आखिर क्यों भारत की यह खास तितली केवल अंडमान में ही मिलती है?

तितलियाँ और कीट
15-07-2026 09:22 AM
आखिर क्यों भारत की यह खास तितली केवल अंडमान में ही मिलती है?

भारत के अंडमान द्वीपों की घनी हरियाली के बीच एक ऐसी तितली पाई जाती है, जिसका नाम एक ऐतिहासिक हत्याकांड और भारत के एक वायसराय से जुड़ा है। 'अंडमान मॉर्मन' (Papilio mayo) नाम की यह तितली न केवल अपनी खूबसूरती के लिए जानी जाती है, बल्कि यह भारतीय कानून के तहत विशेष संरक्षण प्राप्त एक दुर्लभ प्रजाति भी है। अंडमान मॉर्मन एक 'स्वेलोटेल' तितली है, जो मुख्य रूप से बंगाल की खाड़ी में स्थित अंडमान द्वीप समूह तक ही सीमित है। इसकी खोज और वैज्ञानिक नामकरण के पीछे एक दिलचस्प इतिहास है। इसका वैज्ञानिक नाम 'पैपिलियो मेयो' (Papilio mayo) भारत के छठे वायसराय, रिचर्ड बुर्के (Earl of Mayo) के सम्मान में रखा गया था, जिनकी 1872 में पोर्ट ब्लेयर में हत्या कर दी गई थी। इस घटना के अगले वर्ष, 1873 में विलियम स्टीफन एटकिंसन ने पहली बार इस प्रजाति का विवरण दुनिया के सामने रखा था।

अंडमान मॉर्मन तितली की वैज्ञानिक पहचान क्या है?
अंडमान मॉर्मन तितली 'पैपिलियोनिडी' (Papilionidae) परिवार से संबंधित है। वैज्ञानिक वर्गीकरण के अनुसार, इसे हालिया विश्लेषणों (2023) में 'पैपिलियो मेमन' (Papilio memnon) की एक उप-प्रजाति के रूप में मान्यता दी गई है। यह तितली अपने पंखों के फैलाव के मामले में काफी प्रभावशाली है, जो लगभग 110 मिमी से 130 मिमी तक होता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसमें पाया जाने वाला 'यौन द्विरूपता' (Sexual Dimorphism) है, जिसका अर्थ है कि इसके नर और मादा शारीरिक रूप से बिल्कुल अलग दिखाई देते हैं।

नर अंडमान मॉर्मन का ऊपरी हिस्सा गहरे मखमली काले रंग का होता है। इसके अगले पंखों पर हरे-पीले रंग की बारीक धारियां होती हैं, जो कभी-कभी धुंधली भी हो सकती हैं। वहीं, इसके पिछले पंखों पर एक चौड़ी और चमकीली हल्के नीले रंग की पट्टी होती है, जो इसे बेहद आकर्षक बनाती है। इसके विपरीत, मादा अंडमान मॉर्मन देखने में बिल्कुल अलग होती है। वह 'बेट्सियन मिमिक्री' (Batesian mimicry) का सहारा लेती है, यानी वह अपनी सुरक्षा के लिए 'अंडमान क्लबटेल' (Losaria rhodifer) जैसी जहरीली तितली की नकल करती है। मादा के पंखों पर सफेद और लाल रंग के निशान होते हैं और नर के विपरीत, मादा के पिछले पंखों पर छोटी पूंछ जैसी संरचना होती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि मादाओं की यह नकल उन्हें शिकारियों, विशेषकर पक्षियों से बचाने में मदद करती है।

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यह तितली किन प्राकृतिक आवासों में रहना पसंद करती है?
अंडमान मॉर्मन मुख्य रूप से अंडमान द्वीप समूह के उष्णकटिबंधीय सदाबहार वर्षावनों (Tropical Rainforests) में निवास करती है। यह तितली तटीय वनस्पतियों और जंगलों के किनारों पर अधिक सक्रिय देखी जाती है। प्राकृतिक आवास के रूप में इसे नमी वाले और कम ऊंचाई वाले इलाके (समुद्र तल से 300 मीटर तक) पसंद हैं। शोध बताते हैं कि दक्षिण और मध्य अंडमान के क्षेत्रों, जैसे पोर्ट ब्लेयर के आसपास के हुमफ्रेगंज, चिड़िया टापू बीच और माउंट हैरियट नेशनल पार्क में इसके देखे जाने की अधिक संभावना रहती है। द्वीपों की भौगोलिक स्थिति और यहाँ का मानसून जलवायु, जहाँ सालाना 3,000 मिमी से अधिक वर्षा होती है, इस तितली के जीवित रहने के लिए आवश्यक सघन वनस्पतियों को बनाए रखता है।

