जौनपुरवासियों युवाओं में बढ़ता धूम्रपान केवल आदत नहीं एक गंभीर चेतावनी है

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07-01-2026 07:24 AM
जौनपुरवासियों युवाओं में बढ़ता धूम्रपान केवल आदत नहीं एक गंभीर चेतावनी है

जौनपुरवासियों हमारा शहर हमेशा से अपने मज़बूत पारिवारिक मूल्यों, आपसी जुड़ाव और पीढ़ियों के बीच गहरे रिश्तों के लिए जाना जाता रहा है। यहाँ के युवा सिर्फ़ अपने घरों की उम्मीद नहीं होते, बल्कि पूरे समाज के भविष्य की नींव होते हैं। ऐसे में जब धूम्रपान और तंबाकू जैसी आदतें कम उम्र में ही जीवन का हिस्सा बनने लगती हैं, तो यह केवल किसी एक व्यक्ति की समस्या नहीं रहती, बल्कि पूरे समाज के लिए चिंता का कारण बन जाती है। कई बार धूम्रपान को तनाव से राहत या आधुनिक जीवनशैली का हिस्सा मान लिया जाता है, लेकिन इसके पीछे छिपे गंभीर नुकसान अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिए जाते हैं। जौनपुर जैसे शहर में, जहाँ परिवार और समाज की भूमिका आज भी मज़बूत है, यह ज़रूरी हो जाता है कि हम इस मुद्दे पर खुलकर बात करें और अपने युवाओं को समय रहते सही दिशा दिखाएँ।
आज के इस लेख में हम सबसे पहले यह जानेंगे कि धूम्रपान वास्तव में क्या है और यह शरीर को कैसे नुकसान पहुँचाता है। इसके बाद हम यह समझेंगे कि जौनपुर के युवाओं में तंबाकू का चलन क्यों बढ़ रहा है और इसका उनके स्वास्थ्य, सोच और भविष्य पर क्या असर पड़ता है। अंत में हम अक्टूबर 2025 में जौनपुर में शुरू हुए तंबाकू मुक्त अभियान की बात करेंगे और यह समझेंगे कि सरकार, समाज और परिवार मिलकर युवाओं को इस लत से बाहर निकालने में कैसे मदद कर सकते हैं।

धूम्रपान क्या है और यह शरीर को कैसे नुकसान पहुँचाता है
धूम्रपान तब होता है जब कोई व्यक्ति तंबाकू से बने उत्पादों को जलाकर उससे निकलने वाले धुएँ को साँस के साथ अपने शरीर के भीतर ले जाता है। इस धुएँ में निकोटिन (Nicotin) सहित कई ऐसे रसायन होते हैं जो सीधे फेफड़ों और रक्त प्रवाह में पहुँच जाते हैं। शुरुआत में निकोटिन मस्तिष्क को कुछ देर के लिए राहत या सतर्कता का एहसास देता है, लेकिन यही एहसास धीरे धीरे लत में बदल जाता है। चिकित्सकीय अध्ययनों के अनुसार धूम्रपान फेफड़ों की क्षमता को कम करता है, दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ाता है और लंबे समय में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों की वजह बन सकता है। इसका सबसे खतरनाक पहलू यह है कि इसका नुकसान तुरंत नहीं दिखता, बल्कि समय के साथ शरीर को भीतर से कमजोर करता चला जाता है, जब तक कि वापसी का रास्ता मुश्किल न हो जाए।

युवाओं में तंबाकू का उपयोग और उसका भविष्य पर असर
युवाओं में तंबाकू का उपयोग सबसे ज़्यादा चिंता का विषय इसलिए है क्योंकि यही वह उम्र होती है जब शरीर और दिमाग दोनों पूरी तरह विकसित हो रहे होते हैं। इस दौर में धूम्रपान या तंबाकू की आदत लगना भविष्य की सेहत के साथ सीधा समझौता करना है। चिकित्सकीय तथ्यों के अनुसार तंबाकू युवाओं के मस्तिष्क विकास को प्रभावित करता है, जिससे एकाग्रता कम होती है, सीखने की क्षमता घटती है और स्वभाव में चिड़चिड़ापन बढ़ने लगता है। इसके साथ ही सांस से जुड़ी समस्याएँ जल्दी शुरू हो जाती हैं और खेलकूद या शारीरिक गतिविधियों से दूरी बनने लगती है।कई बार जौनपुर के युवा दोस्तों के दबाव, जिज्ञासा या फिल्मों और सोशल मीडिया (social media) में दिखाए जाने वाले गलत संदेशों से प्रभावित होकर तंबाकू की ओर बढ़ जाते हैं। शुरुआत में यह केवल एक प्रयोग लगता है, लेकिन यही प्रयोग धीरे धीरे आदत और फिर लत में बदल जाता है। जब तक इसका एहसास होता है, तब तक शरीर और मन दोनों इसकी कीमत चुका चुके होते हैं। ऐसे में यह समझना बेहद ज़रूरी है कि समय रहते धूम्रपान छोड़ना ही सबसे समझदारी भरा फैसला है।

