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मेरठ की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में कांच एक ऐसी सामग्री है, जो चुपचाप हर जगह हमारी दिनचर्या का हिस्सा बनी हुई है - घर की खिड़कियों के शीशों से लेकर दुकानों के शोकेस, मोबाइल स्क्रीन, दर्पण, वाहन और सजावटी वस्तुओं तक। पारदर्शी दिखने वाला यह पदार्थ अपने भीतर केवल रोशनी ही नहीं, बल्कि हजारों वर्षों का इतिहास, तकनीकी विकास और मानवीय रचनात्मकता भी समेटे हुए है। कांच आज सिर्फ़ सुविधा की वस्तु नहीं रहा, बल्कि यह मानव सभ्यता की वैज्ञानिक सोच, कलात्मक संवेदना और औद्योगिक प्रगति का सजीव प्रतीक बन चुका है - और मेरठ जैसे व्यापारिक व औद्योगिक शहर में इसका महत्व और भी गहराई से महसूस किया जा सकता है।
इस लेख में हम कांच की इसी रोचक यात्रा को छह महत्वपूर्ण पहलुओं के माध्यम से समझेंगे - प्राचीन सभ्यताओं में कांच की शुरुआत, निर्माण तकनीकों का ऐतिहासिक विकास, आधुनिक फ्लोट तकनीक (float process) का महत्व, कांच के विभिन्न प्रकार और उनकी विशेषताएँ, यूरोप की प्रसिद्ध बोहेमियन कांच परंपरा, तथा इटली के मुरानो द्वीप की विशिष्ट कांच कला।
कांच का इतिहास और प्राचीन सभ्यताओं में इसकी शुरुआत
कांच निर्माण की कहानी मानव सभ्यता की प्रारंभिक वैज्ञानिक जिज्ञासा और प्रयोगशीलता से जुड़ी हुई है। इसके सबसे पुराने प्रमाण हमें प्राचीन मिस्र और मेसोपोटामिया (Mesopotamia) में लगभग 1500 ईसा पूर्व मिलते हैं, जहाँ कांच का उपयोग मुख्यतः आभूषणों, मनकों और धार्मिक वस्तुओं के निर्माण में किया जाता था। शुरुआती दौर में प्राकृतिक कांच ‘ओब्सीडियन’ (Obsidian) बेहद महत्वपूर्ण था, क्योंकि यह आसानी से टूटकर धारदार किनारे बना लेता था, जिससे औजार और हथियार बनाए जाते थे। समय के साथ मनुष्य ने यह समझ विकसित की कि रेत, मिट्टी और खनिजों को अत्यधिक ताप पर गर्म करने से एक नई पारदर्शी सामग्री तैयार की जा सकती है। प्रारंभिक कारीगर मिट्टी या रेत के कोर (core) पर पिघले हुए कांच को लपेटकर बर्तन और सजावटी वस्तुएँ बनाते थे। यह प्रक्रिया उस युग की सीमित तकनीक के बावजूद वैज्ञानिक सोच और रचनात्मक कौशल का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती है।
कांच निर्माण तकनीकों का विकास: प्राचीन काल से आधुनिक युग तक
कांच उद्योग में वास्तविक क्रांति लगभग 300 ईसा पूर्व तब आई, जब सीरियाई कारीगरों ने कांच उड़ाने की नली का आविष्कार किया। इस तकनीक ने कांच को हल्का, पतला और विभिन्न आकारों में ढालना संभव बना दिया। रोमन साम्राज्य (Roman Empire) ने इस कला को आगे बढ़ाते हुए दर्पण, खिड़कियों के शीशे और दैनिक उपयोग की वस्तुएँ बनाईं, जिससे कांच आम जनजीवन का हिस्सा बन गया। मध्यकालीन यूरोप में कांच ने एक कलात्मक रूप लिया - विशेष रूप से चर्चों में बनी रंगीन कांच खिड़कियाँ धार्मिक कथाओं को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत करती थीं। औद्योगिक क्रांति के साथ मशीनों का उपयोग बढ़ा, उत्पादन तेज़ हुआ और कांच आम लोगों के लिए अधिक सुलभ और किफायती बनता चला गया।

