रोमन साम्राज्य में एनीड व भारतवर्ष में रामायण महाकाव्य में युवा पीढ़ी के लिएं प्रेरणा

धर्म का युग : 600 ई.पू. से 300 ई.
01-09-2026 10:00 AM
रोमन साम्राज्य में एनीड व भारतवर्ष में रामायण महाकाव्य में युवा पीढ़ी के लिएं प्रेरणा

लखनऊ, आज हम विश्व प्रसिद्ध काव्य ‘एनीड (Aeneid)’ एवं हमारी भारतभूमि पर रचित ‘रामायण’ काव्य के बारे में जानेंगे। शीर्ष लैटिन (Latin) कवियों में से एक माने जाने वाले वर्जिल (Virgil) ने, अपने जीवन के अंतिम दस वर्षों (29 ईसा पूर्व-19 ईसा पूर्व) में ‘एनीड’ की रचना की थी। यह उनकी सर्वोत्कृष्ट कृति थी। हालाँकि दुर्भाग्यवश, इस काव्य के संपादन के दौरान ही उनकी मृत्यु हो गई। अपनी कृति अधूरी रह जाने से, वे इतने व्यथित थे कि उन्होंने अपनी मृत्यु के बाद इस काव्य को जला देने की इच्छा व्यक्त की थी। किंतु  एनीड की अधूरी स्थिति में भी इसके एक ऐसे प्रशंसक थे, जिन्होंने इसके प्रारूपों को पहले ही देख रखा था। अतः उन्होंने अपने मित्र की अंतिम इच्छा को दरकिनार करते हुए, कुछ मामूली संशोधनों के साथ इसे प्रकाशित करवाया।

एनीड, युवाओं के लिए अधिक प्रासंगिक है, क्योंकि इसमें ट्रोजन राजवंश (Trojan royal family) के एक राजकुमार ऐनियस (Aeneas) की इटली-यात्रा का वर्णन है, जहाँ उसके लिए एक नए वंश व राज्य की भविष्यवाणी की गई है।  ‘इलियाड (Iliad)’ काव्य के अनुसार, ट्रॉय (Troy) राज्य के विनाश के बाद सुरक्षित बचे कुछ सैनिकों व नागरिकों के साथ बच निकलता है। वहाँ, वह एक ऐसे स्वाभिमानी और साहसी वंश की नींव रखेगा, जिसकी कीर्ति संपूर्ण विश्व में फैलेगी। यह प्रसंग स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि ऐनियस एक युवा था, जो भविष्य में रोमन साम्राज्य (Roman Empire) की नींव रखने वाली भावी पीढ़ी का सही मार्गदर्शन और पालन-पोषण करेगा।

युवाओं के लिए इसकी प्रासंगिकता का दूसरा कारण यह है कि इस महाकाव्य के अधिकांश पात्र युवा हैं। उदाहरण के लिए, जब ऐनियस की मां - देवी वीनस (Venus) उसे शहर के इतिहास से परिचित कराती हैं, तो वह उसे देवी जूनो (Juno) की कृपा प्राप्त करने हेतु उनके मंदिर जाने के लिए प्रेरित करती हैं। ऐनियस की समुद्री जहाज़ी यात्रा के दौरान, अफ्रीका के तट पर यह प्रसंग हुआ था। तत्पश्चात्, ऐनियस नगर में प्रवेश करता है और जूनो के मंदिर में कार्थेज की रानी (Queen of Carthage) - डिडो (Dido) की कृपादृष्टि प्राप्त करता है। यह घटना बताती है कि एक युवा होने के नाते, ऐनियस को अपनी यात्रा के दौरान पग-पग पर अपनी मां के मार्गदर्शन पर निर्भर रहना पड़ा, क्योंकि वह उस स्थान से पूर्णतः अनभिज्ञ था।

ऐनियस के वंशज भविष्य में इस नगर पर पुनः विजय प्राप्त न कर सकें, इस आशंका से चिंतित होकर, वीनस अपने पुत्र की सुरक्षा हेतु एक योजना बनाती हैं। वह ऐनियस के सौतेले भाई - क्यूपिड (Cupid) को असकैनियस (Ascanius) का छद्म रूप देकर भेजती हैं। क्यूपिड, डिडो को उपहार भेंट करता है। तब, डिडो के मन में वात्सल्य-भाव जागृत होता है और वह ऐनियस के प्रेम में बंध जाती है। अपने दिवंगत पति के प्रति वफादार होने के बावजूद, वह ऐनियस के प्रति अत्यंत आसक्त हो जाती है। इस संदर्भ में, यह रचना ऐनियस और उसकी पीढ़ी के भविष्य तथा उसकी सफलता को लेकर चिंतित मां के प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करती है। वीनस द्वारा रचा गया यह संपूर्ण ताना-बाना, यह दर्शाता है कि भविष्य युवा पीढ़ी पर ही निर्भर करता है और उनका मार्गदर्शन करना अत्यंत आवश्यक है।

