आज, हम पढ़ेंगे कि सिकंदर (Alexander the Great) कौन था, और वैश्विक इतिहास को आकार देने में उनकी क्या भूमिका थी। फिर, हम पता लगाएंगे कि उन्होंने ज्ञान और संस्कृति के केंद्र के रूप में, अलेक्जेंड्रिया (Alexandria) शहर की स्थापना कैसे की। लेख में आगे, हम देखेंगे कि अलेक्जेंड्रिया कैसे एशिया, यूरोप और अफ्रीका का मिलन स्थल और व्यापार केंद्र था। फिर हम अलेक्जेंड्रिया के महान पुस्तकालय पर गौर करेंगे। इसके पश्चात, हम पता लगाएंगे कि सिकंदर की मृत्यु के बाद, पुस्तकालय के केंद्रीकृत ज्ञान का महत्व कैसे कम होने लगा। जबकि अंत में हम देखेंगे कि, आज अलेक्जेंड्रिया के पुस्तकालय की क्या विरासत बची है।
सिकंदर का जन्म, जुलाई 356 ईसा पूर्व में मैसीडोनिया (Macedonia) की प्राचीन राजधानी पेला (Pella) में हुआ था। उनके माता-पिता मैसीडोन के फिलिप द्वितीय (Philip II) और उनकी पत्नी - ओलंपियास (Olympias) थे। सिकंदर ने, प्रसिद्ध दार्शनिक एरिस्टोटल (Aristotle) से शिक्षा प्राप्त की थी। 336 ईसा पूर्व में फिलिप द्वितीय की हत्या हुई थी, जिसके परिणामस्वरूप, सिकंदर को उनका शक्तिशाली लेकिन अस्थिर राज्य विरासत में मिला। तब, उसने अपने घर में ही मौजूद दुश्मनों से निपटकर, ग्रीस में मैसीडोनियन शक्ति को फिर से स्थापित किया। इसके पश्चात, वह विशाल फ़ारसी साम्राज्य को जीतने के लिए निकल पड़ा।

इस मुहिम में आई बाधाओं के बावजूद, सिकंदर कभी नहीं हारा। उन्होंने अपनी सेना को एशिया, सीरिया और मिस्र के फ़ारसी क्षेत्रों में जीत दिलाई। उनकी सबसे बड़ी जीत 331 ईसा पूर्व में गौगामेला (Gaugamela) की लड़ाई में थी, जो अब उत्तरी इराक है। इस प्रकार, वह केवल 25 वर्ष की आयु में ही फारस का 'महान राजा' बन गया। अगले आठ वर्षों में, राजा, सेनापति, राजनीतिज्ञ, विद्वान और खोजकर्ता के रूप में सिकंदर ने अपनी सेना को 11,000 मील आगे बढ़ाया, 70 से अधिक शहरों की स्थापना की। इस प्रकार उसने एक ऐसा साम्राज्य बनाया, जो तीन महाद्वीपों तक फैला हुआ था।
इसी साम्राज्य में उत्तरी मिस्र में, भूमध्य सागर पर ‘अलेक्जेंड्रिया’ नामक एक बंदरगाह शहर बसा है, जिसकी स्थापना सिकंदर ने 331 ईसा पूर्व में की थी। सीरिया पर विजय प्राप्त करने के बाद, सिकंदर अपनी सेना के साथ मिस्र में गया। तब उसने ग्रीक के एक महत्वपूर्ण व्यापार केंद्र – नौक्रैटिस (Naucratis) से बेहतर वाणिज्यिक केंद्र बनाने के इरादे से अलेक्जेंड्रिया की स्थापना की थी। उसने अपनी इच्छा अनुसार, शहर का बुनियादी डिजाइन तैयार किया था। ग्रिड पैटर्न में आटा या अनाज डालकर इस शहर की योजना तैयार की गई थी, जिसे बाद में उनके वास्तुकार ने अपनाया था। यह प्राचीन दुनिया के सात आश्चर्यों में से एक - फ़ारोस (Pharos), और अलेक्जेंड्रिया के पौराणिक पुस्तकालय का स्थल था। एक समय में, यह प्राचीन दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केंद्र भी था।

