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सर्दियों का मौसम आते ही जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य बर्फ की सफ़ेद चादर से ढक जाते हैं। इन क्षेत्रों की बर्फ़ीली वादियाँ न केवल प्राकृतिक सौंदर्य के लिए पर्यटकों को आकर्षित करती हैं, बल्कि रोमांच प्रेमियों के लिए भी एक खास केंद्र बन जाती हैं। देश-विदेश से आने वाले सैलानी यहां आइस स्केटिंग (Ice Skating) जैसे साहसिक खेलों का आनंद लेने पहुंचते हैं, जो ठंड और रोमांच का अनोखा संगम प्रस्तुत करता है।
इसी बीच, शीतकालीन ओलंपिक 2026 (Winter Olympics 2026) की शुरुआत होने जा रही है, जहां आइस स्केटिंग दुनिया के सबसे लोकप्रिय और पसंदीदा खेलों में से एक होगा। ओलंपिक के इस माहौल में, आइए हम भी आइस स्केटिंग के इस रोमांचक खेल के इतिहास, स्वरूप और भारत में इसकी लोकप्रियता के बारे में विस्तार से जानें।
आइस स्केटिंग (Ice Skating) एक ऐसा मनोरंजक खेल है, जिसमें विशेष जूतों (स्केट्स) के नीचे लगे ब्लेड की मदद से बर्फ़ की सतह पर संतुलन बनाते हुए फिसला जाता है। बर्फ़ पर फिसलने और संतुलन साधने की इस कला को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा गया है—

आइस स्केटिंग की शुरुआत लगभग 1000 ईसा पूर्व स्कैंडिनेविया (Scandinavia) में मानी जाती है। प्रारंभिक स्केट्स एल्क (elk), बैल, रेनडियर (reindeer) और अन्य जानवरों की टांगों या पसलियों की हड्डियों से बनाई जाती थीं। वैज्ञानिकों को स्विट्ज़रलैंड की एक झील के तल से आइस स्केट्स की एक जोड़ी मिली है, जिनके लगभग 3,000 वर्ष पुराने होने का अनुमान लगाया गया है। उस समय स्केटिंग का उद्देश्य खेल से अधिक शिकार का पीछा करना और लंबी सर्दियों में तेज़ परिवहन (Quick Transport) प्रदान करना था।
लगभग 1250 ईस्वी के आसपास डच (Dutch) लोगों ने हड्डियों से बने स्केट्स की जगह लोहे के ब्लेड का उपयोग शुरू किया। इन अधिक आधुनिक स्केट्स के साथ “डच रोल” तकनीक का विकास हुआ, जिससे स्केटर्स अपने पैरों से धक्का देकर बेहतर ढंग से फिसल सकते थे। वर्ष 1742 में एडिनबर्ग, स्कॉटलैंड (Edinburgh, Scotland) में पहला ज्ञात स्केटिंग क्लब स्थापित किया गया। 1848 में फिलाडेल्फिया के ई. वी. बुशनेल (E. V. Bushnell) ने स्ट्रैपलेस स्केट (Strapless Skate) का आविष्कार किया, जिसमें ब्लेड सीधे बूट से जुड़े होते थे। इस नवाचार ने आइस स्केटिंग को एक नई दिशा दी, क्योंकि इससे स्केटर्स कूद, स्पिन और जटिल करतब आसानी से कर सके।
वर्ष 1908 में फिगर स्केटिंग को ओलंपिक खेलों में शामिल किया गया। 1990 के दशक तक यह दुनिया के सबसे ज़्यादा देखे जाने वाले खेलों में शामिल हो गया। 2000 के बाद मिनियापोलिस (Minneapolis) में पहली विश्व सिंक्रोनाइज़्ड स्केटिंग चैंपियनशिप (World Synchronized Skating Championships) आयोजित की गई, जिसमें 16 देशों की 21 टीमों ने भाग लिया। आज फिगर स्केटिंग शीतकालीन ओलंपिक के सबसे लोकप्रिय खेलों में गिनी जाती है।

भारत में आइस स्केटिंग मुख्य रूप से लद्दाख, कश्मीर और शिमला जैसे ठंडे क्षेत्रों में संभव है, जहां प्राकृतिक बर्फ़ उपलब्ध होती है। देश के अधिकांश हिस्सों में उष्णकटिबंधीय जलवायु होने के कारण आइस स्केटिंग कृत्रिम रिंकों तक सीमित है। शिमला में हर वर्ष आइस स्केटिंग उत्सव का आयोजन किया जाता है, जो पर्यटकों और स्थानीय लोगों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र होता है।
भारत में आइस स्केटिंग का राष्ट्रीय शासी निकाय आइस स्केटिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (Ice Skating Association of India – ISAI) है। यह संस्था फिगर स्केटिंग (Figure Skating), सिंक्रोनाइज़्ड स्केटिंग (Synchronized Skating), स्पीड स्केटिंग (Speed Skating) और शॉर्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग (Short Track Speed Skating) जैसे खेलों का संचालन करती है। अंतरराष्ट्रीय स्केटिंग संघ और एशियाई स्केटिंग संघ से संबद्ध है तथा देश में 3 इनडोर और 4 आउटडोर आइस रिंक संचालित करती है।
भारत में इनडोर कृत्रिम आइस स्केटिंग रिंक:

भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक आउटडोर आइस रिंक:
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में आइस स्केटिंग सबसे लोकप्रिय साहसिक खेलों में से एक है। यहां स्थित भारत का सबसे बड़ा ओपन-एयर आइस स्केटिंग रिंक हर साल बड़ी संख्या में पर्यटकों और स्थानीय लोगों को आकर्षित करता है। आमतौर पर आइस स्केटिंग का मौसम दिसंबर की शुरुआत में शुरू होकर फरवरी के अंत तक चलता है, और इस दौरान आयोजित उत्सव शिमला की सर्दियों को और भी खास बना देते हैं।
संदर्भ
https://bit.ly/3FRu3Cb
https://tinyurl.com/4uay3skj
https://tinyurl.com/5a7fxjv4
https://tinyurl.com/2jmcsvbr
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