कैसे मोती पालन बना भारत में नई रोज़गार संभावना और किसानों की कमाई का नया रास्ता?

समुद्री संसाधन
06-01-2026 09:20 AM
कैसे मोती पालन बना भारत में नई रोज़गार संभावना और किसानों की कमाई का नया रास्ता?

लखनऊवासियों, आज हम एक ऐसे उभरते हुए व्यवसाय की बात करने जा रहे हैं, जिसने देशभर में किसानों और युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोल दिए हैं - मोती पालन (Pearl Farming)। यह भले ही हमारी पारंपरिक अवधारणा से थोड़ा अलग लगे, लेकिन भारत के ग्रामीण इलाकों में यह कारोबार धीरे-धीरे नई पहचान बना रहा है। मोती खेती आज सिर्फ एक वैकल्पिक आय नहीं, बल्कि आधुनिक कृषि का एक अत्यंत लाभदायक और वैज्ञानिक रूप से विकसित रूप बन चुकी है। प्राकृतिक मोतियों की स्थिर मांग, कम निवेश में अधिक लाभ, और आसान रख-रखाव जैसे कारणों ने इसे इतना लोकप्रिय बना दिया है कि वाराणसी, बिहार, ओडिशा और दक्षिण भारत के कई राज्य इस उद्योग के प्रमुख केंद्र बनते जा रहे हैं। मोती पालन की खास बात यह है कि इसमें ज़मीन की जरूरत बहुत कम होती है, जोखिम न्यूनतम होता है और बाजार में तैयार मोतियों की कीमत हमेशा अच्छी रहती है। यही वजह है कि यह उद्योग किसानों, युवाओं, छोटे उद्यमियों और रोजगार तलाश रहे लोगों के लिए एक बेहद आकर्षक विकल्प बनता जा रहा है।
इस लेख में हम सबसे पहले समझेंगे कि भारत में मोती उद्योग इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ रहा है। इसके बाद देखेंगे कि मोती पालन शुरू करने से पहले किन तैयारियों और सावधानियों की ज़रूरत होती है। मोती की खेती की पूरी प्रक्रिया - सही जगह चुनने से लेकर मोती निकालने और बाज़ार तक पहुँचाने तक - का संक्षिप्त विवरण होगा। इसके बाद वाराणसी के नारायणपुर गांव का सफल मोती पालन मॉडल पढ़ेंगे। और अंत में जानेंगे कि बीएचयू (BHU) में मोती पालन से जुड़े कौशल और उद्यमिता प्रशिक्षण कैसे युवाओं के लिए नए अवसर बना रहे हैं।

भारत में मोती पालन उद्योग का विकास और इसकी आवश्यकता
भारत में मोती पालन उद्योग पिछले दस-बारह वर्षों में असाधारण रूप से उभरा है, और इसकी सबसे बड़ी वजह है प्राकृतिक मोतियों की बढ़ती मांग और उनका स्थिर बाजार मूल्य। सोना-चांदी जहाँ बाजार के उतार-चढ़ाव से प्रभावित होते हैं, वहीं मोतियों का मूल्य वर्षों तक लगभग स्थिर रहता है, जिससे यह एक सुरक्षित और लाभदायक निवेश बन जाता है। मीठे पानी के मोती लगभग 280 रुपये प्रति ग्राम और खारे पानी के मोती लगभग 6,000 रुपये प्रति ग्राम की दर से बिकते हैं, जिससे किसानों और छोटे उद्यमियों के लिए यह व्यवसाय अत्यंत आकर्षक हो गया है। खास बात यह है कि मोती पालन में भारी मशीनरी या बहुत अधिक श्रम की ज़रूरत नहीं होती। कम लागत, कम जोखिम और निरंतर लाभ की संभावना ने मोती पालन को ग्रामीण क्षेत्रों में आय का एक बेहद मजबूत विकल्प बना दिया है, जिसकी मदद से कई परिवार आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

मोती पालन व्यवसाय शुरू करने से पहले ध्यान रखने योग्य बातें
हालाँकि मोती पालन एक लाभदायक व्यवसाय है, लेकिन इसकी शुरुआत सोच-समझकर और सही तैयारी के साथ करना आवश्यक है। सबसे पहले, इस व्यवसाय में धैर्य का होना सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि एक मोती बनने में 12 से 24 महीने लग सकते हैं। दूसरा, ऐसा स्थान चुनना ज़रूरी है जहाँ पानी प्रदूषण से मुक्त हो और क्षेत्र बाढ़, शिकारी जीवों या अचानक आने वाली आपदाओं से सुरक्षित हो। उच्च गुणवत्ता वाले ऑयस्टर (oyster) का विश्वसनीय स्रोत मिलना भी बेहद आवश्यक है क्योंकि गलत या कमजोर प्रजाति से मोती नहीं बन पाएंगे। मोती की गुणवत्ता काफी हद तक ग्राफ़्टिंग (grafting) पर निर्भर करती है, इसलिए इस तकनीक में दक्षता हासिल करना ज़रूरी है। इसी कारण विशेषज्ञ सलाह, प्रशिक्षण और स्थापित मोती फार्मों का दौरा करना बहुत लाभदायक होता है। अंत में, एक मजबूत मार्केटिंग नेटवर्क (marketing network) और वित्तीय प्रबंधन की योजना बनाना जरूरी है ताकि मोती तैयार होने पर उनकी बिक्री अच्छे मूल्य पर हो सके और व्यवसाय निरंतर चलता रहे।