सिकंदर के आगमन के बाद, यह शहर एक छोटे बंदरगाह से विकसित हुआ। बाद में, इस शहर को टॉलेमिक राजवंश (Ptolemaic Dynasty) (323-30 ईसा पूर्व) के तहत एक बौद्धिक, सांस्कृतिक और वाणिज्यिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया था। बाद में, यह प्रारंभिक ईसाई धर्म के केंद्र के रूप में भी प्रसिद्ध हो गया।
अलेक्जेंड्रिया की सबसे उल्लेखनीय चीजों में से एक इसका पुस्तकालय था। यह ज्ञान के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण था। दरअसल, माउसियन (Mouseion), उच्च शिक्षा का एक संस्थान था, जो अलेक्जेंड्रिया के पुस्तकालय का हिस्सा था। यह ज्ञान की देवियों - म्यूज़ेस (Muses) को समर्पित था और संभवतः टॉलेमी द्वितीय (Ptolemy II – 282-246 ईसा पूर्व) द्वारा स्थापित किया गया था। यह विद्वानों के लिए एक सभा स्थल और घर के रूप में भी कार्य करता था, जिनके कार्यों ने इस पुस्तकालय की स्थापना में योगदान दिया था।
331 ईसा पूर्व में, अलेक्जेंड्रिया समुद्र और नील नदी के बीच अपनी रणनीतिक स्थिति के कारण, भूमध्य सागर का सबसे बड़ा व्यापार केंद्र बन गया। इसमें भव्य बंदरगाह (Port / Portus), सैन्य बेड़े के लिए पोर्टस मैग्नस (Portus Magnus) और नहरों, महलों और बाजारों के साथ-साथ वाणिज्य के लिए पोर्टस यूनोस्टस (Portus Eunostus) शामिल थे। अलेक्जेंड्रिया शहर समुद्री व्यापार के कारण विकसित हुआ। यहां से मिस्र के अनाज, पैपीरस (Papyrus) और कांच का निर्यात होता था , जबकि, ग्रीस और रोम से विलासिता की वस्तुओं का आयात होता था। नील नदी और कारवां मार्गों ने इसे अंतर्देशीय मिस्र, अरब, भारत और पूर्वी अफ्रीका से जोड़ा, जिससे मसालों, धूप बत्ती और वस्त्रों के आदान-प्रदान की सुविधा हुई। टॉलेमिक शासन के तहत, राज्य ने प्रमुख उद्योगों (विशेषकर गेहूं) को नियंत्रित किया था। साथ ही, महानगरीय बाजारों और उन्नत बंदरगाह सुविधाओं ने प्राचीन दुनिया के सबसे प्रभावशाली वाणिज्यिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में इसकी भूमिका को मजबूत किया।
अलेक्जेंड्रिया का पुस्तकालय, वास्तव में प्राचीन दुनिया का एक आश्चर्य था, तथा ज्ञान और सीखने की शक्ति का प्रमाण भी था। इसमें पुस्तकों, पांडुलिपियों, स्क्रॉल और मानचित्रों का एक विशाल संग्रह था, जो इसे प्राचीन दुनिया के सबसे बड़े और व्यापक पुस्तकालयों में से एक बनाता है। कहा जाता है कि, इसमें 7 लाख से अधिक स्क्रॉल शामिल थे, जिनमें साहित्य, विज्ञान, दर्शन और अन्य विषयों के कार्य शामिल थे। इन स्क्रॉल की मदद से ही प्राचीन यूनानी, दुनिया के ज्ञान और अंतर्दृष्टि से वाकिब हुए। इसके अतिरिक्त, इस पुस्तकालय में मानचित्रों का एक बड़ा संग्रह था, जिनका नाविकों और व्यापारियों द्वारा भूमध्य सागर में नौचालन करने हेतु उपयोग किया जाता था। यह पुस्तकालय प्राचीन यूनानियों के लिए अत्यधिक गर्व और प्रशंसा का भी स्रोत था, और इसकी विरासत सदियों से कायम है।