इसके विपरीत, हमारे भारतवर्ष की पौराणिक कहानी - रामायण, उस कालखंड के समाज का चित्रण करती है, जहाँ विशाल साम्राज्य हैं; एक भावी राजा के रूप में राजकुमार का प्रशिक्षण किया जा रहा है; माता और सौतेली माताओं के मध्य द्वंद्व है; भाइयों में पारस्परिक प्रेम व निष्ठा है; और राजकुमारी के स्वयंवर की प्रतियोगिताएं हैं। रामायण, मुख्य रूप से वयस्क पीढ़ी के उत्तरदायित्वों पर केंद्रित है, क्योंकि इसमें नेतृत्व, पारिवारिक अंतर्द्वंद्व और प्रेम के गंभीर पक्षों का विवेचन है। ये गुण युवाओं की तुलना में प्रौढ़ एवं वयस्क व्यक्तियों में अधिक दृष्टिगोचर होते हैं।

इसके अतिरिक्त, रामायण, एक नैतिक पुरुष और जननायक के आदर्श आचरण का निरूपण करता है, फिर चाहे वह संयमपूर्वक परिस्थितियों का सामना करना हो, दायित्वों को निष्ठा से निभाना हो, व्यक्तिगत दुःखों और सीमाओं से परे रहकर स्वशासित रहना हो, या समाज में प्रेम और सम्मान का भाव जगाना हो। दूसरी तरफ, माता सीता यह अनुभव करती हैं कि धरती पर उनका समय समाप्त हो चुका है, एवं वे धरती माता की गोद में समा जाती हैं। तत्पश्चात्, भगवान राम-सीता के दोनों पुत्र - लव और कुश, अपने पिता के साथ तब तक अयोध्या में रहते हैं, जब तक कि वे राज्य के उत्तराधिकारी नहीं बन जाते। यह हमें सीख देता है कि एक शासक को अपने जीवनकाल के बाद पुत्रों को योग्य बनाकर राज्य सौंपना चाहिए। पुत्रों ने भी अपने पिता से नेतृत्व कला के समस्त गुण सीखे, ताकि वे उस दायित्व को सफलतापूर्वक संभाल सकें।

एक अलग विषय में, पैगंबर मुहम्मद की जीवनी, जिसे ‘सीरा’ के नाम से जाना जाता है, सर्वप्रथम आठवीं शताब्दी के विद्वान इब्न इसहाक द्वारा संकलित की गई थी। बाद में, इब्न हिशाम द्वारा इसे पुनः संपादित व परिमार्जित किया गया। वास्तव में, यह ग्रंथ पैगंबर साहब के जीवन की घटनाओं को कालक्रमानुसार प्रस्तुत करने के लिए मौखिक परंपराओं, वृत्तांतों और संदर्भ-योग्य कविताओं का एक चुनिंदा संकलन है। मौखिक विवरणों का यह संक्षिप्त रूप, पैगंबर साहब के जीवन और उपदेशों पर केंद्रित कई अन्य रचनाओं का मूल आधार भी बनता है। इनमें से कुछ ‘हदीस’ के नाम से प्रख्यात भविष्यवाणी परंपराओं के संग्रह हैं, जो इस्लामी कानून के स्रोतों में से एक हैं। इब्न इसहाक की यह कृति, उस व्यापक विद्वतापूर्ण एवं ऐतिहासिक साहित्य का अभिन्न अंग है, जो कुरान के साथ मिलकर इस्लामी आस्था (अकीदा) की नींव रखता है। यह आज भी संपूर्ण मुस्लिम जगत के लिए अत्यंत महत्त्व रखता है।

हाल ही में, एक अरब इतिहासकार तारिफ अल-खालिदी ने रेखांकित किया है कि ‘अपने इसी मौलिक स्वरूप के कारण, 'सीरा' और 'हदीस' के विद्वानों द्वारा प्रस्तुत इतिहास का यह दृष्टिकोण, मिखाइल बख्तिन की शब्दावली में एक 'महाकाव्यात्मक चरित्र' धारण करता है’। यद्यपि खालिदी ने इस विचार को आगे विस्तृत नहीं किया, किंतु सीरा उन लक्षणों को दर्शाती है, जिन्हें अन्य विश्व-परंपराओं में महाकाव्य का दर्जा प्राप्त है।