तंबाकू का मानसिक और सामाजिक असर
तंबाकू केवल शरीर को नुकसान नहीं पहुँचाता, बल्कि युवाओं के मानसिक और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित करता है। धूम्रपान करने वाले युवाओं में तनाव, बेचैनी और आत्मविश्वास की कमी देखी जाती है। कई बार वे अपनी आदत को परिवार से छिपाने लगते हैं, जिससे रिश्तों में दूरी बढ़ती है। आर्थिक रूप से भी यह आदत धीरे धीरे बोझ बन जाती है। जब बड़ी संख्या में युवा इस आदत की चपेट में आते हैं, तो समाज पर स्वास्थ्य खर्च बढ़ता है और काम करने की क्षमता घटती है। इस तरह तंबाकू एक निजी नहीं बल्कि सामूहिक समस्या बन जाता है।जौनपुर में अक्टूबर 2025 में शुरू हुआ तंबाकू मुक्त अभियान
इन सभी चिंताओं को देखते हुए जौनपुर में अक्टूबर 2025 में तंबाकू मुक्त युवा अभियान की शुरुआत की गई। इस अभियान का उद्देश्य युवाओं और आम नागरिकों को यह समझाना था कि तंबाकू केवल आज की सेहत नहीं, बल्कि पूरे भविष्य को प्रभावित करता है। स्थानीय प्रशासन, स्कूलों, कॉलेजों, सामाजिक संगठनों और स्वास्थ्य विभाग ने मिलकर जागरूकता रैलियाँ, संवाद कार्यक्रम और सार्वजनिक बैठकों का आयोजन किया। इन कार्यक्रमों में युवाओं से सीधे बातचीत की गई और उन्हें आसान भाषा में बताया गया कि धूम्रपान छोड़ने से उनका जीवन किस तरह बेहतर हो सकता है। इस अभियान की सबसे सकारात्मक बात यह रही कि इसमें डराने के बजाय समझाने पर ज़ोर दिया गया। युवाओं को सवाल पूछने और अपनी उलझनें साझा करने का मौका मिला, जिससे वे खुद यह महसूस कर सकें कि तंबाकू छोड़ना किसी मजबूरी नहीं बल्कि अपने भविष्य के लिए एक सही कदम है।सरकार की भूमिका और आगे की राह
भारत सरकार ने तंबाकू नियंत्रण के लिए कानून, चेतावनी अभियान और राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम जैसे कई महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। पैकेट पर बड़े चेतावनी चित्र, विज्ञापनों पर प्रतिबंध और हाल के वर्षों में तंबाकू उत्पादों पर बढ़ाया गया टैक्स इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं, ताकि तंबाकू आम लोगों की पहुँच से दूर हो और इसके उपयोग को हतोत्साहित किया जा सके। जौनपुर में शुरू हुआ तंबाकू मुक्त अभियान इन राष्ट्रीय प्रयासों को ज़मीनी स्तर पर मजबूती देता है। लेकिन असली बदलाव तभी संभव है जब युवा खुद यह समझें कि बढ़ती कीमतें केवल सरकार की सख़्ती नहीं बल्कि एक संकेत हैं कि तंबाकू सेहत और भविष्य दोनों के लिए नुकसानदेह है। जब सरकार के प्रयास और युवाओं का स्वयं का निर्णय साथ आते हैं, तभी धूम्रपान छोड़ने की दिशा में स्थायी बदलाव संभव हो पाता है।

संदर्भ -
https://tinyurl.com/mshxztxf
https://tinyurl.com/38kpwysw
https://tinyurl.com/5es5yuuc
https://tinyurl.com/478ekawj
https://tinyurl.com/rv5mv5zu
https://tinyurl.com/3yva92yf

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