टॉलेमी द्वितीय के शासनकाल के दौरान, अलेक्जेंड्रिया के पुस्तकालय ने दुनिया में ज्ञान का सर्वोच्च केंद्र बनने के लिए, एक क्रांतिकारी नीति लागू की। शाही आदेश के अनुसार, शहर के बंदरगाह पर उतरने वाले प्रत्येक जहाज की पुस्तकों और स्क्रॉल के लिए अनिवार्य खोज की जाती थी। किसी भी पांडुलिपि को तुरंत जब्त कर लिया जाता था, और निरीक्षण के लिए पुस्तकालय में भेजा जाता था। इस अधिग्रहण रणनीति ने इस पुस्तकालय को भूमध्य सागर के बौद्धिक उत्पादन के लिए एक विशाल भंडार में बदल दिया। एक बार जब कोई किताब जब्त कर ली जाती थी, तो पुस्तकालय के लेखक इसकी एक हस्तलिखित प्रति तैयार करते थे। इसके बाद, पुस्तकालय में मूल पांडुलिपि रखी जाती थी, जबकि, उसकी प्रति जहाज के मालिक को लौटाई जाती थी।
सिकंदर की मृत्यु के बाद, टॉलेमी तृतीय के शासनकाल से लेकर क्लियोपेट्रा सप्तम (Cleopatra VII) के शासनकाल तक, अलेक्जेंड्रिया के पतन को राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों द्वारा चिह्नित किया गया था। इसी कारण, अंततः टॉलेमिक राजवंश का अंत हुआ। इस अवधि के दौरान, इस शहर ने अपना पूर्व गौरव खो दिया। लगातार उत्तराधिकार विवादों और नागरिक अशांति से राज्य की राजनीतिक स्थिरता भी कमजोर हो गई थी। महंगे सैन्य अभियान, भव्य शाही व्यय और खराब संसाधन प्रबंधन ने राज्य के वित्त पर भी दबाव डाला, जिसके परिणामस्वरूप कराधान में वृद्धि हुई, और जनता में असंतोष हुआ। इसके पुस्तकालय का पतन भी, इतिहास के दुखद और गर्म बहस वाले रहस्यों में से एक बना हुआ है।
अलेक्जेंड्रिया का यह पुस्तकालय आज सही सलामत नहीं है। लेकिन इसके खंडहरों में भी, सहस्राब्दियों तक इसका प्रभाव गूंजता है। इस पुस्तकालय ने इस बात को आकार दिया कि, समाज किस प्रकार शिक्षा, अनुसंधान और सांस्कृतिक संरक्षण को महत्व देता है। यहां बनाए गए नवीन बिब्लियोथेका अलेक्जेंड्रिना (Bibliotheca Alexandrina) पुस्तकालय में संग्रहालय, गैलरी और अनुसंधान केंद्र शामिल हैं।
जबकि, अलेक्जेंड्रिया के मूल पुस्तकालय का कोई निश्चित खंडहर नहीं मिला है, पुरातत्वविदों ने माउसियन परिसर के कुछ हिस्सों, प्राचीन व्याख्यान कक्षों और भूमिगत कमरों का पता लगाया है। माना जाता है कि, वे भंडारण सुविधाएं या उपभवन थे। इस उत्खनन से हेलेनिस्टिक वास्तुकला (Hellenistic architecture) और कलाकृतियों का पता चलता है, जो अलेक्जेंड्रिया के इस उत्खनन से हेलेनिस्टिक वास्तुकला (Hellenistic architecture) और कलाकृतियों का पता चलता है, जो अलेक्जेंड्रिया के प्रज्वलित और ज्ञान पर आधारित अतीत का संकेत देते हैं।
संदर्भ
1. https://tinyurl.com/ywey7428
2. https://tinyurl.com/4w6v8pap
3. https://tinyurl.com/yuxtnsfe
4. https://tinyurl.com/y9e535vb
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