प्रजनन चक्र और भोजन के लिए यह किन पौधों पर निर्भर है?
अंडमान मॉर्मन का जीवन चक्र अंडे, लार्वा (इल्ली), प्यूपा और वयस्क इन चार चरणों से होकर गुजरता है। यह एक 'मल्टीवोल्टाइन' (Multivoltine) प्रजाति है, जिसका अर्थ है कि यह साल भर में कई पीढ़ियों को जन्म दे सकती है। इसके प्रजनन और विकास के लिए 'रूटेसी' (Rutaceae) परिवार के पौधे अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसके लार्वा मुख्य रूप से 'ग्लाइकोस्मिस पेंटाफिला' (Glycosmis pentaphylla) और 'जेंथो जाइलम ओवेलिफोलियम' (Zanthoxylum ovalifolium) जैसे पौधों की पत्तियों को अपना भोजन बनाते हैं।

एक वयस्क तितली के रूप में, अंडमान मॉर्मन मुख्य रूप से फूलों के अमृत (Nectar) पर निर्भर रहती है, जो उसे उड़ान भरने के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है। यह अक्सर जंगल की निचली झाड़ियों और जंगली लताओं के फूलों पर मंडराती हुई पाई जाती है। इसके अलावा, नर तितलियाँ अक्सर 'पुडलिंग' (Puddling) की प्रक्रिया में शामिल होती हैं, जहाँ वे गीली मिट्टी या कार्बनिक पदार्थों से खनिज और लवण अवशोषित करते हैं। यह व्यवहार उनके प्रजनन स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य माना जाता है।

द्वीप प्रजाति होने के कारण इस पर क्या संकट मंडरा रहे हैं?
अंडमान मॉर्मन के लिए सबसे बड़ी चुनौती इसकी 'स्थानिक' (Endemic) प्रकृति है। यह केवल अंडमान द्वीपों पर ही पाई जाती है और मुख्य भूमि भारत या अन्य द्वीपों पर इसका कोई अस्तित्व नहीं है। इस कारण, यह आवास में होने वाले छोटे से बदलाव के प्रति भी बहुत संवेदनशील है। द्वीप की सीमाओं के कारण इसके पास प्रवास (Migration) का कोई विकल्प नहीं होता। यदि इसके प्राकृतिक जंगलों को काटा जाता है, तो इसकी पूरी आबादी खतरे में पड़ जाती है।

वर्तमान में, कृषि विस्तार, लकड़ी के लिए वनों की कटाई और बुनियादी ढांचे के विकास (जैसे सड़क और पर्यटन) ने इसके आवास को काफी नुकसान पहुँचाया है। इसके अतिरिक्त, जलवायु परिवर्तन एक बड़ा खतरा बनकर उभरा है। समुद्र के बढ़ते स्तर और चक्रवातों की बढ़ती तीव्रता अंडमान के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को बिगाड़ रही है, जिससे इस तितली के लिए भोजन और प्रजनन के पौधों की कमी हो रही है। वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि अवैध संग्रह (Illegal Collection) और व्यापार भी इसकी आबादी पर दबाव डाल रहे हैं।

अंडमान के इस पारिस्थितिकी तंत्र को बचाना क्यों जरूरी है?
अंडमान मॉर्मन जैसी प्रजातियों का संरक्षण केवल एक तितली को बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए आवश्यक है। ये तितलियाँ परागण (Pollination) की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जिससे जंगलों का पुनर्जन्म संभव होता है। भारतीय कानून के तहत, अंडमान मॉर्मन को 'वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972' की अनुसूची II (Schedule II) में रखा गया है। इसका अर्थ है कि इस तितली का शिकार करना, इसे पकड़ना या इसका व्यापार करना एक गंभीर अपराध है, जिसके लिए तीन से पांच साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि माउंट हैरियट और सैडल पीक जैसे राष्ट्रीय उद्यानों में इसकी निगरानी और सुरक्षा को और कड़ा किया जाना चाहिए। द्वीपों पर बाहरी प्रजातियों के प्रवेश को रोकना और स्थानीय समुदायों को इस दुर्लभ विरासत के प्रति जागरूक करना भी संरक्षण की दिशा में बड़े कदम हो सकते हैं। अंडमान मॉर्मन महज एक कीट नहीं है, बल्कि यह हमारे देश की उस अनमोल जैव विविधता का प्रतीक है, जिसे यदि एक बार खो दिया गया, तो दोबारा वापस नहीं लाया जा सकेगा।


संदर्भ

1. https://tinyurl.com/27qwgv9q 

2. https://tinyurl.com/23u5b9m3 

3. https://tinyurl.com/257kg9z8 

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