आधुनिक कांच उत्पादन और फ्लोट तकनीक की भूमिका
बीसवीं सदी में कांच निर्माण ने तकनीकी रूप से एक नया मुकाम हासिल किया। पहले ‘पुल तकनीक’ (pull process) का उपयोग किया गया, लेकिन सबसे बड़ा परिवर्तन तब आया जब एलेस्टेयर पिलकिंगटन (Alastair Pilkington) ने फ्लोट विधि विकसित की। इस तकनीक में पिघले हुए कांच को पिघले टिन की सतह पर धीरे-धीरे बहाया जाता है, जिससे अत्यंत सपाट, चिकना और समान मोटाई वाला शीशा तैयार होता है। इस प्रक्रिया ने कांच की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता दोनों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। आज भवनों की विशाल कांच दीवारें, वाहन के शीशे और इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन (electronic screen) इसी तकनीक की देन हैं, जिसने आधुनिक जीवन की दृश्य भाषा ही बदल दी है।

निर्माण प्रक्रिया के आधार पर कांच के प्रमुख प्रकार और उनकी विशेषताएँ
कांच की मजबूती और उपयोगिता उसके निर्माण की प्रक्रिया पर निर्भर करती है। अनीलीकृत कांच सबसे सामान्य प्रकार है, जिसका उपयोग घरों की खिड़कियों और साधारण संरचनाओं में किया जाता है, लेकिन यह अपेक्षाकृत नाजुक होता है। ऊष्मोपचारित कांच को विशेष ताप और शीतन प्रक्रिया से मज़बूत बनाया जाता है, जिससे यह हवा, तापमान और हल्के आघातों का बेहतर सामना कर सकता है। तापीय संस्कारित कांच इससे भी अधिक मजबूत होता है और टूटने पर छोटे, कम खतरनाक टुकड़ों में बिखरता है। वहीं स्तरित कांच सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें कांच की परतों के बीच एक विशेष फिल्म होती है, जो टूटने पर भी टुकड़ों को बिखरने नहीं देती। इन विविध प्रकारों ने कांच को सुरक्षित, भरोसेमंद और बहुउपयोगी बना दिया है।

बोहेमियन कांच: यूरोप की प्रसिद्ध कांच कला परंपरा
बोहेमियन कांच यूरोप की सबसे समृद्ध और प्रतिष्ठित कांच परंपराओं में से एक है। वर्तमान चेक गणराज्य (Czech Republic) का बोहेमिया क्षेत्र अपने उच्च गुणवत्ता वाले क्रिस्टल कांच (Crystal Glass) के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहाँ की भूमि पोटाश (Potash) जैसे प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है, जो क्रिस्टल स्पष्ट कांच बनाने में सहायक होती है। सदियों से यहाँ झूमर, लैंप, सजावटी पात्र और आभूषण बनाए जाते रहे हैं, जो शाही महलों और भव्य भवनों की शोभा बढ़ाते थे। बोहेमियन कांच आज भी विलासिता, बारीक शिल्प और परंपरा का प्रतीक माना जाता है।

मुरानो कांच: इटली की विशिष्ट हस्तकला और रंगीन कांच तकनीक
इटली के वेनिस (Venice) के समीप स्थित मुरानो (Murano) द्वीप कांच कला की दुनिया में एक जीवंत किंवदंती की तरह है। यहाँ कांच निर्माण केवल उद्योग नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही एक विशिष्ट कला है। मुरानो कांच को लगभग 1500°C तापमान पर पिघलाकर उसमें सोना, चाँदी और विभिन्न खनिज मिलाए जाते हैं, जिससे इसके रंग कभी फीके नहीं पड़ते। ‘मिलफियोरी’ (millefiori), ‘सोमरसो’ (sommerso) और ‘रेटिसेलो’ (reticello) जैसी तकनीकें हर वस्तु को अद्वितीय बना देती हैं। मुरानो कांच की वस्तुएँ उपयोगी होने के साथ-साथ कला के जीवंत नमूने होती हैं, जो मानवीय कल्पना और कौशल की चरम सीमा को दर्शाती हैं।
संदर्भ
https://tinyurl.com/mw7r88de
https://tinyurl.com/mzuf8fcn
https://tinyurl.com/w4pc22dt
https://tinyurl.com/556num56
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