रोगाणुरोधी प्रतिरोध पर दिल्ली घोषणा के साथ रोगाणुरोधी प्रतिरोध (2017-21) पर राष्ट्रीय कार्य योजना की घोषणा की गई थी, देश में रोगाणुरोधी प्रतिरोध की रोकथाम पर एक सहयोगी दृष्टिकोण अपनाने के लिए 12 मंत्रालयों द्वारा संयुक्त घोषणा की गई थी।
वहीं 2017 में, मेरठ में एक दवा प्रतिरोधी रोगज़नक़ का पता चला था और उपचार को फ्रिंज (Fringe) के रूप में खारिज कर दिया गया था। मेरठ में घर-घर जा कर जांच करने पर 258 व्यक्तियों में तीसरे चरण के तपेदिक के लक्षण पाए गए। 7 जनवरी से 17 जनवरी तक चलाए गए अभियान में, चिकित्सकों और स्वास्थ्य अधिकारियों के 163 समूहों ने 4.74 लाख लोगों की जांच करने के लिए हज़ारों घरों का दौरा किया था। 2017 में किये गए दौरे में तपेदिक से पीड़ित 357 रोगी और 2018-2019 के चरण में 392 रोगी पाए गए। केंद्र सरकार ने 2025 तक इस बीमारी को जड़ से खत्म करने का लक्ष्य रखते हुए सभी राज्यों को "सक्रिय खोज" शुरू करने का निर्देश दिया। भारत में जीवाणुनाशक दवाओं का उपयोग दुनिया भर में सबसे अधिक होता है यही वजह है कि भारत में रोगियों के लिए इस उपचार को उपलब्ध कराने पर ध्यान देने की आवश्यकता है। सामान्य जीवाणु रोगजनकों में जीवाणुनाशक प्रतिरोध के उच्च स्तर दिखाई देते हैं। हाल में एक अध्ययन के अनुसार, 38% एमआरएसए (MRSA) संक्रमण जीवाणुनाशक दवाओं के लिए प्रतिरोधी हैं, जबकि 43% स्यूडोमोनस एरुगिनोसा (Pseudomonas Aeruginosa) संक्रमण जीवाणुनाशक दवाओं के कार्बापेनम (Carbapenem) वर्ग के लिए प्रतिरोधी हैं।
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