तुलनात्मक रूप में, 'एनीड' महाकाव्य, संभवतः पहली बार दो परस्पर विरोधी आदर्शों - मानवतावाद और साम्राज्यवाद को एक साथ अभिव्यक्ति देता है। इन्हें लंबे समय से यूरोपीय चेतना का आधार माना जाता रहा है। मानवतावाद, वर्जिल के मित्र और शत्रु दोनों के प्रति गहरी मानवीय संवेदना तथा दया व नम्रता के भाव में दिखाई देता है। इसी कारण, उन्हें ईसाई धर्म का पूर्वगामी भी माना गया। इसके विपरीत, साम्राज्यवाद 'एनीड' में वर्णित रोम की न्यायप्रिय सत्ता की अवधारणा में झलकता है, जिसे बाद के यूरोपीय और अमेरिकी साम्राज्यवादी विचारों का वैचारिक आधार माना जा सकता है।

दूसरी तरफ, सीरा के साथ तुलना के लिए महर्षि वाल्मीकि रचित संस्कृत ‘रामायण’  चुना गया है। इसके केंद्र में धर्म एवं धार्मिकता की एक भिन्न अवधारणा है। रामायण की “प्रकृति और मनुष्य के बीच पूर्ण सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व” को पुनर्स्थापित करने वाले एकीकरण बल की अवधारणा ने भारतीय संस्कृति पर अमिट छाप छोड़ी है। इसकी यह शाश्वत प्रासंगिकता 'एनीड' और 'सीरा' के समतुल्य है। यह बात तब और भी स्पष्ट हो जाती है, जब हम रामायण से प्रेरित होकर लिखे गए उत्तरवर्ती पुनर्कथनों को देखते हैं। इसका उदाहरण, मध्यकालीन हिंदी में गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित 'रामचरितमानस' है, जिसे महात्मा गांधी संपूर्ण भक्ति-साहित्य की सर्वश्रेष्ठ रचना मानते थे। यहां ध्यान देने योग्य एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि ऋषि कंबन द्वारा रचित तमिल रामायण का उपयोग, 17वीं शताब्दी के कवि उमारू पुलावर ने "पैगंबर मुहम्मद की तमिल जीवनी" के लिए एक साहित्यिक मॉडल के रूप में किया था। यह इन दोनों आख्यानों के आपसी संबंध का एक सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है।

दूसरी तरफ, 'एनीड' की कथा, महाभारत की तुलना में भी काफी सरल और सीधी है। ऐनियस की कथा में, उसके लिए इटली में एक नई मातृभूमि और रोमनों के पूर्वज के रूप में स्थापित होने के बारे में है। पांडवों की भांति, ऐनियस भी एक दैवीय संतान है। उसकी मां प्रेम की देवी वीनस हैं, और ओलम्पियन देवी-देवता इस महाकाव्य की घटनाओं में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। इनमें से अधिकांश परिस्थितियां प्रतिशोधी देवी जूनो द्वारा उत्पन्न की जाती हैं, जो ट्रोजन शरणार्थियों से घृणा करती है। वर्जिल, इस वृत्तांत का उपयोग रोम की स्थापना की पौराणिक कथा को विस्तार देने और ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्वियों की शत्रुता का पौराणिक कारण स्पष्ट करने के लिए करते हैं। साथ ही, सीज़र वंश (Caesar dynasty) की राजनीतिक सत्ता को वैधता और पौराणिक आधार प्रदान करने के लिए भी वे इसका उपयोग करते हैं।

इस प्रकार, हम कह सकते हैं कि रामायण व एनीड दोनों काव्यों में ऐसी महिलाएं हैं, जो नायक को उसके महान लक्ष्य से भटकाती हैं; इनमें देवताओं की कृपा और कोप की लीलाएं हैं; और अन्य साम्राज्यों की रहस्यमयी यात्राएं हैं। ये कुछ ऐसे तत्त्व हैं, जो इन महाकाव्यों की समानता को सिद्ध करते हैं।

 

संदर्भ

1. https://tinyurl.com/b2efyb52 

2. https://tinyurl.com/4n394955 

3. https://tinyurl.com/4wsu9x43 

Definitions of the Post Viewership Metrics

A. City Readerships (FB + App) - This is the total number of city-based unique readers who reached this specific post from the Prarang Hindi FB page and the Prarang App.

B. Website (Google + Direct) - This is the Total viewership of readers who reached this post directly through their browsers and via Google search.

C. Messaging Subscribers - This is the total viewership from City Portal subscribers who opted for hyperlocal daily messaging and received this post.

D. Total Viewership - This is the Sum of all our readers through FB+App, Website (Google+Direct), Email, WhatsApp, and Instagram who reached this Prarang post/page.

E. The Reach (Viewership) - The reach on the post is updated either on the 6th day from the day of posting or on the completion (Day 31 or 32) of one month from the day of posting.