समय - सीमा 267
मानव और उनकी इंद्रियाँ 1072
मानव और उनके आविष्कार 841
भूगोल 253
जीव-जंतु 316
हमारे शहर में परिवार, रिश्ते और बच्चों की परवरिश की बात आते ही भावनाएँ तुरंत जुड़ जाती हैं। यहाँ के लोग जब किसी नवजात को देखते हैं तो सहज ही मन में दुलार उमड़ आना स्वाभाविक है। यह भावना केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति की दुनिया में भी जीवों के भीतर इसी तरह के लगाव और ज़िम्मेदारी के रूप दिखाई देते हैं। कुछ जंगली जीव ऐसे होते हैं जो अपने बच्चों को जन्म देने के बाद उनसे दूरी बना लेते हैं, मानो उन्हें अपने आप आगे बढ़ने देना ही सबसे सुरक्षित रास्ता हो। वहीं कुछ प्रजातियाँ ऐसी भी हैं जिनमें माता पिता अपने बच्चों को हर पल सहारा देते हैं, उन्हें सिखाते हैं और उनका संरक्षण करते हैं, बिल्कुल हमारे शहर के संयुक्त परिवारों जैसी भावना के साथ।
आज हम जानेंगे कि प्रकृति में जंगली जानवर अपने बच्चों का पालन पोषण किन अलग अलग तरीकों से करते हैं, एलोपेरेंटिंग (alloparenting) क्या होती है और किन जीवों में यह दिखाई देती है। हम यह भी समझेंगे कि कुछ प्रजातियाँ स्नेह से परवरिश करती हैं, कुछ स्वतंत्रता देकर सिखाती हैं और कुछ में समुदाय मिलकर बच्चों को संभालता है। अंत में हम उन जीवों से परिचित होंगे जिन्हें जंगल में सबसे समर्पित माता पिता माना जाता है और महसूस करेंगे कि प्रकृति में प्रेम और ज़िम्मेदारी कितने अनोखे रूपों में मौजूद हैं।
जानवरों के बीच पाए जाने वाले पालन पोषण के अलग अलग रूप
एलोपेरेंटिंग प्रेम की वह भावना जो रिश्तों की सीमाओं से परे होती है
एलोपेरेंटिंग वह स्थिति है जिसमें किसी बच्चे की देखभाल उसके जैविक माता पिता के अलावा कोई और करता है। इसे प्रकृति का संयुक्त परिवार मॉडल भी कहा जा सकता है। कुछ प्राइमेट्स (primates) जैसे रीसस मैकाक (Rhesus Macaque) एलोपेरेंटिंग को अपनाते हैं। वहीं फ़्लेमिंगो (flamingo) अपने बच्चों की देखभाल के लिए समलैंगिक जोड़े भी बना लेते हैं। सबसे प्रभावशाली उदाहरण हाथियों में मिलता है। उनके समूह मातृप्रधान होते हैं जहाँ कई पीढ़ियाँ मिलकर बच्चों की रक्षा करती हैं। यदि किसी छोटे हाथी को उसके झुंड से अलग कर दिया जाए तो यह बिछड़ना उसके लिए बहुत गहरा भावनात्मक घाव बन जाता है। इससे पता चलता है कि सामाजिक बंधन जानवरों की दुनिया में कितने सशक्त और संवेदनशील होते हैं।
जंगली दुनिया के सबसे समर्पित माता पिता
प्रकृति का पालन पोषण हमें क्या सिखाता है
इस पूरी यात्रा में हमने देखा कि जंगल में भी परिवार और रिश्ते जीवित हैं। कहीं माँ अकेली संघर्ष करती है कहीं पूरा समूह कंधे से कंधा मिलाकर साथ देता है। कहीं सुरक्षा लोरी के रूप में मिलती है कहीं प्रशिक्षण के रूप में। एलोपेरेंटिंग यह दिखाती है कि प्रेम संबंधों से बड़ा होता है और अपनापन जीवन की मूल भाषा है। ओरंगुटान (Orangutan), मगरमच्छ, चीता और कंगारू ने हमें यह एहसास कराया कि मातृत्व अनेक रूपों में सांस लेता है और उसका मूल भाव स्नेह, संरक्षण और समर्पण है। यह किसी को सीखने का अवसर देने सुरक्षा प्रदान करने और महसूस होने की दुनिया तक पहुँचाने का भाव है।
संदर्भ
https://tinyurl.com/3uc2zzhn
https://tinyurl.com/2hatnjpe
https://tinyurl.com/3su4mx5z
A. City Readerships (FB + App) - This is the total number of city-based unique readers who reached this specific post from the Prarang Hindi FB page and the Prarang App.
B. Website (Google + Direct) - This is the Total viewership of readers who reached this post directly through their browsers and via Google search.
C. Messaging Subscribers - This is the total viewership from City Portal subscribers who opted for hyperlocal daily messaging and received this post.
D. Total Viewership - This is the Sum of all our readers through FB+App, Website (Google+Direct), Email, WhatsApp, and Instagram who reached this Prarang post/page.
E. The Reach (Viewership) - The reach on the post is updated either on the 6th day from the day of posting or on the completion (Day 31 or 32) of one month from the day of posting.