भारत में मोती पालन की खेती प्रक्रिया (स्टेप-बाय-स्टेप खेती की प्रक्रिया)
मोती पालन की खेती एक वैज्ञानिक और क्रमबद्ध प्रक्रिया है, जिसे पूर्ण ध्यान और निरंतर निगरानी की आवश्यकता होती है। सबसे पहला कदम है स्थान का चयन, जहाँ पानी साफ, हल्का क्षारीय और तापमान 23 से 28°C के बीच हो। इसके बाद ऐसी प्रजातियों के ऑयस्टर या मोलस्क (Molluscs) चुने जाते हैं जो स्थानीय जल-परिस्थिति के अनुकूल हों और अच्छी गुणवत्ता के मोती बना सकें। तीसरे चरण में ऑयस्टर के लिए तनाव - मुक्त वातावरण तैयार किया जाता है ताकि वे आराम से नेकर (nacre) की परत बनाते रहें। इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण कदम आता है - ग्राफ़्टिंग। इसमें एक छोटा कृत्रिम नाभिक ऑयस्टर के भीतर प्रत्यारोपित किया जाता है। फिर 12-24 महीनों तक पानी की गुणवत्ता, ऑक्सीजन स्तर, तापमान और ऑयस्टर की सेहत पर लगातार निगरानी रखी जाती है। मोतियों के तैयार होने पर उन्हें बेहद सावधानी से निकाला जाता है ताकि उनका आकार, चमक और गुणवत्ता बनी रहे। उत्कृष्ट मोतियाँ घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अच्छी कीमत प्राप्त करती हैं।

वाराणसी में मोती पालन का उभरता केंद्र — नारायणपुर मॉडल
वाराणसी जिले का नारायणपुर गांव आज पूरे उत्तर प्रदेश में मोती पालन का प्रमुख केंद्र बन चुका है। 2018 में श्वेतांक पाठक द्वारा शुरू किए गए इस प्रयास ने पूरे गांव की अर्थव्यवस्था बदल दी है। यहाँ मोती पालन छोटे आकार के 10x10 फीट और 6 फीट गहरे तालाबों में किया जाता है, जो लागत में कम और प्रबंधन में आसान होते हैं। ऑयस्टर में प्रत्यारोपित नाभिक के आधार पर मोती का आकार और प्रकार तय होता है। यहाँ तीन तरह के मोती तैयार किए जाते हैं - डिज़ाइनर मोती (जो 3 महीनों में तैयार हो जाते हैं), हाफ-राउंड मोती (18-20 महीने), और फुल-राउंड मोती (लगभग 3 वर्ष)। वर्तमान में नारायणपुर में 31,000 से अधिक ऑयस्टर का पालन किया जा रहा है, और यह मॉडल आठ जिलों में फैल चुका है। प्रति मोती कीमत 90 से 200 रुपये के बीच होती है, और किसानों को अपने शुरुआती निवेश पर 10 गुना तक लाभ मिल रहा है। यहाँ तैयार मोती मुख्य रूप से हैदराबाद के बाजारों तक सप्लाई किए जाते हैं, जहाँ उनकी मांग लगातार बढ़ रही है।

BHU में मोती पालन प्रशिक्षण: उद्यमिता और कौशल विकास
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) मोती पालन को बढ़ावा देने और युवाओं को नए कौशल सिखाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। बीएचयू महिला महाविद्यालय के जूलॉजी (zoology) विभाग द्वारा “फ़्रेशवॉटर पर्ल कल्चर एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट (Freshwater Pearl Culture) में एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट (Entrepreneurship Development)” विषय पर पाँच दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जाती है, जिसमें छात्रों को मोती पालन के सभी व्यावहारिक चरणों की ट्रेनिंग दी जाती है। इस प्रशिक्षण में ऑयस्टर खोलना, नाभिक प्रत्यारोपण, पानी की गुणवत्ता प्रबंधन, ऑयस्टर की देखभाल और मोतियों का विपणन सिखाया जाता है। मत्स्य विभाग और विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की टीम छात्रों को तकनीकी दक्षता के साथ-साथ उद्यमिता के अवसरों के बारे में भी जागरूक करती है। कार्यशाला का उद्देश्य है - देशी प्रजातियों को बढ़ावा देना, ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहित करना और युवाओं को एक ऐसा कौशल देना जिससे वे अपना व्यवसाय शुरू कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें।

संदर्भ
https://tinyurl.com/5fa5ebde   
https://tinyurl.com/33tnt5sk  
https://tinyurl.com/jfusr82n  
https://tinyurl.com/3u95kzcj
https://tinyurl.com/mw76fhav 

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